आगरा, उत्तर प्रदेश: ताजनगरी आगरा में शस्त्र लाइसेंस बनवाने के नाम पर हुए फर्जीवाड़े और असलहा तस्करी के मामले ने अब और तूल पकड़ लिया है। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) द्वारा नाई की मंडी थाने में मुकदमा दर्ज कराए जाने के बाद, अब उत्तर प्रदेश के पूर्व आईपीएस अधिकारी और आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने यूपी के पुलिस महानिदेशक (DGP) को पत्र लिखा है और सोशल मीडिया पर ट्वीट कर सभी नामजद आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और उन पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग की है, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
क्या है पूरा मामला? STF ने दर्ज किया था मुकदमा
चंद दिनों पहले ही एसटीएफ की गहन जांच के बाद आगरा में फर्जी दस्तावेजों और गलत जानकारियों के आधार पर शस्त्र लाइसेंस बनवाने का एक बड़ा घोटाला सामने आया था। इस मामले में एसटीएफ ने थाना नाई की मंडी में मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमे में जिन लोगों को नामजद किया गया है, उनमें मोहम्मद जैद खान, मोहम्मद अरशद खान, राकेश कुमार बघेल, भूपेंद्र, शिव कुमार सारस्वत, शोभित चतुर्वेदी (जो कथित तौर पर रिपोर्टर हैं), और सेवानिवृत्त संजय कुमार एएलसी प्रथम शामिल हैं। आरोप है कि इन सभी ने प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत से और प्रशासनिक तंत्र की कमजोरियों का फायदा उठाकर फर्जी तरीके से शस्त्र लाइसेंस बनवाए।
अमिताभ ठाकुर का कड़ा रुख: ‘रसूखदार हैं आरोपी, बचने का कर सकते हैं प्रयास’
पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। उन्होंने यूपी के डीजीपी को लिखे अपने पत्र में साफ तौर पर कहा है कि मुकदमे में नामजद सभी आरोपी बड़े रसूखदार हैं और वे अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर जांच से बचने या उसे प्रभावित करने का प्रयास कर सकते हैं। इसी आशंका को देखते हुए उन्होंने डीजीपी से मांग की है कि सभी नामजद आरोपियों को बिना किसी देरी के तत्काल गिरफ्तार किया जाए और उन पर गैंगस्टर एक्ट जैसी सख्त धाराएं लगाई जाएं, ताकि वे जमानत न पा सकें और इस गंभीर अपराध के लिए उन्हें उचित दंड मिल सके।
मुकदमे की विवेचना ACP रैंक के अधिकारी से कराने की मांग
अमिताभ ठाकुर ने अपनी मांग में यह भी जोड़ा है कि इस संवेदनशील और बड़े मामले की विवेचना किसी निम्न स्तर के अधिकारी से न कराकर, कम से कम एक एसीपी (सहायक पुलिस आयुक्त) रैंक के अधिकारी से कराई जाए। उनका मानना है कि एक उच्च रैंक का अधिकारी ही इस मामले की गंभीरता को समझते हुए निष्पक्ष और प्रभावी जांच कर पाएगा और किसी भी दबाव में आए बिना दोषियों को बेनकाब कर सकेगा।
अमिताभ ठाकुर के ट्वीट के बाद हड़कंप
पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर अपने बेबाक बयानों और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए जाने जाते हैं। इस मामले को लेकर उनके ट्वीट के बाद आगरा के साथ-साथ पूरे प्रदेश के प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। उनके ट्वीट ने इस मामले को और अधिक जन-चर्चा में ला दिया है और अधिकारियों पर जल्द कार्रवाई करने का दबाव बढ़ा दिया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि पुलिस और प्रशासन इस मामले में अब कितनी तेजी और सख्ती से कदम उठाता है।
