नगर आयुक्त बोले–जांच जारी, खसरा 1/31 का लेखपाल ने जारी कर दिया नया नक्शा
आगरा। नगर निगम के अधिकारी निगम की जमीनों की रखवाली के दावे भले ही जोर-शोर से करते हों, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। बाबरपुर मौजा का ताजा मामला इन दावों की पोल खोलने के लिए काफी है। मौके पर नगर आयुक्त के आदेश से नगर निगम का बोर्ड लगा हुआ है, लेकिन कागजों में यह बेशकीमती जमीन एक बिल्डर के नाम कराने की पूरी तैयारी पहले ही कर ली गई है।
इस जमीन को लेकर न केवल शिकायतें की गईं, बल्कि नगर निगम और प्रशासनिक स्तर पर भी आपत्तियां दर्ज कराई गईं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि सभी शिकायतें फाइलों में ही दम तोड़ती नजर आईं। नतीजा यह रहा कि शिकायतों को नजरअंदाज कर निगम की करोड़ों की जमीन बिल्डर के नाम करने के लिए अधिकारियों और प्रशासनिक तंत्र ने पूरी पटकथा तैयार कर दी।
मामला जब नगर निगम की संपत्ति प्रभारी श्रेष्ठ पांडे के संज्ञान में आया तो उन्होंने निगम रिकॉर्ड में दाखिल प्रक्रिया को खारिज करने की बात कही, लेकिन तब तक खेल काफी आगे बढ़ चुका था। ताज्जुब इस बात का है कि एक ऐसा नक्शा, जिसमें न स्पष्ट लिखावट है और न किसी सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर, उसी के आधार पर जमीन को निजी बताने की कवायद शुरू कर दी गई।उधर, सरकारी मशीनरी की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। तहसील स्तर से लेखपाल द्वारा खसरा संख्या 1/31 का नया नक्शा जारी कर दिया गया, जिसे ‘क्लियर’ दर्शाया गया। यही फाइल जब तहसीलदार की अदालत में पहुंची तो वहां से भी इसे बिल्डर के पक्ष में पास कर दिया गया। चारों ओर से ऐसी स्थिति बना दी गई कि खसरा संख्या 1/31 अब एक बिल्डर के नाम दर्ज होने जा रही है।सूत्रों के मुताबिक इस पूरे खेल की पटकथा लिखने में नगर निगम के संपत्ति अधिकारी वैभव यादव की भूमिका अहम बताई जा रही है, जिन्होंने शिकायतों को लगातार नजरअंदाज किया। इस मामले में नगर आयुक्त से कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका एक ही जवाब रहा—मामले की जांच की जा रही है।,,अब बड़ा सवाल यह है कि क्या नगर निगम और प्रशासन जागकर निगम की बेशकीमती जमीन को कौड़ियों के भाव बिल्डर के हाथों जाने से बचा पाएंगे, या फिर जांच के नाम पर खेल यूं ही चलता रहेगा।फिलहाल ‘अग्र भारत’ अगले अंक में इस जमीन घोटाले की पूरी पटकथा को दस्तावेजी सबूतों के साथ बेनकाब करेगा।
आगरा ,मौके पर नगर निगम का बोर्ड, कागजों में बड़ा खेल बेशकीमती निगम जमीन को बिल्डर के नाम करने की लिखी गई पटकथा
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