Mathura News, छटीकरा: वृन्दावन छटीकरा रोड़ स्थित ठाकुर श्रीराधा गिरिधर गोपाल मन्दिर परिसर में चल रही अष्ट दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ महोत्सव में एक दिव्य और आध्यात्मिक वातावरण था। इस महोत्सव के दौरान, व्यासपीठ पर आसीन प्रख्यात संत स्वामी गिरीशानन्द सरस्वती महाराज ने देश-विदेश से आए भक्तों को भगवान श्री कृष्ण के अनेक दिव्य प्रसंगों की कथा श्रवण कराई। इस कथा में प्रमुख रूप से महारास लीला, मथुरा गमन, कुब्जा पर कृपा, कंस वध, वसुदेव-देवकी की कारावास से मुक्ति, उद्धव-गोपी संवाद और श्री कृष्ण-रूक्मणी विवाह जैसे महान प्रसंगों को वर्णित किया गया।
इस भव्य धार्मिक आयोजन में लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला की धर्मपत्नी डॉ. अमिता बिरला विशेष अतिथि के रूप में पधारीं। उन्होंने श्रीमद्भागवत ग्रंथ का पूजन-अर्चन किया और स्वामी गिरीशानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके अलावा, विश्व हिंदू महासंघ भारत, मठ-मंदिर प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष पण्डित आर. एन. द्विवेदी (राजू भैया) भी इस महोत्सव में शामिल हुए और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन विधि संपन्न की।
स्वामी गिरीशानंद सरस्वती महाराज ने उद्धव-गोपी संवाद का प्रसंग सुनाते हुए कहा, “भगवान श्री कृष्ण प्रेम के वशीभूत हैं और ब्रज गोपिकाएं प्रेम की ध्वजा हैं। भगवान श्री कृष्ण के प्रति ब्रज गोपियों का प्रेम इतना अनन्य और पवित्र है कि उसकी तुलना किसी भी अन्य प्रेम से नहीं की जा सकती।” उन्होंने यह भी कहा कि ब्रज भूमि में हर कण में प्रेम समाहित है, और यह भूमि ऐसी है जहां उद्धव जैसे ब्रह्मज्ञानी भी गोपियों के सामने आने के बाद अपने अहंकार को छोड़ देते हैं। यही कारण है कि यह पावन भूमि शिव, ब्रह्मा और सनकादिक जैसे देवताओं द्वारा पूजी जाती है।
इस खास अवसर पर भगवान श्री कृष्ण और रुक्मणी विवाह की झांकी अत्यंत आकर्षक रूप से सजाई गई। विवाह संबंधित बधाईयों और भजनों का गायन भी किया गया, जिसमें संगीत की मृदुल स्वर लहरियों ने माहौल को और भी दिव्य बना दिया।
कार्यक्रम में संत प्रवर स्वामी माधवानंद महाराज, स्वामी महेशानंद सरस्वती महाराज, स्वामी गोविंदानंद सरस्वती महाराज, सोमकांत द्विवेदी, संत सेवानंद ब्रह्मचारी, महोत्सव के मुख्य यजमान श्रीमती सरला-राजेन्द्र खेतान आदि प्रमुख लोग उपस्थित थे।
इस महोत्सव ने समस्त श्रद्धालुओं को भगवान श्री कृष्ण के प्रेम और भक्ति की गहराईयों में डुबो दिया और उन्हें एक नई आध्यात्मिक दिशा प्रदान की।
