भरतपुर के केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में मांसाहारी पौधे की दुर्लभ उपस्थिति, यूट्रीकुलेरिया ने पर्यावरण में नया रंग जोड़ा

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भरतपुर के केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में मांसाहारी पौधे की दुर्लभ उपस्थिति, यूट्रीकुलेरिया ने पर्यावरण में नया रंग जोड़ा

भरतपुर: राजस्थान के प्रसिद्ध केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (Keoladeo National Park) में इस बार एक अनोखा और दुर्लभ मांसाहारी पौधा यूट्रीकुलेरिया (Utricularia) बड़ी संख्या में पाया गया है। यह पौधा पहले मेघालय और दार्जिलिंग क्षेत्रों में ही देखा जाता था, लेकिन इस बार भरतपुर के घना क्षेत्र में इसकी उपस्थिति ने वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरणविदों को चौंका दिया है। इसे आमतौर पर ब्लैडरवॉर्ट (Bladderwort) भी कहा जाता है और यह छोटे कीट-पतंगों और जलजीवों का शिकार करता है, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण संतुलन बना रहता है।

यूट्रीकुलेरिया की विशेषताएँ

यूट्रीकुलेरिया मांसाहारी पौधों की एक विशेष प्रजाति है, जो अपनी अजीबोगरीब शिकार विधि के लिए जानी जाती है। यह पौधा मूत्राशय जैसे जाल (ब्लैडर) का उपयोग करता है, जिसे वह छोटे जीवों को पकड़ने के लिए तंत्र के रूप में उपयोग करता है। जब कोई छोटा कीट या जलजीव इस जाल में फंसता है, तो वह जाल के अंदर पकड़ा जाता है और फिर मरकर पौधे द्वारा खा लिया जाता है। यह पौधा मुख्य रूप से प्रोटोजोआ, कीड़े, लार्वा, मच्छर, और टैडपोल जैसे छोटे जीवों का शिकार करता है।

केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में यूट्रीकुलेरिया की उपस्थिति का महत्व

घना निदेशक मानस सिंह ने इस पौधे के बारे में बताते हुए कहा कि यूट्रीकुलेरिया की उपस्थिति से क्षेत्र की जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र में नया आयाम जुड़ा है। उन्होंने कहा कि यह पौधा केवलादेव जैसे जलमग्न क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह छोटे जलजीवों को नियंत्रित करने में मदद करता है, जिससे जलधारा में संतुलन बना रहता है। यूट्रीकुलेरिया, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में प्रकट होता है जहां पानी की गुणवत्ता अच्छी हो और सूक्ष्म जीवों की संख्या पर्याप्त हो।

पानी की स्थिति का प्रभाव

यूट्रीकुलेरिया के इस साल घना के एल, के, और बी ब्लॉक में बड़ी संख्या में पाए जाने का कारण पांचना बांध से भरपूर पानी आना माना जा रहा है। जब बांध से पर्याप्त पानी मिला, तब ही यह मांसाहारी पौधा फिर से दिखाई देने लगा। इसके पहले प्रोफेसर एमएम त्रिगुणायत ने भी कहा कि सालों पहले जब घना क्षेत्र को पांचना बांध का पानी मिलता था, तब यह पौधा देखा गया था, लेकिन पानी की कमी के कारण यह पहले कुछ वर्षों तक नजर नहीं आया। अब जब पानी की स्थिति बेहतर हुई है, तो इस पौधे का पुनः आगमन हुआ है।

यूट्रीकुलेरिया और पर्यावरणीय संतुलन

यूट्रीकुलेरिया का शिकार तंत्र सिर्फ पौधे के लिए फायदेमंद नहीं है, बल्कि यह समग्र पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी महत्वपूर्ण है। छोटे कीट-पतंगे और जलजीवों का शिकार करने से ये पौधे जल की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद करते हैं। इसके अलावा, यह पौधा घना जैसे वेटलैंड इकोसिस्टम में जैव विविधता को बढ़ावा देता है और जलस्रोतों को स्वच्छ रखने में सहायक साबित होता है।

यूट्रीकुलेरिया का शिकार तंत्र और जैव विविधता

यूट्रीकुलेरिया, जैसे मांसाहारी पौधे, पारिस्थितिकी तंत्र में एक विशेष स्थान रखते हैं क्योंकि ये वातावरण में मौजूद छोटे जीवों की संख्या को नियंत्रित करके पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखते हैं। इन पौधों द्वारा शिकार किए जाने वाले जीवों में जल में रहने वाले छोटे जीव, मच्छर और टैडपोल शामिल हैं, जो यदि अनियंत्रित हो जाएं तो जल के पारिस्थितिकी तंत्र में असंतुलन पैदा कर सकते हैं।

 

 

 

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