जालौन के कालपी बार एसोसिएशन अध्यक्ष गयादीन अहिरवार की हत्या के 1 लाख के इनामी मुख्य आरोपी पवन यादव उर्फ मोनू को पुलिस ने मुठभेड़ के बाद दबोच लिया। जमीन विवाद, 10 लाख की सुपारी और पूरी साजिश का खुलासा यहाँ पढ़ें।
- क्या था पूरा मामला? (अपहरण से लेकर शव बरामदगी तक)
- जोल्हूपुर-मदारीपुर मार्ग पर ऐसे हुई पुलिस मुठभेड़
- अस्पताल में बोला बदमाश- “बहुत दर्द हो रहा है, इंजेक्शन लगवा दो”
- हत्याकांड के पीछे की कहानी: 10 लाख का सौदा और एक ‘मैसेज’ बना अहम सुराग
- अधिवक्ताओं में रोष, सुरक्षा के लिए ‘अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम’ की मांग
जालौन | डिजिटल डेस्क: उत्तर प्रदेश के जालौन जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। कालपी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता गयादीन अहिरवार (68) की सनसनीखेज हत्या के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। हत्याकांड का फरार मुख्य आरोपी और 1 लाख रुपये का इनामी बदमाश पवन यादव उर्फ मोनू मंगलवार देर रात पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में गिरफ्तार कर लिया गया है।

जोल्हूपुर-मदारीपुर मार्ग पर सोहरापुर गांव के पास हुई इस जवाबी कार्रवाई में आरोपी के दोनों पैरों में गोली लगी है, जिसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। आरोपी के पास से एक तमंचा, कारतूस, एक बाइक और मोबाइल फोन बरामद किया गया है।

क्या था पूरा मामला? (अपहरण से लेकर शव बरामदगी तक)
शनिवार शाम: कालपी में कार सवार बेखौफ बदमाशों ने कालपी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष गयादीन अहिरवार का अपहरण कर लिया था।
रविवार सुबह: अपहरणकर्ताओं ने उनकी हत्या कर शव को कानपुर नगर के गुजैनी थाना क्षेत्र के गंभीरपुर गांव के पास नहर में फेंक दिया था, जहाँ से पुलिस ने खून से लथपथ शव बरामद किया।
शुरुआती गिरफ्तारियां: इस सनसनीखेज वारदात के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सर्वेश शुक्ला, आशीष विश्वकर्मा, केशव कटियार और जमीन के विवाद में हत्या की सुपारी देने वाले ठेकेदार इंद्रजीत यादव को हिरासत में ले लिया था।
पहला एनकाउंटर: रविवार शाम को घटना में इस्तेमाल कार बरामद कराने के दौरान आरोपी सर्वेश और आशीष पुलिस मुठभेड़ में घायल हो गए थे, लेकिन मुख्य सुपारी किलर पवन उर्फ मोनू मौके से फरार चल रहा था।

जोल्हूपुर-मदारीपुर मार्ग पर ऐसे हुई पुलिस मुठभेड़
पुलिस को मंगलवार देर रात सटीक सूचना मिली थी कि 1 लाख का इनामी बदमाश मोनू यादव जोल्हूपुर-मदारीपुर मार्ग के पास मौजूद है। सूचना मिलते ही कालपी, उरई और कदौरा थाने की पुलिस के साथ स्वाट टीम (SWAT) ने इलाके की घेराबंदी कर ली।
खुद को घिरता देख आरोपी ने पुलिस टीम पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। आत्मरक्षार्थ पुलिस की जवाबी कार्रवाई में मोनू के दोनों पैरों में गोली लग गई, जिसके बाद पुलिस ने उसे दबोच लिया। विवेचक सीओ राजेश कमल के अनुसार, इस नृशंस हत्याकांड में मोनू की मुख्य और अहम भूमिका रही है। आरोपी के खिलाफ बर्रा में एक, गुजैनी में तीन और कालपी में एक आपराधिक मामला दर्ज है, जिसमें हत्या, हत्या का प्रयास और अवैध हथियार रखने जैसे संगीन जुर्म शामिल हैं।
अस्पताल में बोला बदमाश- “बहुत दर्द हो रहा है, इंजेक्शन लगवा दो”

मुठभेड़ के दौरान घायल होने के बाद जब पुलिस ने मोनू यादव को अस्पताल में भर्ती कराया, तो वह दर्द से छटपटाते हुए पुलिसकर्मियों से बोला— “साहब, बहुत दर्द हो रहा है, इंजेक्शन लगवा दो।” फिलहाल पुलिस अस्पताल में ही उससे हत्याकांड की साजिश, 10 लाख रुपये में तय हुए सौदे और हत्या के बाद हुए भुगतान को लेकर गहन पूछताछ कर रही है।

हत्याकांड के पीछे की कहानी: 10 लाख का सौदा और एक ‘मैसेज’ बना अहम सुराग
पुलिस की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं:
-
सुपारी का सौदा: जमीन के विवाद के चलते इस पूरी हत्या की साजिश रची गई थी। ठेकेदार इंद्रजीत यादव ने मोनू के पिता से कहा था कि अगर उनका बेटा यह ‘काम’ कर देगा, तो उसकी जिंदगी बदल जाएगी। इसके एवज में 10 लाख रुपये में सौदा तय हुआ था।
-
वह मैसेज बना अहम सुराग: हत्या के बाद आरोपी सीधे कानपुर में मोनू के घर पहुँचे थे। घर पहुँचते ही मोनू ने अपने पिता अजय कुमार यादव को फोन कर कहा— “पापा, काम हो गया है, पूरे पैसे मंगा लो।” इसके बाद अजय कुमार ने कानपुर निवासी ठेकेदार इंद्रजीत यादव के मोबाइल पर मैसेज भेजकर काम पूरा होने की जानकारी दी और भुगतान की बात कही। पुलिस के हाथ यही चैट और मैसेज लग गया, जिससे पूरे मामले की कड़ियां जुड़ती चली गईं।
अधिवक्ताओं में रोष, सुरक्षा के लिए ‘अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम’ की मांग
वरिष्ठ अधिवक्ता गयादीन अहिरवार की निर्मम हत्या के बाद से अधिवक्ताओं में भारी आक्रोश है। पूर्व जिला बार संघ प्रत्याशी एवं प्रदेश जाटव महासभा संचालक विशंभर दयाल जाटव की अध्यक्षता में एक शोक सभा आयोजित की गई, जिसका संचालन प्रदेश महासचिव जगदेव प्रसाद ने किया।
प्रांतीय अध्यक्ष रामशरण जाटव ने घटना की तीव्र निंदा करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से मांग की है कि राज्य में वकीलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम’ (Advocate Protection Act) को कड़ाई से लागू किया जाए।

