डीएम को दिया था शिकायत पत्र, जांच और कार्रवाई का मिला था आश्वासन; किरावली एसडीएम से मिला पीड़ित तो कहा- किसी की नौकरी के पीछे क्यों पड़े हो
फोनपे के माध्यम से पांच हजार रुपये देने का दावा, साक्ष्य भी होने की बात
अग्र भारत संवाददाता,आगरा। शासन-प्रशासन भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई के दावे करता है, लेकिन तहसील स्तर पर रिश्वतखोरी के आरोपों में घिरे कर्मचारियों को संरक्षण दिए जाने के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। ताजा मामला किरावली तहसील क्षेत्र का है,जहां एक किसान ने लेखपाल पर कुराबंदी कराने के नाम पर 20 हजार रुपये लेने का आरोप लगाया है। पीड़ित का कहना है कि शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई, बल्कि अधिकारियों ने उसे ही समझाने का प्रयास किया।
पनवारी निवासी किसान गिर्राज सिंह ने बताया कि उनकी भूमि गाटा संख्या 282, 286 और 289 की कुराबंदी के लिए 9 मार्च को एसडीएम ने आदेश जारी किए थे। आरोप है कि आदेश के अनुपालन में पहुंचे हल्का लेखपाल ने कार्य कराने के एवज में 25 हजार रुपये की मांग की। बाद में 15 हजार रुपये में सहमति बनी। किसान का आरोप है कि रुपये लेने के बाद भी कार्य नहीं किया गया और बाद में अतिरिक्त धनराशि की मांग की गई।किसान का दावा है कि लेखपाल को पांच हजार रुपये फोनपे के माध्यम से भी दिए गए, जिसके ऑनलाइन भुगतान के साक्ष्य उसके पास उपलब्ध हैं। इसके बावजूद कार्य नहीं किया गया और लगातार टालमटोल की जाती रही। किसान का आरोप है कि बाद में और रुपये देने का दबाव बनाया गया तथा कार्य करने से इंकार कर दिया गया।
गिर्राज सिंह का कहना है कि नगद दिए गए रुपयों के संबंध में संबंधित स्थानों के सीसीटीवी फुटेज भी जांच में निकाले जा सकते हैं। उन्होंने पूरे मामले की शिकायत जिलाधिकारी आगरा मनीष बंसल से कर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की थी। शिकायत पर जांच और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन भी मिला था।पीड़ित किसान का आरोप है कि हाल ही में जब वह अपनी शिकायत के संबंध में किरावली तहसील के एक सक्षम अधिकारी से मिला तो उसे कार्रवाई का भरोसा देने के बजाय कहा गया कि “आपको भी जेल जाना पड़ सकता है, आपने रिश्वत क्यों दी? किसी की नौकरी चली जाएगी तो आपको क्या फायदा होगा।”किसान का कहना है कि इस तरह की बातों से वह मानसिक रूप से परेशान और अवसादग्रस्त महसूस कर रहा है। उसका आरोप है कि दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने के बजाय शिकायतकर्ता को ही हतोत्साहित किया जा रहा है।इस संबंध में एसडीएम किरावली से पक्ष जानने के लिए फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की। उनके व्हाट्सएप नंबर पर संदेश भेजकर भी प्रतिक्रिया मांगी गई, किंतु समाचार लिखे जाने तक कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ।
