बीएसए आगरा के खिलाफ किसान नेता ने खोला मोर्चा
मुख्यमंत्री को भेजी जाएगी बीएसए के खिलाफ शिकायत
आगरा। किसान नेता श्याम सिंह चाहर ने कहा है कि बेसिक शिक्षा विभाग आगरा में समायोजन से लेकर निलंबन, बहाली और किताब वितरण में धांधली पर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है। बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों का हाल ही में काला चिट्ठा उजागर हुआ है। विभिन्न गंभीर प्रकरणों को लेकर उन्होंने बीएसए आगरा की भूमिका पर सवालिया निशान उठाते हुए उनके खिलाफ कड़ी जांच और कार्रवाई की मांग की है।
किसान नेता श्याम सिंह चाहर ने आरोप लगाया कि बेसिक शिक्षा विभाग केंद्र एवं प्रदेश सरकार के संयुक्त सहयोग से बच्चों को बुनियादी शिक्षा मुहैया कराता है। बच्चे पढ़ाई के साथ ही अन्य गतिविधियों में पारंगत बनें, इसके लिए दोनों ही सरकारें भारी-भरकम धनराशि आवंटित करती हैं। आगरा में सरकार के इन प्रयासों पर विभागीय अधिकारी ही पलीता लगाने में तुले हैं। हाल ही में समायोजन के नाम पर जो हुआ, उसने विभाग की व्यवस्था को तार-तार कर दिया है। जैतपुर, बाह, पिनाहट के विद्यालय लगभग शिक्षकविहीन हो गए हैं। समायोजन की आड़ में कथित रूप से अपनी सेटिंग के बलबूते ट्रांसफर का लाभ प्रदान किया गया। ठीक ऐसा ही पिछले दो-तीन महीनों में निलंबन और बहाली के खेल में हुआ है। साठगांठ और धनराशि के बल पर शिक्षकों को पहले निलंबित किया गया, फिर मनचाही तैनाती दी गई। जो शिक्षक नॉन-एचआरए विद्यालय में तैनात था, उसे एचआरए विद्यालय मिल गया। यह प्रक्रिया आगरा से लखनऊ तक पूरी प्लानिंग के साथ की गई।बीएसए पर भ्रष्टाचार के खुलकर आरोप लगाते हुए कहा गया कि जिस दिन से जितेंद्र कुमार गोंड ने आगरा में कार्यभार संभाला, उस दिन से ही विभाग का बेड़ा गर्क हो गया। अपने निजी लाभ की खातिर मलाईदार पटलों पर चहेते बाबुओं को तैनात किया गया। उन बाबुओं ने जब तक कमाकर दिया, तब तक वे बीएसए के खासमखास बने रहे। इसके बाद उन्हीं बाबुओं को दूध में से मक्खी की तरह निकालकर फेंक दिया गया।
किताबों के ट्रांसपोर्ट की धनराशि को मिलकर डकार गए विभागीय अधिकारी
किसान नेता ने बीएसए की भूमिका पर आरोप लगाते हुए कहा कि अप्रैल से शुरू होने वाले सत्र के बाद भी जुलाई तक किताबें स्कूल में नहीं पहुंची तो इसकी जिम्मेदारी किसकी थी? शासन से किताबों के परिवहन हेतु मोटी धनराशि मिलती है। यह धनराशि कहां गई, इसकी एडीएम स्तर से कड़ी जांच होनी चाहिए। सैंया में छुट्टी के दिन भी किताबों को वितरण के लिए अवैध रूप से डंप करने का मामला प्रकाश में आया तो अपनी गर्दन बचाने के लिए बीईओ को निलंबित करवा दिया गया, जबकि असली काला कारनामा बीएसए का था।
शिक्षक और छात्र हित में शीघ्र निर्णायक कदम उठाएंगे
किसान नेता श्याम सिंह चाहर ने बीएसए सहित मुख्यालय पर अनियमितताओं को अंजाम दे रहे बाबुओं के खिलाफ निर्णायक कदम उठाने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि मुख्यालय पर ऐसे बाबू अवैध रूप से तैनात हैं, जिन पर गंभीर आरोप लग चुके हैं। इसके बावजूद आज तक उन पर कार्रवाई नहीं हुई है। पूरे बेसिक शिक्षा विभाग को सर्जरी की जरूरत है। भ्रष्टाचार के खेल को बीएसए खुलकर संरक्षण दे रहे हैं। इस पूरे गंभीर प्रकरण की समुचित जांच एवं कार्रवाई हेतु मुख्यमंत्री को शिकायत दी जाएगी।
