Agra News, आगरा, बृज खंडेलवाल । आगरा में यमुना नदी पर बना डॉ. अंबेडकर पुल, जिसे कभी शहर की यातायात समस्या का स्थायी समाधान माना गया था, आज भ्रष्टाचार, लापरवाही और सरकारी सिस्टम की नाकामयाबी का जीता-जागता सबूत बन चुका है। लगभग 15 साल पहले बना यह पुल अब जर्जर हालत में है और इस पर लगातार मरम्मत का काम जारी है, लेकिन यह कब पूरा होगा, कोई नहीं जानता। यह पुल अब सिर्फ एक सड़क सेतु नहीं, बल्कि हर रोज आगरावासियों को यह याद दिलाता है कि कैसे सरकारी परियोजनाएं धूमधाम से शुरू होकर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती हैं।
बार-बार टूटता, बार-बार बनता: ‘हमेशा मरम्मत वाला पुल’

मई 2025 में आई एक सामान्य आंधी के बाद इस पुल की रेलिंगें टूटकर गिर गईं – एक पुल के ऊपर, तो दूसरी सीधी यमुना नदी में जा समाई। यह कोई पहली घटना नहीं है। 2020 में भी यह पुल कई बार खराब हालत के कारण बंद किया गया था। अब लोग इसे मजाक में “हमेशा मरम्मत वाला पुल” कहने लगे हैं, क्योंकि इसकी मरम्मत का सिलसिला कभी खत्म नहीं होता।
सरकारी प्रतिक्रिया के नाम पर सिर्फ बैरिकेड लगा दिए जाते हैं, थोड़ी-बहुत खानापूर्ति वाली मरम्मत होती है, और फिर सब कुछ पहले जैसा हो जाता है। ऐसा लगता है जैसे नीति बन गई हो – “घाव पर पट्टी लगाओ और भगवान भरोसे छोड़ दो।” लेकिन इस पुल में दिखने वाली गहरी दरारें न तो सीमेंट से भरेंगी और न ही बहानों से।
घटिया निर्माण और जवाबदेही का अभाव: भ्रष्टाचार की कहानी
इस पुल की बदहाली के पीछे वही पुरानी कहानी है – घटिया निर्माण सामग्री, कोई जवाबदेही नहीं, और ऐसे ठेकेदार जो सरकारी पैसे तो खा जाते हैं, लेकिन जनता को खतरे में डाल देते हैं। जिस शहर में ताजमहल अपनी खूबसूरती और मजबूती से दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करता है, वहीं कुछ किलोमीटर दूर अंबेडकर पुल अपनी बदहाली से आगरा को शर्मिंदा करता है।
विडंबना देखिए – समानता और न्याय के प्रतीक डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम पर बना यह पुल अब असमानता, असुरक्षा और अन्याय का प्रतीक बन गया है। पुल के निर्माण और रखरखाव में भ्रष्टाचार की बातें अब फुसफुसाहटों से निकलकर खुलकर सामने आ चुकी हैं। भले ही कोई ठोस सबूत न हो, लेकिन पुल की हालत ही सब कुछ बयां कर देती है। यह पुल अपनी उम्र के कारण नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के दीमक के कारण बिखर गया है – और इसके साथ ही लोगों का सरकारी तंत्र पर भरोसा भी गिरा है।
डिज़ाइन में छेड़छाड़ और पर्यटकों को परेशानी
कई लोगों का मानना है कि इस सेतु के मूल डिजाइन में राजनीतिक और आर्थिक स्वार्थ या दबाव के चलते छेड़छाड़ की गई। आरोप है कि पुल को गलत कोण पर मोड़ा गया, जिससे इसकी संरचनात्मक अखंडता प्रभावित हुई। सेतु निगम के अधिकारी लगातार तकनीकी खामियों की लीपापोती करते रहे हैं। हर कुछ महीनों में इसकी मरम्मत करनी पड़ती है। एत्माद्दौला जाने वाले पर्यटक बार-बार दिक्कतों में फंसते हैं। अब तो स्थानीय गाइड भी पर्यटकों को इस रास्ते से ले जाने से कतराने लगे हैं।
जब आम लोग हर दिन रास्ता बदलते हैं, मलबे से बचते हैं और अपनी जान जोखिम में डालते हैं, तो यह साफ है – यह सिर्फ आगरा की नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए शर्म की बात है। जब तक दोषियों को सजा नहीं मिलेगी, जब तक ढाँचा जनता की सेवा के लिए नहीं, बल्कि लूट के लिए बनेगा, तब तक अंबेडकर पुल ऐसे ही जंग खाता रहेगा – भारत में गिरती व्यवस्था और भ्रष्टाचार का एक जीता-जागता सबूत।
