Betul News: मध्य प्रदेश के बैतूल की प्रखरश्री दीदी ने जज की परीक्षा पास करने के बाद नौकरी ज्वाइन करने के बजाय जैन दीक्षा का मार्ग चुना है। जानिए उनकी कहानी और 22 नवंबर को होने वाले दीक्षा समारोह की पूरी जानकारी।
Betul News: मध्य प्रदेश के बैतूल की एक बेटी ने ऐसा फैसला लिया है, जिसकी चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है। कड़ी मेहनत से न्यायिक सेवा परीक्षा पास कर जज बनने का सपना पूरा करने वाली ब्रह्मचारिणी प्रखरश्री दीदी अब अदालत की कुर्सी पर बैठने के बजाय संयम और वैराग्य का मार्ग अपनाने जा रही हैं। उन्होंने नौकरी ज्वाइन करने से पहले सांसारिक जीवन का त्याग कर जैन दीक्षा लेने का निर्णय किया है। उनके इस फैसले ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
दीक्षा से पहले बैतूल में परिवार और जैन समाज की ओर से उनके सम्मान में भव्य बिनौली निकाली गई। इस शोभायात्रा में विंटेज कारों, शाही बग्घी और उदयपुर से आए विशेष बैंड ने आकर्षण बढ़ाया। अब प्रखरश्री दीदी सहित पांच दीक्षार्थी बहनें 22 नवंबर 2026 को सोनागिर जी सिद्ध क्षेत्र में जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण करेंगी।
माता-पिता का सपना पूरा करने के लिए पास की जज की परीक्षा
प्रखरश्री दीदी की कहानी इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि उन्होंने न्यायिक सेवा परीक्षा पास कर अपने माता-पिता की इच्छा पूरी की। उनके परिवार की चाहत थी कि बेटी पढ़-लिखकर जज बने और समाज में अपनी अलग पहचान बनाए। उन्होंने मेहनत से परीक्षा उत्तीर्ण कर माता-पिता का यह सपना पूरा किया।

हालांकि, उनके मन में बचपन से ही वैराग्य और आध्यात्मिक जीवन के प्रति रुचि थी। प्रखरश्री दीदी का मानना है कि जज या वकील बनकर वे समाज की सेवा एक सीमित दायरे में कर सकती थीं, लेकिन भगवान महावीर के बताए अहिंसा, संयम और त्याग के मार्ग पर चलकर वे व्यापक स्तर पर मानवता को संदेश दे सकती हैं।
इसी विचार के साथ उन्होंने सांसारिक सुख-सुविधाओं से दूर होकर जैन धर्म की दीक्षा लेने का निर्णय किया।
बैतूल में भव्य बिनौली, विंटेज कारों और बैंड ने खींचा ध्यान
दीक्षा से पहले बैतूल में प्रखरश्री दीदी सहित पांच दीक्षार्थी बहनों के सम्मान में भव्य बिनौली चल समारोह निकाला गया। परिवार के सदस्यों और सकल जैन समाज ने इस आयोजन को विशेष बनाने में सहयोग किया।
शोभायात्रा में गाजे-बाजे के साथ विंटेज कारों का काफिला और आकर्षक शाही बग्घियां शामिल रहीं। राजस्थान के उदयपुर से बुलाए गए विशेष बैंड ने भी समारोह की शोभा बढ़ाई। शहर के प्रमुख मार्गों से निकले इस चल समारोह में बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग और श्रद्धालु शामिल हुए।
जगह-जगह दीक्षार्थी बहनों का स्वागत किया गया। समारोह के दौरान धार्मिक परंपराओं के अनुसार रस्में भी निभाई गईं। परिवार और समाज के लोगों ने उन्हें सम्मानपूर्वक विदाई दी।
22 नवंबर 2026 को सोनागिर जी में लेंगी जैनेश्वरी दीक्षा
प्रखरश्री दीदी सहित पांचों दीक्षार्थी बहनें आगामी 22 नवंबर 2026 को मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध जैन सिद्ध क्षेत्र सोनागिर जी में जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण करेंगी। यह धार्मिक आयोजन गणिनी आर्यिका विशुद्धश्री माताजी के सानिध्य में प्रस्तावित है।
दीक्षा के बाद दीक्षार्थी बहनें संयम और साधना से जुड़ा जीवन अपनाएंगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दीक्षा के पश्चात वे श्वेत वस्त्र धारण करेंगी। जैन परंपरा में दीक्षा को सांसारिक मोह-माया से विरक्ति, आत्मकल्याण और आध्यात्मिक साधना की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।
प्रखरश्री दीदी के फैसले की क्यों हो रही है चर्चा?
आमतौर पर न्यायिक सेवा परीक्षा पास करना किसी भी अभ्यर्थी के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। ऐसे में जज की नौकरी ज्वाइन करने से पहले ही आध्यात्मिक जीवन चुनने का प्रखरश्री दीदी का निर्णय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
उनकी कहानी शिक्षा, उपलब्धि और व्यक्तिगत आध्यात्मिक संकल्प के अलग-अलग पहलुओं को सामने लाती है। एक ओर उन्होंने माता-पिता की इच्छा पूरी करने के लिए न्यायिक सेवा परीक्षा पास की, वहीं दूसरी ओर अपने जीवन का लक्ष्य आध्यात्मिक साधना को बनाने का फैसला किया।
बैतूल में आयोजित भव्य बिनौली के बाद अब सभी की नजरें 22 नवंबर को होने वाले दीक्षा समारोह पर हैं।
