सुरक्षा मानकों और व्यवस्थाओं की जांच को नहीं पहुंचे संबंधित अधिकारी, आठ वर्षीय बच्चे की मौत के बाद प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
पीड़ित परिवार ने वाटर पार्क प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए पुलिस को तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की
अग्र भारत संवाददाता
आगरा। किरावली क्षेत्र स्थित तेवतिया वाटर पार्क में आठ वर्षीय बालक की रविवार शाम डूबने से हुई मौत के 24 घंटे बाद भी सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की जांच के लिए कोई जिम्मेदार विभागीय अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। घटना के बाद मामला केवल पुलिस जांच तक सीमित रहने से प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए वाटर पार्कों की नियमित तकनीकी और सुरक्षा जांच आवश्यक है।
मृतक के पिता रोते-बिलखते हुए आरोप लगा रहे थे कि वाटर पार्क के पूल का पानी गंदा था, जिसके कारण बच्चा दिखाई नहीं दिया। उनका कहना था कि यदि मौके पर लाइफगार्ड मौजूद होते तो बच्चे की जान बच सकती थी। सोमवार को भी वाटर पार्क में अव्यवस्थाएं नजर आईं। स्लाइड से युवक खिसककर नीचे आ रहे थे, लेकिन ऊपर किसी सुरक्षा गार्ड की तैनाती नहीं थी। ऐसे में फिसलने के दौरान एक-दूसरे से टकराकर हादसा होने की आशंका बनी रही।रविवार शाम सकतपुर और पाली सदर के बीच स्थित वाटर पार्क में थाना शाहगंज क्षेत्र निवासी दंपती के साथ घूमने आए आठ वर्षीय मनित पुत्र रॉबिन की पूल में डूबने से मौत हो गई थी। परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है।बताया जा रहा है कि शाम करीब छह बजे हुई घटना की जानकारी किरावली पुलिस को देर रात तक नहीं थी। मीडिया में मामला आने के बाद पुलिस हरकत में आई और रात में पंचनामा भरकर वैधानिक कार्रवाई शुरू की गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर सीसीटीवी फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है तथा डीवीआर कब्जे में लेकर जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि घटना के समय पूल के पास लाइफगार्ड अथवा सुरक्षा कर्मी मौजूद थे या नहीं।
हालांकि स्थानीय लोगों और परिजनों का कहना है कि केवल पुलिस जांच से सुरक्षा मानकों की वास्तविक स्थिति सामने नहीं आ सकेगी। उनका कहना है कि संबंधित प्रशासनिक विभागों, तहसील स्तर के अधिकारियों तथा तकनीकी जांच से जुड़े विभागों को मौके पर पहुंचकर यह जांच करनी चाहिए थी कि वाटर पार्क निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप संचालित हो रहा था या नहीं।लोगों का आरोप है कि वाटर पार्क में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे और यदि मौके पर प्रशिक्षित लाइफगार्ड मौजूद होता तो संभवतः बच्चे की जान बचाई जा सकती थी। क्षेत्र में संचालित कई वाटर पार्कों की नियमित जांच न होने के आरोप भी सामने आ रहे हैं। लोगों का कहना है कि वर्षों से इन प्रतिष्ठानों की प्रभावी निगरानी नहीं होने के कारण सुरक्षा मानकों की अनदेखी लगातार बढ़ रही है।जानकारी के अनुसार, तेवतिया वाटर पार्क करीब छह वर्ष पहले शुरू हुआ था और समय के साथ इसका विस्तार किया गया। लेकिन लाइफगार्ड की तैनाती, पानी की गहराई संबंधी संकेतक, सीसीटीवी निगरानी, आपातकालीन व्यवस्था और संचालन संबंधी मानकों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। दो सप्ताह पूर्व पार्क के लॉकर से नकदी और मोबाइल चोरी की घटना भी सामने आई थी।आरोप है कि प्रशासन द्वारा वाटर पार्कों के लाइसेंस, पंजीकरण और सुरक्षा मानकों की जांच के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनका प्रभाव दिखाई नहीं देता। क्षेत्र में संचालित कई वाटर पार्कों की नियमित जांच और निरीक्षण न होना भी अब सवालों के घेरे में है।
“एसडीएम किरावली दिव्या सिंह को फोन किया तो उनका फोन नहीं उठा, व्हाट्सएप के माध्यम से जानकारी लेने पर बताया कि वह वर्तमान में आईजीआरएस बैठक में हैं। बैठक के बाद ही विस्तृत जानकारी दे पाएंगी।
“एसीपी अछनेरा शैलेन्द्र सिंह ने बताया कि सूचना मिलते ही मृतक बच्चे के शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पीड़ित परिवार की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर नियमानुसार अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।

पंद्रह मिनट तक खोजते रहे बच्चे को, किसी ने नहीं सुनी पुकार :मृतक के पिता रॉबिन निवासी अजीत नगर गेट, थाना शाहगंज ने बताया कि छोटे बच्चे को टॉयलेट लगने पर वह उसे लेकर चले गए थे। बड़े बेटे मनित को कम गहराई वाले पानी में नहाने के लिए छोड़ दिया था। वापस लौटने पर मनित वहां दिखाई नहीं दिया। इसके बाद उन्होंने वाटर पार्क स्टाफ से मदद मांगी, लेकिन तत्काल कोई प्रभावी सहायता नहीं मिली। काफी देर बाद बच्चे को पानी से बाहर निकाला गया।परिजनों का आरोप है कि जिस पूल से बच्चे को बाहर निकाला गया, उसका पानी बेहद गंदा था, जिसके कारण बच्चा दिखाई नहीं दिया। पिता ने कहा कि यदि उन्हें पहले से व्यवस्थाओं की जानकारी होती तो वे कभी वहां नहीं आते। उन्होंने बताया कि परिवार शाम लगभग 5:30 बजे वाटर पार्क में पहुंचा था और करीब 6:30 बजे हादसा हो गया। उनका कहना है कि यदि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम होते और पानी साफ होता तो बेटे की जान बच सकती थी।
सेटिंग का चलता है खेल : संबंधित अधिकारी नियमों और फिर जांच ,फिर नोटिस ,सब सेटिंग का खेल खेलते हैं,वाटर पार्क का खेल में पंजीकरण होना अनिवार्य ही केवल काफी नहीं ,कागजों में व्यवस्था दुरस्त दिखाई जाती है,भौतिक निरीक्षण में खाना पूर्ति की जाती है,अधिकारी निरीक्षण की सूचना पहले ही संचालकों तक पहुंचाई जाती है,संचालक निरीक्षण वाले दिन व्यवस्था चौक चौबंद कर लेते हैं,तहसील स्तर के अधिकारियों का इन पर कोई ध्यान नहीं रहता है,इस लिए मनमाने तरीके से संचालक अपने मंसूबों को अंजाम देकर अपना उल्लू साधकर दूसरों की जान से खेल खेलते हैं।
