थाना प्रभारी पर जीडी समेत रिकॉर्ड में हेरफेर कर अधिकारियों व न्यायालय को गुमराह करने के आरोप
आगरा। थाना सिकंदरा में महिला के साथ पुलिस अभिरक्षा में कथित मारपीट और उत्पीड़न के मामले में अदालत के आदेश पर चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। वहीं, गुरुवार को सत्र न्यायालय ने पुलिस की ओर से दायर रिवीजन याचिका खारिज कर दी, जिससे विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश बरकरार रहा।आज उक्त प्रकरण में पीड़िता के अधिवक्ता डॉक्टर अजीत सिंह दीवानी के बार हॉल में मीडिया से वार्ता करेंगे।
मामला रुनकता मोड़ निवासी सीमा सिकरवार से जुड़ा है। सीमा का आरोप है कि जमीन विवाद से जुड़े प्रकरण तथा थाना शाहगंज के एक मुकदमे में जारी वारंट के तहत गिरफ्तारी के बाद थाना सिकंदरा पुलिस ने उनके साथ मारपीट की थी। मामले में पुलिस द्वारा गिरफ्तारी के समय कराए गए मेडिकल परीक्षण में किसी चोट का उल्लेख नहीं था, जबकि न्यायालय के आदेश पर गठित मेडिकल बोर्ड द्वारा कराए गए परीक्षण में तीन चोटें दर्ज की गई थीं।,,मेडिकल रिपोर्ट और उपलब्ध अभिलेखों के अवलोकन के बाद प्रभारी विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने छह जून को उपनिरीक्षक सुरजीत सिंह, उपनिरीक्षक नीलेश शर्मा, महिला उपनिरीक्षक नेहा और महिला हेड कांस्टेबल सीमा के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने तथा विभागीय जांच कराने के निर्देश दिए थे। न्यायालय ने प्रथम दृष्टया पुलिस अभिरक्षा में मारपीट और उत्पीड़न की आशंका व्यक्त की थी।,,न्यायालय के आदेश के अनुपालन में बीती रात संबंधित चारों पुलिसकर्मियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया गया। इसके बाद राज्य की ओर से आदेश को चुनौती देते हुए दायर रिवीजन याचिका पर गुरुवार को सत्र न्यायाधीश की अदालत में सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने रिवीजन को पोषणीय न मानते हुए प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज कर दिया।,,,उधर, पीड़िता की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता डॉ. अजीत सिंह शुक्रवार को सुबह 11 बजे दीवानी न्यायालय परिसर स्थित बार हॉल में प्रेस वार्ता करेंगे। उन्होंने बताया कि प्रेस वार्ता में मामले से जुड़े न्यायालयी दस्तावेज, मेडिकल रिपोर्ट, कथित जीडी में हेरफेर और उच्च अधिकारियों को थाना प्रभारी निरीक्षक द्वारा गुमराह करने तथा अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों को मीडिया के समक्ष रखा जाएगा।मामला अब पुलिस विभाग, अधिवक्ता समुदाय और आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। वहीं, मुकदमा दर्ज होने के बाद विभागीय और न्यायिक कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
