पुलिस आयुक्त के आदेश पर घटना के 13 दिन बाद दर्ज हुआ सिपाही के खिलाप केस,पहले हो चुकी है निलंबन की कार्यवाही
अछनेरा। किशोरी से अश्लील हरकत के आरोप में अछनेरा क्षेत्र में तैनात एक सिपाही के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोप है कि घटना के बाद पीड़ित परिवार कार्रवाई के लिए 13 दिन तक थाने के चक्कर काटता रहा, लेकिन थाना स्तर पर मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। पुलिस आयुक्त के हस्तक्षेप के बाद 14वें दिन मुकदमा दर्ज हो सका। पीड़ित परिवार ने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। कई बार जिलाधिकारी और पुलिस कमिश्नर से मिला था पीड़ित परिवार तब कही जाकर हुआ 13 दिन बाद केस दर्ज।
घटना 31 जुलाई की बताई गई है। अछनेरा क्षेत्र के एक गांव में चौकी के पास किराए के मकान में रहने वाला आरोपित सिपाही पीआरवी पर तैनात है। आरोप है कि घटना के दिन किशोरी घर पर अकेली थी। इसी दौरान सिपाही उसके घर में घुस आया और उसके साथ अश्लील हरकत की। किशोरी के घबरा जाने पर उसने परिजनों को घटना की जानकारी दी। परिजन थाने पहुंचे और कार्रवाई की मांग की, लेकिन आरोप है कि उनकी शिकायत पर तत्काल मुकदमा दर्ज नहीं किया गया।पीड़ित परिवार का आरोप है कि स्थानीय स्तर पर मामले को दबाने और समझौता कराने का लगातार दबाव बनाया गया। उन्हें पुलिस से विवाद नहीं करने और मामले को आपसी स्तर पर निपटाने की बात कहकर समझाने का प्रयास किया गया। परिवार का कहना है कि आरोपित वर्दीधारी है, इसलिए स्थानीय स्तर पर उसके खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उसे बचाने का प्रयास किया गया।मामले में मुकदमा दर्ज न होने पर पीड़ित परिवार ने पुलिस आयुक्त दीपक कुमार से शिकायत की। पुलिस आयुक्त के निर्देश के बाद मुकदमा दर्ज किया गया। डीसीपी पश्चिम आदित्य सिंह ने बताया कि तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच की जा रही है। साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।पीड़ित परिवार का कहना है कि आरोपित सिपाही से उनकी कोई पुरानी रंजिश नहीं है। घटना के कारण ही शिकायत की गई है। उनका आरोप है कि स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली के कारण उन्हें 13 दिन तक कार्रवाई के लिए भटकना पड़ा। परिवार ने मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है, ताकि जांच पर किसी तरह का सवाल न उठे।वर्दीधारी पर लगे आरोपों और मुकदमा दर्ज होने में हुई देरी को लेकर क्षेत्र में भी चर्चा है। हालांकि मामले में पुलिस की जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट होगी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साक्ष्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
