आगरा के एत्माद्दौला थाना क्षेत्र में सरकारी जमीन पर अवैध रूप से मकान बनाने वाले पुलिसकर्मियों भारतीय सिंह, महेश चंद्र यादव और प्रमोद गौतम पर पीपी एक्ट के तहत शिकंजा। प्रशासन ने मांगी 3 दिन में रिपोर्ट।
आगरा | डिजिटल डेस्क: उत्तर प्रदेश के आगरा जिले से एक बेहद गंभीर और प्रशासनिक अमले को कटघरे में खड़ा करने वाला मामला सामने आया है। एत्माद्दौला थाना क्षेत्र में करोड़ों रुपये मूल्य की 0.965 हेक्टेयर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर विवाद गहरा गया है।
चौंकाने वाली बात यह है कि खाकी की आड़ में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर निजी मकान बनाने के आरोप खुद पुलिसकर्मियों पर लगे हैं। अब इस मामले में एडीएम प्रोटोकॉल के सख्त रुख के बाद तहसील प्रशासन ने आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ लोक परिसर (अप्राधिकृत अधिभोगियों की बेदखली) अधिनियम यानी पीपी एक्ट (PP Act) के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
0.965 हेक्टेयर नजूल जमीन पर बना लिए निजी मकान
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पूरा मामला मौजा चक हफतम के खसरा संख्या 392 का है। यहाँ स्थित 0.965 हेक्टेयर सरकारी जमीन पर भू-माफियाओं और बेखौफ तत्वों के साथ-साथ पुलिसकर्मियों ने भी अवैध रूप से कब्जा कर लिया है।
जांच और प्राथमिक पड़ताल में जिन पुलिसकर्मियों के नाम मुख्य रूप से सामने आए हैं, उनमें शामिल हैं:
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भारतीय सिंह (पुलिसकर्मी)
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महेश चंद्र यादव (पुलिसकर्मी)
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प्रमोद गौतम (पुलिसकर्मी)
आरोप है कि इन पुलिसकर्मियों ने अपने पद और प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए सरकारी व नजूल की जमीन पर पक्के निजी मकान बनवा लिए हैं।
राजस्व टीम को नहीं मिला था पुलिस का सहयोग, अटकी थी कार्रवाई
सूत्रों के मुताबिक, इस बहुचर्चित अवैध कब्जे को हटाने और पैमाइश करने के लिए जब राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुँची थी, तो उन्हें स्थानीय पुलिस का अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।
क्षेत्रीय लेखपाल और नजूल मुहर्रिर ने जब इस संबंध में थाने स्तर पर लिखित तहरीर देकर एफआईआर और कानूनी कार्रवाई की मांग की, तो थाने स्तर पर मामले को दबाने और टालमटोल करने की कोशिश की गई। थाने से ठोस कार्रवाई न होने के बाद मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में पहुँचा।
ADM प्रोटोकॉल का कड़ा आदेश: 3 दिन के भीतर मांगी कार्रवाई रिपोर्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए एडीएम प्रोटोकॉल अमरेंद्र कुमार वर्मा ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने तहसीलदार सदर को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ अविलंब पीपी एक्ट के तहत बेदखली और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया पूरी की जाए।
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सदर तहसील प्रशासन से इस पूरे मामले में की गई कार्रवाई की बिंदुवार रिपोर्ट तीन दिनों के भीतर मांगी गई है।
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इसके साथ ही, डीसीपी सिटी (DCP City) रविंद्र कुमार को भी पत्र भेजकर आरोपी पुलिसकर्मियों पर विधिक व अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।
सरकारी जमीन पर रक्षक ही जब भक्षक की भूमिका में सामने आए हैं, तो इस कार्रवाई से जिला प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। देखना होगा कि 3 दिनों की समयसीमा में प्रशासन इस अवैध निर्माण पर क्या बुलडोजर चलाता है या क्या दंडात्मक कदम उठाता है।
