घंटों लगता है जाम, तथाकथित ठेकेदारों का बोलबाला, प्रशासन की अनदेखी…
आगरा। यातायात व्यवस्था को सुधारने को लेकर उच्चाधिकारियों के कड़े निर्देशों को उनके अपने ही विभाग के कर्मी अनसुनी कर रहे है ओर भुगतना पड़ता है आम नागरिकों को। हम बात कर रहे है शहर के प्रमुख चौराहे रामबाग और वाटर बॉक्स पर इन दिनों अवैध रूप से खड़े वाहनों का कब्ज़ा और मनमानी चरम पर है। सुबह हो या फिर शाम के व्यस्त समय में हालात इतने बिगड़ जाते हैं कि जाम लगना तो जैसे आम बात हो गई है। सड़क किनारे खड़ी टैक्सियाँ, ऑटो और निजी वाहन न सिर्फ आवागमन में बाधा डाल रहे हैं बल्कि दुर्घटना की आशंका भी बढ़ा रहे हैं। इस संबंध में स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद स्थिति में खास सुधार नहीं हुआ है। दोनों चौराहे शहर के सबसे व्यस्त यातायात मार्गों में शामिल हैं, इसलिए वाहनों का अनियंत्रित खड़ा होना पूरे मार्ग के ट्रैफिक फ्लो को प्रभावित करता है ओर घंटों जाम को समस्या से जूझते है। क्षेत्रवासियो ने मांग की है कि इन चौराहों पर नियमित चेकिंग, बैरिकेडिंग और निर्धारित पार्किंग व्यवस्था सुनिश्चित कर ट्रैफिक जाम की समस्या से राहत दिलाई जाए।
- घंटों लगता है जाम, तथाकथित ठेकेदारों का बोलबाला, प्रशासन की अनदेखी…
- चौकी से कुछ कदम की दूरी पर ही है कब्ज़ा, व्यवस्था पर उठते सवाल
- परिवहन विभाग को हर दिन हो रहा राजस्व नुकसान, फिर भी मोन
- क्षेत्रीय पुलिस की आंखों के सामने वसूली का खेल जोरो पर
- प्रति चक्कर के हिसाब से चल रहा वसूली का खेल
- सूत्रों का दावा: ठेकेदार पुलिस तक पहुंचाते हैं हिस्सा
- बीच रोड पर ठेकेदारों की दबंगई जारी, तथाकथितो पर क्यों कोई कार्यवाही नहीं.?
चौकी से कुछ कदम की दूरी पर ही है कब्ज़ा, व्यवस्था पर उठते सवाल

रामबाग हो या वाटर बॉक्स चौराहे दोनों ही जगहों पर हालात एक जैसे हैं। कानून–व्यवस्था की निगरानी के लिए पास ही पुलिस चौकी मौजूद है, लेकिन कब्ज़ाधारियों और अवैध रूप से खड़े वाहनों पर किसी तरह का असर नहीं दिखता। चौकी से चांद कदमी की दूरी पर फुटपाथ और सड़क पर खड़े वाहन न सिर्फ आमजन की आवाजाही रोक रहे हैं, बल्कि आए दिन जाम की गंभीर स्थिति भी पैदा कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि चौकी के इतने पास अतिक्रमण होना अपने आप में प्रशासनिक संवेदनहीनता को दर्शाता है। शिकायतें कई बार की गईं, लेकिन कार्रवाई का असर ज़मीन पर दिखता नहीं। यही वजह है कि कब्ज़ाधारी निडर होकर अपनी गतिविधियाँ जारी रख रहे हैं।
परिवहन विभाग को हर दिन हो रहा राजस्व नुकसान, फिर भी मोन

उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग इस समय गंभीर राजस्व घाटे से गुजर रहा है। प्रदेश में बड़ी संख्या में वाहन बिना परमिट और टैक्स के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। फिटनेस से बचने वाली व्यावसायिक गाड़ियाँ, ओवरलोडिंग और अवैध बस संचालन भी सरकारी खजाने को सीधा नुकसान पहुँचा रहे हैं। विभागीय प्रवर्तन की कमी और सीमित कर्मियों के कारण कई वाहन जांच के दायरे से बाहर रह जाते हैं, जिससे टैक्स चोरी को बढ़ावा मिलता है। राजस्व घटने का असर सीधे बस सेवाओं की गुणवत्ता, रखरखाव और यात्री सुविधाओं पर पड़ रहा है। समय रहते सख्त कार्रवाई, डिजिटल निगरानी और नियमित जांच की व्यवस्था नहीं की गई तो राजस्व का यह नुकसान सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को और कमजोर कर देगा।
क्षेत्रीय पुलिस की आंखों के सामने वसूली का खेल जोरो पर

शहर में ठेकेदारों के गुर्गों की दबंगई खुलकर सामने आ रही है। सड़क, बाजार और रामबाग-वॉटर बॉक्स चौराहे कहीं भी ये गुर्गे डंडे के दम पर खुलेआम वसूली कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि यह सब पुलिस की नाक के नीचे होता है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खामोशी दिखाई देती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शिकायत करने पर भी कोई सुनवाई नहीं होती, जिससे गुर्गों के हौसले और बढ़ गए हैं। सवाल यह है कि जब कानून के रखवाले ही मौन हैं, तो आम जनता किससे उम्मीद करे?
प्रति चक्कर के हिसाब से चल रहा वसूली का खेल

शहर में परिवहन व्यवस्था पर ठेका प्रणाली सवालों के घेरे में है। आरोप है कि कई जगहों पर ठेकेदारों के गुर्गे प्रति चक्कर के हिसाब से वाहनों से वसूली कर रहे हैं। टेंपो से लेकर छोटी वैन तक—हर वाहन को तय रकम देनी पड़ती है। हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ खुलेआम होता है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति नजर आती है। स्थानीय चालक बताते हैं कि ठेका लेने के बाद गुर्गों का दबदबा बढ़ जाता है, और विरोध करने पर मारपीट की नौबत तक आ जाती है। सवाल यह है कि जब यह खेल सबको दिखता है, तो फिर रोकता कौन है? प्रशासन की चुप्पी वसूली तंत्र को और मजबूत कर रही है।
सूत्रों का दावा: ठेकेदार पुलिस तक पहुंचाते हैं हिस्सा
स्थानीय सूत्रों की मानें तो वसूली में सक्रिय ठेकेदार तय रकम का हिस्सा पुलिस तक पहुंचाते हैं। यह खेप प्रति चक्कर तय हिसाब से चलती है। आरोप है कि लंबे समय से यह अवैध लेनदेन खुलेआम जारी है, लेकिन कार्रवाई न होने से वसूली करने वालों के हौसले बुलंद हैं।
बीच रोड पर ठेकेदारों की दबंगई जारी, तथाकथितो पर क्यों कोई कार्यवाही नहीं.?

ठेकेदारों पर वसूली के कई मुकदमे दर्ज होने के बावजूद उनकी दबंगई कम नहीं हो रही है। गुर्गे खुलेआम डंडे के दम पर वसूली कर रहे हैं और व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं। पुलिस की मौजूदगी में भी यह अवैध वसूली बेखौफ जारी है, जिससे राहगीर और वाहन चालक परेशान हैं। स्थानीय लोगों ने सख्त कार्रवाई की मांग की है।
