■ वर्ष 2002 में हुई थी घटना
■ मृतक का पुत्र एवं एक अन्य गवाह की गवाही, उन्होंने भी नहीं किया घटना का समर्थन
■ 20 वर्ष में अन्य गवाह नहीं हुए हाजिर
आगरा। 9 अगस्त 2002 को हुई एक लापरवाही जनित हत्या के मामले में रोडवेज बस चालक कृष्ण मुरारी पुत्र मूंगा राम निवासी पिनाहट, आगरा को साक्ष्य के अभाव में सीजेएम अचल प्रताप सिंह द्वारा बरी कर दिया गया है। इस मामले में अभियोजन पक्ष के द्वारा 20 वर्षों में कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं किए गए, और दो प्रमुख गवाहों की गवाही भी घटना के समर्थन में नहीं थी, जिसके कारण आरोपी को राहत मिली।
मुकदमे का विवरण
थाना ताजगंज में दर्ज मामले के अनुसार वादी मुकदमा धर्मवीर ने पुलिस में तहरीर दी थी कि उसके पिता, गनपत सिंह, 9 अगस्त 2002 की सुबह 9 बजे साइकिल से अपने गांव आ रहे थे। इस दौरान कलाल खेरिया के पास पहलवान टेंट हाउस के सामने यूपी रोडवेज की बस (यू.पी. 80, 9605) के चालक ने तेजी और लापरवाही से बस चलाई, जिससे उनकी साइकिल को पीछे से टक्कर मार दी और वह दूर तक घसीटते हुए ले जाया गया। इस दुर्घटना में वादी के पिता की मौके पर ही मृत्यु हो गई। बस चालक बस छोड़कर फरार हो गया।
मुकदमे में गवाहों की कमी
अदालत में अभियोजन की तरफ से केवल मृतक के पुत्र धर्मवीर और एक अन्य गवाह विजय कुमार की गवाही पेश की गई। हालांकि, दोनों गवाहों ने घटना का समर्थन नहीं किया और किसी भी तरह का ठोस बयान नहीं दिया। इसके बाद पुलिस द्वारा 20 वर्षों में अन्य गवाहों को पेश करने में कोई सफलता नहीं मिली, और न ही पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर को गवाही के लिए बुलाया जा सका।
अदालत का आदेश
सीजेएम अचल प्रताप सिंह ने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों की कमी और दोनों गवाहों के बयान न देने के कारण आरोपी कृष्ण मुरारी को बरी करने का आदेश दिया। आरोपी के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रकाश नारायण शर्मा और जय शर्मा के तर्कों को मानते हुए अदालत ने यह निर्णय लिया।
