आगरा। ताज प्रेस क्लब के सचिव पीयूष शर्मा ने खुद को षड्यंत्रपूर्वक झूठे मुकदमे में फंसाए जाने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री को प्रार्थना पत्र भेजकर पुलिस और आरोपियों की मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए हैं।
प्रार्थी के अनुसार, वह पिछले लगभग 20 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उनका राहुल मुद्गल नामक एक युवक से पैसों का लेन-देन था, जो जिम संचालक बताया गया है। इस लेन-देन से जुड़ी बातचीत व्हाट्सएप चैट के माध्यम से होती थी, जिसमें किसी भी प्रकार की सट्टेबाजी या आईपीएल से संबंधित अवैध गतिविधि का कोई उल्लेख नहीं था।आरोप है कि 3 मई 2026 को राहुल मुद्गल को होटल हावर्ड प्लाजा से आईपीएल सट्टेबाजी के आरोप में पकड़ा गया। इसके बाद पुलिस ने केवल उसके कथित बयान और पैसों के लेन-देन की चैट के आधार पर पीयूष शर्मा को भी आरोपी बना दिया। प्रार्थी का कहना है कि बिना ठोस साक्ष्य के उन्हें अन्य आरोपियों के साथ जेल भेज दिया गया।पीयूष शर्मा ने अपने प्रार्थना पत्र में यह भी आरोप लगाया है कि पुलिस ने जिस वाहन (यू पी 80 एफ बाई 4047) को पहले केस प्रॉपर्टी के रूप में दर्शाया, बाद में उसी वाहन को लावारिस दिखाकर रिलीज कर दिया गया। इसे उन्होंने पुलिस और मुख्य आरोपी के बीच मिलीभगत का प्रमाण बताया है।प्रार्थी ने एसीपी मयंक तिवारी, चौकी इंचार्ज अमित धाम समेत कुछ अन्य लोगों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। साथ ही एक अन्य व्यक्ति के संदिग्ध गतिविधियों में शामिल होने का भी उल्लेख किया है।उन्होंने मुख्यमंत्री से निष्पक्ष एजेंसी या उच्च स्तरीय अधिकारी से पूरे मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
