तेज धूप और बारिश, हंस के सह जाने को… मैं बनी एक दूजी माटी हूँ, मैं खाकी हूँ…
जैथरा में हुए अग्निकांड में पीड़ितों के लिए देवदूत बनी खाकी
अग्निकांड में गंभीर रूप से घायल हुई महिला की जान पर खेल कर बचाई जान
एसडीएम अलीगंज पल-पल लेते रहे घटना की जानकारी
दमकल की देरी में नगर पंचायत के संसाधन बने सहारा
एटा : तैयार हूँ मैं हमेशा ही, तेज धूप और बारिश, हंस के सह जाने को, सारे त्यौहार सड़कों पे, ‘भीड़’ के साथ ‘मनाने’ को, पत्थर और गोली भी खाने को, मैं बनी एक दूजी माटी हूँ, मैं खाकी हूँ…आईपीएस अधिकारी सुकीर्ति मिश्रा द्वारा रचित कविता की उक्त पंक्तियां जैथरा कस्बा में हुए अग्निकांड में खाकी के साहस, बहादुरी, संवेदशीलता और धैर्यशीलता के साथ ही कर्तव्यनिष्ठा पर सटीक बैठ रहीं हैं। ज्येष्ठ माह की तपती दोपहरी में आसमान से आग बरस रही थी। आग की चपेट में आए तीन मंजिला भवन से निकल रही आग की भयावह लपटें तन को जला रहीं थीं, परन्तु खाकी अपने कर्तव्य पर अडिग थी। पूरा बदन पसीना बहा रहा था, परन्तु खाकी को चिंता थी तो सिर्फ भवन में फंसे परिवार को सुरक्षित निकालने की। थानाध्यक्ष की सूझबूझ, धैर्य के साथ लिया गया निर्णय भवन में फंसे परिवार को बाहर निकलने में कामयाब रहा। हालांकि आग की चपेट में आने से गंभीर रूप से घायल हुई महिला को उपचार हेतु तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। यदि समय रहते खाकी ने गंभीरता न दिखाई होती, तो कोई भी बड़ी घटना हो सकती थी। खाकी के अद्भुत साहस, सूझबूझ एवं धैर्यशीलता की नगर एवं आसपास क्षेत्रों में खूब सराहना हो रही है।
कस्बा जैथरा के मुख्य बाजार निवासी मोहन गुप्ता के तीन मंजिला आवासीय भवन है। आवासीय भवन में ही मोहन गुप्ता की कॉस्मेटिक की दुकान भी है। दूसरी मंजिल पर वह परिवार सहित रहते हैं। शुक्रवार को पूर्वाह्न करीब 11 बजे अज्ञात कारणों से इसमें आग लग गई। जब तक स्थानीय लोग कुछ समझ पाते, तब तक आग ने पूरे भवन को अपने आगोश में ले लिया। काले धुएं का उठता गुबार, दीवारों से बाहर निकलती आग की भयंकर लपटों ने सबको दहशत में ला दिया। आग की भयावहता देख पूरे बाजार में भगदड़ मच गई। हर कोई मोहन के परिवार के जीवन को लेकर चिंतित हो गया। आग लगने की सूचना जैथरा थानाध्यक्ष रितेश ठाकुर को दी गई। थानाध्यक्ष पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गए। उधर आग की लपटें बढ़ रहीं थीं, तो इधर लोगों की चिंताएं भी बढ़ रहीं थी। जब थानाध्यक्ष को आवासीय परिसर में गृहस्वामी मोहन सहित उसके परिवार के फंसे होने की जानकारी मिली, तो उनके होश उड़ गए।
चूंकि आवास तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं था। दुकान भी आग की भयंकर लपटों से घिरी हुई थी। हालात भयावह थे। ऐसी स्थिति को देख थानाध्यक्ष ने बहुत ही सूझबूझ और धैर्यशीलता से निर्णय लिया। देवदूत बनकर पहुंचे खाकी के जांबाजों ने जान पर खेलकर परिजनों को सुरक्षित निकालने की रणनीति बनाई। थानाध्यक्ष ने बीट सिपाही गौरव चौधरी व स्थानीय लोगों के सहयोग से पड़ोस में बने तीन मंजिला मकान की छत से मोटी रस्सी के सहारे जांबाज सिपाही रॉबिन शर्मा को आग से घिरे भवन के समीप पहुंचाया। मोटी रस्सी के सहारे उतरने पर लोगों ने सिपाही के साहस की सराहना की।
