एटा: एक ही इमारत पर डबल मान्यता लेने वाले विद्यालय प्रबंधन पर अब कार्यवाही की तलवार लटकी हुई है। ऐसे में छात्रों के भविष्य पर भी संकट मंडराने लगा है। मामला प्रकाश में आने के बाद विद्यालय प्रबंधन मामले को दबाने में जुट गया है। एक ही इमारत और उसके संसाधनों का इस्तेमाल कर दो अलग अलग बोर्ड से मान्यता प्राप्त कर लेने का सनसनीखेज मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। भले ही जिला विद्यालय निरीक्षक ने नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा हो, किंतु इस खेल में विभागीय संलिप्तता के बिना पूरी कार्यवाही को अंजाम दिया जाना किसी के गले नहीं उतर रहा है।
मामला सुर्खियों में आने के बाद विद्यालय प्रबंधक ने लीपापोती शुरू कर दी। सूत्र बताते हैं विद्यालय प्रबंधन ने मामले के पटाक्षेप में लाखों रुपए खर्च कर दिए हैं। कार्यवाही से बचने के लिए विभागीय मिली भगत से नई इमारत को खड़ा किया जाने लगा है। हालांकि पूरे प्रकरण में विभागीय संलिप्तता को दर्शित करते हुए सम्पूर्ण प्रकरण की शिकायत सीबीएसई बोर्ड के साथ ही प्रदेश शासन में भी की गई है।
विदित हो एक जागरूक नागरिक अतुल कुमार ने आरोप लगाते हुए एस.डी. पब्लिक स्कूल में चल रहे गड़बड़ झाले की शिकायत की थी। विकासखंड जैथरा क्षेत्र के कस्बा धुमरी में एस डी.पब्लिक इंटर कॉलेज ने जिस इमारत को दिखाकर यूपी बोर्ड से मान्यता प्राप्त की है, उसी इमारत को पुनः प्रदर्शित कर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त कर ली गई।
गौरतलब है संबंधित संस्थान को माध्यमिक शिक्षा विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र कैसे मिल गया ? बिना भौतिक सत्यापन के ही नियम कायदाओं को ताक पर रखकर विद्यालय प्रबंधन को छात्रों के भविष्य खिलवाड़ करने की इजाजत किसने दी ? यूपी बोर्ड से मान्यता कराने से लेकर सीबीएसई बोर्ड की मान्यता कराने तक की प्रक्रिया की भी जांच की जानी चाहिए। प्रबंधक के साथ साथ शिक्षा विभाग में अतिरिक्त लाभ कमाने की लालसा रखने वाले अधिकारी और कर्मचारियों की भी जांच कराए जाने की अब मांग उठने लगी है। भले ही जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. इंद्रजीत सिंह ने प्रकरण की जांच कर मान्यता प्रत्याहरण की बात कही हो लेकिन इस पूरे खेल में जिला विद्यालय निरीक्षक की भी भूमिका संदेह के घेरे में है। ऐसे हालातों में अब यह देखना होगा कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने बालों में किस किस “ईमानदार” का चेहरा होगा बेनकाब ?
एस.डी. पब्लिक स्कूल की मान्यता होगी रद्द ? क्या खेल में शामिल “ईमानदार” चेहरे होंगे बेनकाब ?
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