झाँसी (उत्तर प्रदेश): बुंदेलखंड की हृदयस्थली झाँसी में इन दिनों अपराधियों के हौसले बुलंद हैं, लेकिन इस बार हमला विपक्ष ने नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के कद्दावर नेता और सदर विधायक रवि शर्मा ने किया है। विधायक ने सीधे DGP (पुलिस महानिदेशक) को पत्र लिखकर झाँसी पुलिस और सट्टा सिंडिकेट के बीच चल रही ‘जुगलबंदी’ की पोल खोल दी है। इस “लेटर बम” की गूँज से सट्टा कारोबारियों और भ्रष्ट पुलिसकर्मियों में हड़कंप मच गया है।
लेटर बम में बड़ा खुलासा: सट्टा, जुआ और अवैध सोना व्यापार

विधायक रवि शर्मा ने अपने पत्र में स्पष्ट आरोप लगाया है कि झाँसी में सट्टेबाजी का कारोबार अब केवल गलियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक हाई-टेक सिंडिकेट बन चुका है। पत्र के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
MCX के नाम पर ‘सोना-चांदी’ का सट्टा: विधायक ने खुलासा किया कि झाँसी में MCX (Multi Commodity Exchange) की आड़ में सोने-चांदी की कीमतों पर अवैध सट्टेबाजी का काला खेल चल रहा है। इसमें रोजाना करोड़ों रुपयों का लेन-देन हो रहा है।
IPL सटोरिए हुए बेलगाम: मौजूदा आईपीएल सीजन में झाँसी सट्टेबाजी का गढ़ बन चुका है। सटोरिए बेखौफ होकर दांव लगवा रहे हैं और युवाओं को इस दलदल में धकेल रहे हैं।
थानों में ‘दलालों’ का कब्जा: सबसे गंभीर आरोप पुलिस पर है। विधायक ने आरोप लगाया कि झाँसी के कई थानों में ‘पुलिस के दलाल’ सक्रिय हैं, जो सटोरियों और अधिकारियों के बीच सेतु का काम करते हैं। इन्हीं दलालों के जरिए सट्टा सिंडिकेट को ‘अभय दान’ मिलता है।
अपनों पर भी वार? सट्टा कारोबार में भाजपा नेताओं के नाम
सूत्रों के हवाले से यह भी खबर आ रही है कि विधायक के इस पत्र के पीछे की एक बड़ी वजह सट्टा कारोबार में कुछ स्थानीय भाजपा नेताओं की संलिप्तता भी है। चर्चा है कि विधायक ने बिना नाम लिए अपनी ही पार्टी के उन ‘सफेदपोशों’ को भी निशाने पर लिया है जो सट्टेबाजों को राजनीतिक संरक्षण दे रहे हैं। विधायक के इस साहसिक कदम ने यह मुहर लगा दी है कि सट्टेबाजी का जाल शहर की रगों में गहराई तक उतर चुका है।
युवाओं का भविष्य दांव पर
विधायक रवि शर्मा ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सट्टेबाजी की इस लत ने झाँसी के युवाओं का भविष्य बर्बाद कर दिया है। शहर के मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चे इस जाल में फंसकर कर्जदार हो रहे हैं, जिससे अपराध की अन्य घटनाएं भी बढ़ रही हैं। विधायक ने DGP से मांग की है कि इस पूरे सिंडिकेट का न केवल पर्दाफाश किया जाए, बल्कि उन पुलिस अधिकारियों पर भी गाज गिरे जो इनकी मदद कर रहे हैं।
अब क्या होगी कार्रवाई?
सत्ताधारी दल के विधायक द्वारा खुद अपनी ही पुलिस और सिस्टम पर सवाल उठाना यह दर्शाता है कि पानी अब सिर से ऊपर जा चुका है। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावों के बीच, क्या झाँसी पुलिस के आला अधिकारी उन ‘काली भेड़ों’ पर कार्रवाई करेंगे जिनका नाम विधायक ने कूटनीतिक रूप से उजागर किया है।