थानाध्यक्ष के निर्देशानुसार सिपाही ने गृहस्वामी व उनके बेटे को सुरक्षित निकाला। उसके बाद आग से झुलसकर गंभीर रूप से घायल हुईं गृहस्वामी की पत्नी रीता गुप्ता को पड़ोस की छत पर सुरक्षित बैठाया। वह बदहवास थीं। आसमान से बरसती आग एवं घर में लगी आग उनको दर्द दे रही थी। उनकी आंखों के सामने उनके सपनों का घर जल रहा था, लेकिन जुबां से चीख तक नहीं निकल पा रही थी। गृह स्वामिनी की ऐसी स्थिति देख हर कोई भावुक हो गया। यहाँ खाकी का चेहरा करुणा से भरा नजर आया। थानाध्यक्ष रितेश ठाकुर, जांबाज सिपाही रॉबिन और गौरव गृह स्वामिनी को ढांढस बंधा रहे थे और कर्तव्य पथ पर भी अडिग थे। माथे से टपकता पसीना भी खाकी को उनके कर्तव्य से डिगा नहीं सका। दोनों जांबाज सिपाहियों ने नगर पंचायत की लिफ्टिंग मशीन के सहारे घायल महिला को नीचे उतारकर पुलिस की जीप से तत्काल स्थानीय अस्पताल पहुंचाया। खाकी के इन जांबाजों ने अपनी कर्तव्यपरायणता की बेहतरीन मिसाल पेश की। इस रेस्क्यू में थानाध्यक्ष रितेश ठाकुर भी झुलस गए।*
थानाध्यक्ष एवं उनके जांबाज पुलिस जवानों की नगर व क्षेत्र में खूब सराहना हो रही है। इस बीच स्थानीय लोगों में दमकल गाड़ी की लेटलतीफी को लेकर नाराजगी देखी गई। गाड़ी घटना के करीब एक घण्टा बाद पहुंची थी। करीब दो घण्टे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। आग से लाखों का सामान जलकर राख हो गया है। राजस्व विभाग की तरफ से अग्निकांड से हुई क्षति का आंकलन किया जा रहा है।
- तेज धूप और बारिश, हंस के सह जाने को… मैं बनी एक दूजी माटी हूँ, मैं खाकी हूँ…
- जैथरा में हुए अग्निकांड में पीड़ितों के लिए देवदूत बनी खाकी
- अग्निकांड में गंभीर रूप से घायल हुई महिला की जान पर खेल कर बचाई जान
- एसडीएम अलीगंज पल-पल लेते रहे घटना की जानकारी
- दमकल की देरी में नगर पंचायत के संसाधन बने सहारा
- संकट की घड़ी में सामाजिक एकता का दिया संदेश
- एसडीएम पल-पल लेते रहे घटना की जानकारी
- दमकल की देरी में नगर पंचायत के संसाधन बने सहारा
संकट की घड़ी में सामाजिक एकता का दिया संदेश
*एटा:* कस्बा में हुए अग्निकांड में नगर के युवाओं ने भी साहस, बहादुरी के साथ-साथ मानवता और सामाजिक एकता का संदेश दिया। इस कठिन और खतरनाक समय में दूसरों की रक्षा के लिए अपनी जान की बाजी लगाकर राहत एवं बचाव कार्य में सहयोग किया। हर कोई युवा अपनी जिम्मेदारी निभा रहा था। कोई नगर पंचायत के वाटर कूलर के माध्यम से पाइपलाइन जोड़कर आग बुझाने में सहयोग कर रहा था, तो कोई अन्य मकानों की छत पर चढ़कर पानी की बौछार कर रहा था। कोई जनरेटर चलाकर सबमर्सिबल से पानी खींच रहा था।युवाओं ने सामाजिक एकता का संदेश देकर यह सिद्ध कर दिया है कि हर ऐसे किसी भी संकट में नगर का युवा कंधा से कंधा मिलाकर खड़ा है। युवाओं की समाज के प्रति सच्ची जिम्मेदारी और संवेदनशीलता की भी हर जगह सराहना हो रही है।
एसडीएम पल-पल लेते रहे घटना की जानकारी
एटा: अग्निकांड में प्रशासनिक अधिकारियों की भी संजीदगी सामने आई है। एसडीएम अलीगंज जगमोहन गुप्ता को जैसे ही कस्बा में आग लगने की जानकारी मिली, तो वह अपने स्तर से राहत एवं बचाव कार्य की पल-पल जानकारी जुटाते रहे। एसडीएम ने पीड़ित की हर संभव मदद का आश्वासन भी दिया है।
दमकल की देरी में नगर पंचायत के संसाधन बने सहारा
एटा: तीन मंजिला मकान में लगी भीषण आग को बुझाने में स्थानीय संसाधन नाकाफी साबित हो रहे थे। दमकल की गाड़ी पहुंचने में भी देरी हो रही थी। पानी की आपूर्ति भी कम थी। ऐसे में आग बुझाने के लिए नगर पंचायत के संसाधानों का सहारा लिया गया। भीषण आग की चपेट में आए मकान के सामने लगे वाटर कूलर के पाइप को आनन-फानन में तोड़ दिया गया और जनरेटर के सहारे पानी के छिड़काव की वैकल्पिक व्यवस्था की गई। आग बुझाने के लिए पानी की कोई कमी न हो, इसके नगर पंचायत प्रशासन ने पानी से भरे टैंकरों को घटना स्थल पर ही खड़ा करा दिया। इसके अलावा महिला के रेस्क्यू के नगर पंचायत की लिफ्टिंग मशीन की महती भूमिका रही। आग पर काबू होने तक नगर पंचायत के कर्मचारी घटना स्थल पर जमे रहे। इसके अलावा विद्युत विभाग के कर्मचारी भी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करते नजर आए।
लेखक: वरिष्ठ पत्रकार सुनील कुमार जैथरा,एटा
