सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के सीसीटीवी से ढाई घंटे का फुटेज गायब, एक सीएचओ की भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज
अग्र भारत संवाददाता
आगरा। आगरा पुलिस कमिश्नरेट में कुछ मामलों की जांच की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। थाना अछनेरा क्षेत्र स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) अछनेरा के शौचालय में मिले लगभग सात माह के भ्रूण के मामले में 24 दिन बीत जाने के बाद भी न तो मुकदमा दर्ज किया गया है और न ही अस्पताल के कर्मचारियों से पूछताछ की गई है। इसे लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
आरोप है कि पुलिस ने मामले की गंभीरता को नजरअंदाज किया है। घटना के सीसीटीवी फुटेज का समय रहते तकनीकी परीक्षण नहीं कराया गया और जांच की प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ी। चर्चा यह भी है कि घटना वाले दिन के सीसीटीवी फुटेज में लगभग ढाई घंटे का हिस्सा गायब है, लेकिन इसकी भी तकनीकी जांच नहीं कराई गई।
मामला 20 जून की रात का है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अछनेरा के शौचालय में तैनात गार्ड को रात दस बजे करीब एक भ्रूण पड़ा दिखाई दिया।गार्ड की सूचना पर अस्पताल कर्मियों ने पुलिस को अवगत कराया। मौके पर पहुंची पुलिस ने भ्रूण को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भ्रूण की आयु लगभग सात माह तथा मृत पैदा होने की बात सामने आई।इसके बाद सबसे बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि भ्रूण अस्पताल के शौचालय तक कैसे पहुंचा और उसे वहां कौन छोड़कर गया। इस संबंध में थाना प्रभारी विजय चंदेल से पूछा गया कि क्या मामले में एफआईआर दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि अभी जांच चल रही है। जब यह पूछा गया कि अब तक अस्पताल के कितने कर्मचारियों से पूछताछ की गई है, तो उन्होंने बताया कि अभी किसी से पूछताछ नहीं हुई है।
वहीं, सीएचसी अछनेरा के अधीक्षक डॉ. नीरज शर्मा से पूछने पर बताया कि घटना के संबंध में स्थानीय थाने को प्रार्थना-पत्र दिया गया था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब अस्पताल अधीक्षक की ओर से सूचना और प्रार्थना-पत्र दिया जा चुका है, तो 24 दिन बाद भी न मुकदमा दर्ज हुआ और न ही किसी कर्मचारी जो संबंधित घटना वाले समय और उससे पूर्व अपने अपने कार्यों पर तैनात थे उनसे कोई पूछताछ नहीं हुई है।
क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि घटना के दिन एक सीएचओ, जिसकी जबकि कोई अस्पताल परिसर में रात्रि और दिन के समय ड्यूटी नहीं थी, दोपहर करीब दो बजे कुछ महिलाओं के साथ अस्पताल परिसर में देखा गया था। बताया जा रहा है कि वह देर रात तक अस्पताल परिसर के सीसीटीवी फुटेज में भी दिखाई देता है। इसके अलावा 19 जून को भी कथित रूप से वही सीएचओ उन्हीं महिलाओं के साथ अस्पताल परिसर में ओपीडी बंद होने के बाद 3:55 मिनट पर एक कमरे में जाता हुआ सीसीटीवी में दिखाई देने की चर्चा है।जबकि इन बिंदुओं पर यदि पुलिस सीसीटीवी फुटेज, डीवीआर और संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ सहित सभी पहलुओं की निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच करती है, तो घटना की वास्तविकता सामने आ सकती है।लेकिन सात माह के भ्रूण का प्रकरण खुलासे के बजाय मामले को दबाया जा रहा है ,जो कि पुलिस की जांच में स्पष्ट रूप से प्रतीत होता हुआ नजर आ रहा है,फिलहाल 24 दिन बाद भी जांच की धीमी रफ्तार पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है।
