दयालबाग में श्रद्धा और सेवा का महासंगम: परम गुरु हुजूर डॉ. एम.बी. लाल साहब का पावन भंडारा हर्षोल्लास के साथ संपन्न
आगरा। आगरा के आध्यात्मिक केंद्र दयालबाग में रविवार को ‘परम गुरु हुजूर डॉ. एम.बी. लाल साहब’ का पावन भंडारा अत्यंत श्रद्धा, उमंग, और अपूर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर आयोजित प्रातःकालीन आरती और अपराह्न (दोपहर बाद) के भंडारा कार्यक्रमों में दयालबाग के स्थानीय निवासियों सहित देश-विदेश की विभिन्न शाखाओं से आए हजारों सतसंगी भाई-बहनों और बच्चों ने बड़ी संख्या में सहभागिता की।
भक्ति और निस्वार्थ सेवा के इस अनूठे उत्सव में पूरा दयालबाग परिसर आध्यात्मिक तरंगों से सराबोर नजर आया।
भोर में 2 बजे से ही खेतों में उमड़ा आस्था का जनसैलाब
पावन भंडारा दिवस की शुरुआत हमेशा की तरह दयालबाग की अनूठी ‘कृषि सेवा’ परंपरा के साथ हुई। भोर में लगभग दो बजे, जब दुनिया सो रही थी, तब सतसंगी भाई-बहन और सुपरह्यूमन स्कीम के उत्साही बच्चे निर्धारित कृषि क्षेत्रों की ओर कूच कर गए।
धान नर्सरी, कुआं नंबर 4 और नहर के उत्तर में स्थित विशाल कृषि क्षेत्रों में धान की पौध उखाड़ने और रोपाई का कार्य बेहद जोश और उमंग के साथ शुरू हुआ। वहीं दूसरी ओर, बुजुर्ग भाईसाहबान और बहनों ने भंडारा ग्राउंड पर अपनी निर्धारित सेवाओं में सक्रिय योगदान दिया।
खेतों में सेवा कार्य के दौरान सभी सेवादारों को ऊर्जा से भरपूर एक कप गरम दूध (अमृत पेय), चाय, रस्क और अन्य पावन प्रसाद वितरित किया गया, जिसे ग्रहण कर सभी पुनः रोपाई के कार्य में जुट गए।
परम पूज्य हुजूर प्रो. प्रेम सरन सतसंगी साहब ने प्रदान किए पावन दर्शन
इस उत्सव का सबसे अलौकिक क्षण तब आया जब परम पूज्य हुजूर प्रो. प्रेम सरन सतसंगी साहब एवं परम आदरणीय रानी साहिबा जी ने स्वयं खेतों में कदम रखा। दोनों पूजनीय विभूतियों ने सर्वप्रथम परमपुरुष पूरन धनी स्वामीजी महाराज एवं परम गुरु हुजूर डॉ. एम.बी. लाल साहब के पावन स्वरूपों पर माथा टेककर आशीर्वाद लिया।
इसके बाद भंडारे के इस पावन अवसर पर चार विशेष पाठों का आयोजन हुआ। प्रारंभिक दो पाठों में परम आदरणीय रानी साहिबा जी ने भी सहभागिता की, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो उठा।
सुपरह्यूमन स्कीम के बच्चों ने बांधा समां
कृषि सेवा के साथ-साथ यहाँ शारीरिक और मानसिक विकास का अद्भुत संतुलन देखने को मिला। खेतों के बीच ही पी.टी. (PT), शारीरिक व्यायाम, सांस्कृतिक कार्यक्रम और आत्म-सुरक्षा (Self-Defense) का शानदार प्रदर्शन किया गया। ‘सुपरह्यूमन स्कीम’ के बच्चों ने अपनी भावपूर्ण और अनुशासित प्रस्तुतियों से वहां मौजूद सभी लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
सुबह के सत्र के समापन पर उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को आरती का पारंपरिक मुरमुरा और इलायचीदाना प्रसाद वितरित किया गया।
अपराह्न सत्र: खेतों में ही सजा भंडारा
दोपहर के बाद, उत्सव का दूसरा भाग शुरू हुआ। बड़ी संख्या में सतसंगी भाई-बहन और बच्चे एक बार फिर कृषि क्षेत्रों में पहुंचे और उत्साहपूर्वक धान की रोपाई के कार्य को आगे बढ़ाया। विशेष बात यह रही कि भंडारे का मुख्य आयोजन भी इसी कृषि क्षेत्र (खेतों) में हुआ।
सुबह के कार्यक्रमों की ही भांति दोपहर में भी बच्चों द्वारा पी.टी., सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और आत्म-सुरक्षा के करतब दिखाए गए, जिसने उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया। कार्यक्रम के अंत में सभी को एक नमकीन और एक मीठा विशेष प्रसाद दिया गया।
‘विशेष दया की डेयरी’ का भ्रमण
दोनों सत्रों के सफल समापन के बाद, परम पूज्य हुजूर प्रो. प्रेम सरन सतसंगी साहब ने ई.वी. (Eco-friendly Vehicle) के माध्यम से पावन कोठी की ओर प्रस्थान करने की मौज फरमाई। मार्ग में दोनों ओर कतारबद्ध खड़े सतसंगी भाई-बहनों और बच्चों को हुजूर ने अपने दिव्य दर्शनों से निहाल किया। पावन कोठी जाने से पहले, अपने नियमित क्रम के अनुसार उन्होंने ‘विशेष दया की डेयरी’ का संक्षिप्त भ्रमण किया और वहाँ पलने वाली पालतू गायों एवं भैंसों को दुलारा।
ई-सत्संग के जरिए दुनिया भर की 580 शाखाएं सीधे जुड़ीं
दयालबाग का यह पावन भंडारा केवल आगरा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से वैश्विक बन गया। इंटरनेट और टेक्नोलॉजी का बेहतरीन उपयोग करते हुए पूरे कार्यक्रम का सजीव प्रसारण (Live Streaming) ई-सतसंग (E-Satsang) के माध्यम से किया गया। देश और विदेश में स्थित दयालबाग की लगभग 580 शाखाओं में बैठे लाखों श्रद्धालुओं ने घर बैठे इस पावन भंडारे का आनंद लिया और दर्शन लाभ प्राप्त किया।
