लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सिंचाई विभाग के एक मृत अधिशासी अभियंता की पत्नी बनकर सरकारी नौकरी और अन्य लाभ हासिल करने की कोशिश का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक महिला ने खुद को मृत इंजीनियर की पत्नी साबित करने के लिए फर्जी विवाह प्रमाणपत्र तैयार कराया और उसे सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता कार्यालय में भी जमा कर दिया। मामले का खुलासा होने के बाद मृत इंजीनियर की वास्तविक पत्नी ने पुलिस से शिकायत की। इसके आधार पर चिनहट पुलिस ने पांच नामजद आरोपियों समेत अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
शिकायतकर्ता संतोषी रावत का आरोप है कि उनके पति की मौत के बाद लक्ष्मी नाम की महिला ने कुछ लोगों के साथ मिलकर खुद को उनकी पत्नी बताने की कोशिश की। इसके लिए कथित तौर पर वर्ष 2020 का विवाह प्रमाणपत्र तैयार कराया गया, जबकि संतोषी का दावा है कि इस प्रमाणपत्र में दर्ज जानकारी फर्जी है। अब पुलिस मामले की जांच कर रही है।
सड़क हादसे में हुई थी अधिशासी अभियंता सुशील कुमार की मौत
जानकारी के मुताबिक, संतोषी रावत हैवलक रोड स्थित सरकारी आवास में रहती हैं। उन्होंने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनके पति सुशील कुमार सिंचाई विभाग में अधिशासी अभियंता के पद पर तैनात थे।
27 अप्रैल 2025 को एक सड़क हादसे में सुशील कुमार की मौत हो गई थी। उनके परिवार में पत्नी संतोषी रावत और चार बच्चे हैं।
पति की मृत्यु के बाद परिवार को नियमानुसार मिलने वाले सरकारी लाभ और अन्य सुविधाओं से जुड़ी प्रक्रिया चल रही थी। इसी दौरान लक्ष्मी नाम की महिला की ओर से खुद को सुशील कुमार की पत्नी बताए जाने का मामला सामने आया।
लक्ष्मी ने 2020 का विवाह प्रमाणपत्र बनवाकर विभाग में किया जमा
संतोषी रावत ने आरोप लगाया कि लक्ष्मी ने चंद्रिका प्रसाद, पिंकू और अन्य लोगों की मदद से 30 जुलाई 2020 को एक विवाह प्रमाणपत्र बनवाया था।
इस प्रमाणपत्र में लक्ष्मी को सुशील कुमार की पत्नी बताया गया था। शिकायतकर्ता के मुताबिक, इसी दस्तावेज को सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता कार्यालय में भी जमा कराया गया।
आरोप है कि इस प्रमाणपत्र का इस्तेमाल मृत अधिशासी अभियंता की पत्नी के रूप में सरकारी नौकरी और अन्य विभागीय लाभ हासिल करने के उद्देश्य से किया जा रहा था।
यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला सरकारी नौकरी और सेवा संबंधी लाभों के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल से जुड़ा गंभीर मामला हो सकता है।
जांच में विवाह प्रमाणपत्र को बताया गया फर्जी
संतोषी रावत ने बताया कि जब उन्हें इस विवाह प्रमाणपत्र के बारे में जानकारी मिली तो उन्होंने इसकी सत्यता की जांच कराई।
शिकायत के अनुसार, आर्य प्रतिनिधि सभा उत्तर प्रदेश के कार्यालय में संपर्क करने पर संबंधित विवाह प्रमाणपत्र को फर्जी बताया गया।
इसके अलावा संतोषी ने एक और महत्वपूर्ण जानकारी पुलिस को दी। उनका आरोप है कि जिस विवाह प्रमाणपत्र नंबर पर लक्ष्मी के नाम से दस्तावेज जारी किया गया था, उसी नंबर पर 3 अगस्त 2024 को अननुराधा यादव नाम की दूसरी महिला का विवाह प्रमाणपत्र भी जारी हुआ था।
एक ही प्रमाणपत्र नंबर पर अलग-अलग महिलाओं के नाम से दस्तावेज जारी होने के आरोप ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
पुलिस अब इन दस्तावेजों की सत्यता और प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है।
पांच नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज
मामले में संतोषी रावत की शिकायत के आधार पर चिनहट पुलिस ने पांच लोगों को नामजद करते हुए अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ FIR दर्ज की है।
नामजद आरोपियों में शामिल हैं:
- लक्ष्मी
- चंद्रिका प्रसाद
- पिंकू
- आशीष कुमार त्रिपाठी
- नितेश देशवाल
इन सभी पर कथित रूप से फर्जी विवाह प्रमाणपत्र तैयार कराने और उसके माध्यम से धोखाधड़ी कर सरकारी लाभ हासिल करने की कोशिश से जुड़े आरोप लगाए गए हैं।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले में दस्तावेजों की जांच और संबंधित लोगों की भूमिका का पता लगाया जाना बाकी है।
मृत कर्मचारी की पत्नी और बच्चों के अधिकारों का मामला
यह मामला केवल कथित फर्जी विवाह प्रमाणपत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि मृत सरकारी कर्मचारी के परिवार को मिलने वाले सेवा संबंधी लाभों से भी जुड़ा है।
सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद नियमानुसार पात्र आश्रितों को पारिवारिक पेंशन, अनुकंपा नियुक्ति और अन्य देय लाभ मिल सकते हैं। ऐसे मामलों में वैवाहिक संबंध और पात्रता से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन महत्वपूर्ण होता है।
संतोषी रावत का आरोप है कि लक्ष्मी ने खुद को सुशील कुमार की पत्नी साबित करने के लिए कथित फर्जी प्रमाणपत्र का सहारा लिया, ताकि सरकारी नौकरी और दूसरे लाभ हासिल किए जा सकें।
फिलहाल पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि विवाह प्रमाणपत्र किसने तैयार कराया, इसे विभाग में किसने जमा किया और इसके जरिए किसी सरकारी लाभ के लिए आवेदन किया गया था या नहीं।
पुलिस जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई
लखनऊ में सामने आए इस मामले ने सरकारी विभागों में दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं। एक मृत अधिशासी अभियंता की पत्नी बनकर सरकारी लाभ हासिल करने की कथित कोशिश के आरोपों के बाद अब पुलिस जांच पर सबकी नजर है।
जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि विवाह प्रमाणपत्र वास्तव में कैसे तैयार हुआ, उसमें किसकी भूमिका थी और विभाग में दस्तावेज जमा कराने के पीछे क्या उद्देश्य था।
फिलहाल चिनहट पुलिस ने पांच नामजद आरोपियों समेत अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
