सुरक्षा के नाम पर खर्च हुआ बजट, निगरानी सिस्टम ठप
एटा/जैथरा: नगर पंचायत जैथरा में सुरक्षा और निगरानी के लिए लगाए गए लाखों रुपये के सीसीटीवी कैमरे अब सिर्फ शोपीस बनकर रह गए हैं। तीसरी आंख कहे जाने वाले ये कैमरे न तो रिकॉर्डिंग कर रहे हैं और न ही लाइव फुटेज दिखा रहे हैं। ऐसे में नगर की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह फेल है। आपराधिक घटनाएं घटित होने पर पुलिस को सीसीटीवी फुटेज नहीं मिल पाती हैं ,जिससे घटनाओं के अनावरण में पुलिस को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। नगर में तिराहे और चौराहों पर लगे 17 सीसीटीवी कैमरे पुलिस की जगह अपराधियों के लिए मुफीद साबित हो रहे हैं।
नगर में चोरी, छिनैती और अवैध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए नगर पंचायत ने प्रमुख चौराहों, तिराहों और मुख्य बाजार में कैमरे लगवाए थे। इसके लिए लाखों का बजट खर्च किया गया था। मकसद था कि घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई हो सके और अपराध पर नियंत्रण रखा जा सके।
लेकिन हकीकत यह है कि अधिकतर कैमरे कई महीनों से बंद पड़े हैं। कुछ कैमरों के लेंस पर धूल की परत जम चुकी है। ऐसे में अगर कोई घटना होती है तो फुटेज मिलने की उम्मीद ही नहीं है।
नगर के लोगों का कहना है कि कैमरे लगने के बाद नगर में आपराधिक घटनाओं का ग्राफ कम हुआ था। सीसीटीवी फुटेज लेकर पुलिस को घटनाओं के अनावरण में काफी मदद मिलती थी। अब वाई फाई का रिचार्ज खत्म होने की वजह से पूरा निगरानी सिस्टम का ठप हो गया है। व्यापारियों ने कई बार नगर पंचायत को शिकायत की, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं हो सका है।
तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि सीसीटीवी सिस्टम को नियमित सर्विसिंग और निगरानी की जरूरत होती है। अगर एक बार सिस्टम बैठ जाए तो अपराधी भी बेखौफ हो जाते हैं। ऐसे में सुरक्षा के नाम पर हुआ खर्च बेकार साबित होता है।
नगरवासियों का सवाल है कि जब कैमरे चल ही नहीं रहे तो लाखों का बजट बर्बाद हो गया? क्या यह सिर्फ कागजी औपचारिकता थी? अगर निगरानी व्यवस्था इस कदर चौपट हो जाएगी तो नगर की सुरक्षा के दावे कैसे पूरे होंगे?
