आगरा। आर्थिक तंगी और कर्ज के दबाव ने दो कारोबारियों को ऐसा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया कि उन्होंने पुलिस को ही गुमराह करने की कोशिश की। एक ने अपनी 10 वर्षीय बेटी के अपहरण और 40 लाख रुपये की फिरौती की साजिश रची, जबकि दूसरे ने 40 लाख रुपये की लूट की झूठी कहानी गढ़ दी। हालांकि पुलिस की सतर्कता, सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी जांच के सामने दोनों की चाल ज्यादा देर नहीं चल सकी।

जगदीशपुरा क्षेत्र में पूजा सामग्री कारोबारी ने कर्जदारों के दबाव से बचने और लोगों की सहानुभूति पाने के लिए अपनी बेटी को दोस्त के घर भेज दिया। इसके बाद 40 लाख रुपये की फिरौती का पत्र भेजकर अपहरण का नाटक रचा गया। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई तो पिता के बयान में विरोधाभास मिला। सख्ती से पूछताछ में उसने पूरी साजिश कबूल कर ली। पुलिस ने कारोबारी और उसके दोस्त को गिरफ्तार कर कानूनी कार्रवाई की है।
उधर, खंदौली क्षेत्र में सर्राफ कारोबारी ने पुलिस को सूचना दी कि बाइक सवार बदमाश दिनदहाड़े 40 लाख रुपये लूटकर फरार हो गए। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस, एसओजी और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंच गई। करीब 20 टीमों ने आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, लेकिन कहीं भी लूट की पुष्टि नहीं हुई। पूछताछ में कारोबारी बार-बार बयान बदलता रहा। अंततः उसने स्वीकार किया कि लाखों रुपये के कर्ज और देनदारों के दबाव से बचने के लिए उसने लूट की झूठी कहानी बनाई थी।दोनों मामलों में पुलिस ने कुछ ही घंटों में सनसनीखेज घटनाओं का पर्दाफाश कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि झूठी सूचना देकर पुलिस का समय और संसाधन बर्बाद करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इन घटनाओं ने यह भी दिखा दिया कि आधुनिक तकनीक, सीसीटीवी नेटवर्क और वैज्ञानिक जांच के सामने झूठी साजिशों का टिक पाना अब बेहद मुश्किल है।
