नाला अधूरा, जलभराव बरकरार, नागरिकों ने सीएम-डीएम से लगाई गुहार
अलीगंज (एटा): नगर पालिका परिषद अलीगंज में सरकारी धन की बर्बादी का बड़ा मामला सामने आया है। यहां दो महीने पहले लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई सीसी सड़क को अब तोड़कर पानी निकासी के लिए पाइपलाइन डाली जा रही है। बिना ठोस योजना के कराए जा रहे निर्माण कार्यों से सरकारी राजस्व का नुकसान हो रहा है। नगरवासियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जिलाधिकारी अरविंद सिंह से जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
नगर में गलियों और नालों के निर्माण में अनियमितताएं बरती जा रही है। योजना बनाने वाले अधिकारियों की कार्यशैली सीधे भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रही है। बीते दो महीने पहले ही मोहल्ला काजी से हत्सारी चौराहे तक लाखों की लागत से सीसी सड़क और नाला बनवाया गया था। वहीं हत्सारी चौराहे से बघार पुलिया तक नाले को चौड़ा कर नया नाला बनना था।
लेकिन निर्माण में खेल कर दिया गया। नए नाले का निर्माण नगला पड़ाव बस स्टैंड तक ही किया गया और उसे पुराने नाले से जोड़ दिया गया। आगे का नाला दूसरी तरफ बनाना शुरू कर दिया, जो अब तक चालू नहीं हो सका। सवाल यह है कि जब पुराने नाले को तोड़कर चौड़ा करना था तो दूसरी ओर नया नाला क्यों बना दिया गया? नतीजा, जलभराव की समस्या जस की तस बनी हुई है।
2 महीने पुरानी सड़क पर चला हथौड़ा
मोहल्ला काजी में हालात सबसे खराब हैं। यहां लाखों की लागत से बनी सीसी सड़क को बने दो महीने भी नहीं हुए और पालिका ने उसे तोड़ना शुरू कर दिया। पालिका का तर्क है कि इलाके में जलभराव की समस्या के चलते बीच सड़क में पाइपलाइन डाली जा रही है।
इस पर मोहल्लेवासियों ने सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि अगर जलभराव की समस्या पहले से थी तो सड़क बनाने से पहले पाइपलाइन क्यों नहीं डाली गई? नई सड़क को बीच से तोड़े जाने से लोगों में भारी आक्रोश है। मोहल्लेवासियों ने सीएम योगी, डीएम अरविंद सिंह और उच्चाधिकारियों से जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
गलियां खस्ताहाल, प्राइवेट व्यक्ति पर सौदागरी का आरोप
नगर में कई गलियों की हालत पहले से ही खस्ताहाल है। जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन डालने के लिए गलियां खोदी गईं, लेकिन मरम्मत ठीक से नहीं की गई। सूत्रों का आरोप है कि नगर पालिका से जुड़े एक प्राइवेट व्यक्ति ने जल निगम के ठेकेदार से सौदागरी कर,कहा है कि टूटी सड़क जैसी चाहो वैसी बनाओ, पालिका कार्रवाई नहीं करेगी।
यहां के वाशिंदों का कहना है कि नगर पालिका के अधिकारी सरकारी धन का दुरुपयोग करने में माहिर हो गए हैं। पहले बिना सोचे-समझे सड़क बना दो, फिर उसे तोड़कर दोबारा पैसा खर्च करो। इस ‘तोड़ो और बनाओ’ नीति से जनता का पैसा बर्बाद हो रहा है। लोगों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
