मथुरा में समाजवादी पार्टी (सपा) के लिए राजनीतिक और संगठनात्मक चुनौतियां लगातार बनी हुई हैं। विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच जिले में पार्टी का मुख्य संगठन, फ्रंटल संगठन और अन्य कार्यकारिणियां भंग पड़ी हैं। वहीं, हाल के दिनों में कई नेताओं पर अलग-अलग मामलों में एफआईआर दर्ज होने से पार्टी की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
- मुख्य संगठन से लेकर फ्रंटल इकाइयां तक भंग
- कई नेताओं पर एफआईआर के बाद संगठनात्मक कार्रवाई
- डॉ. राजन रिजवी पर महिला बैंककर्मी ने लगाए आरोप
- अनिल अग्रवाल पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई
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- महानगर अध्यक्ष रितु गोयल पर भी दर्ज हुईं एफआईआर
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- प्रदेश सचिव जागेश्वर यादव पर भी मुकदमा
- चुनाव से पहले संगठन को खड़ा करना बड़ी चुनौती
मथुरा। उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी सत्ता में रही हो या विपक्ष में, मथुरा में पार्टी को अपेक्षित राजनीतिक सफलता नहीं मिल सकी है। एमएलसी चुनावों में दमदार प्रदर्शन के बावजूद जिले में विधानसभा चुनाव के लिहाज से पार्टी की स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। सपा अब तक जिले की किसी भी विधानसभा सीट पर जीत दर्ज नहीं कर सकी है।
पार्टी ने मांट विधानसभा सीट से अपने कद्दावर नेता संजय लाठर को चुनाव मैदान में उतारकर मजबूत दावेदारी पेश करने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। अब आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन को दोबारा सक्रिय और मजबूत करने की है।
मुख्य संगठन से लेकर फ्रंटल इकाइयां तक भंग
मथुरा में समाजवादी पार्टी इस समय संगठनात्मक स्तर पर मुश्किल दौर से गुजर रही है। जिले में पार्टी के मुख्य संगठन के साथ-साथ फ्रंटल संगठनों की कार्यकारिणियां भी भंग पड़ी हैं। इसके चलते पार्टी के पास फिलहाल सक्रिय जिला और महानगर स्तर की संगठनात्मक व्यवस्था का अभाव है।
पार्टी कार्यकर्ताओं को उम्मीद है कि दीपावली से पहले प्रदेश नेतृत्व संगठन को लेकर कोई निर्णय ले सकता है। कार्यकर्ताओं का मानना है कि नए पदाधिकारियों की नियुक्ति होने से चुनावी तैयारियों को गति मिलेगी और संगठनात्मक गतिविधियां फिर से शुरू हो सकेंगी।
इसके अलावा, जिले में लंबे समय से पार्टी की ओर से कोई बड़ा और प्रभावी आंदोलन भी देखने को नहीं मिला है। ऐसे में संगठन की निष्क्रियता को आगामी चुनाव के लिहाज से एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
कई नेताओं पर एफआईआर के बाद संगठनात्मक कार्रवाई
हाल के दिनों में सपा से जुड़े कई नेताओं पर अलग-अलग मामलों में एफआईआर दर्ज हुई हैं। इन घटनाओं के बाद प्रदेश स्तर से मथुरा की संगठनात्मक इकाइयों को भंग किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, अलग-अलग मामलों में दर्ज आरोपों की प्रकृति और कानूनी स्थिति अलग-अलग है।
डॉ. राजन रिजवी पर महिला बैंककर्मी ने लगाए आरोप
सपा अल्पसंख्यक सभा के पूर्व राज्य महासचिव डॉ. राजन रिजवी पर मथुरा की एक महिला बैंककर्मी ने अश्लील और आपत्तिजनक व्हाट्सएप संदेश भेजने, पीछा करने तथा सरकार बनने पर मुख्यमंत्री कोटे से आईएएस बनवाने का प्रलोभन देने के आरोप लगाए थे।
इस मामले में शहर कोतवाली में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। विवाद सामने आने के बाद पार्टी ने उन्हें उनके पद से हटा दिया था। ये आरोप शिकायत के आधार पर दर्ज मामले से जुड़े हैं।
अनिल अग्रवाल पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई
नौहझील निवासी सपा नेता अनिल अग्रवाल के खिलाफ पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है। उन पर करोड़ों रुपये की ठगी और अन्य गंभीर मामलों में संलिप्तता के आरोप लगाए गए हैं।
पुलिस ने 2 जुलाई 2026 को गोविंद नगर क्षेत्र में उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की थी। इस कार्रवाई के विरोध में सपा कार्यकर्ताओं और नेताओं ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन सौंपा था। इस दौरान पार्टी नेताओं ने पुलिस कार्रवाई को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी।
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महानगर अध्यक्ष रितु गोयल पर भी दर्ज हुईं एफआईआर
सपा की महानगर अध्यक्ष रितु गोयल और अन्य लोगों के खिलाफ मारपीट, जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल तथा जान से मारने की कोशिश के आरोप लगाते हुए शहर कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, रितु गोयल के खिलाफ अलग-अलग मामलों में एक के बाद एक चार एफआईआर दर्ज हुई हैं। इन मामलों में लगाए गए आरोपों की कानूनी स्थिति का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।
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प्रदेश सचिव जागेश्वर यादव पर भी मुकदमा
सपा के अंदरूनी विवादों के बीच पार्टी के प्रदेश सचिव जागेश्वर यादव पर भी रंगदारी समेत अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इन घटनाओं ने जिले में पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों और संगठनात्मक स्थिति को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
चुनाव से पहले संगठन को खड़ा करना बड़ी चुनौती
विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच मथुरा में समाजवादी पार्टी के सामने दोहरी चुनौती है। एक ओर पार्टी को संगठन की सभी इकाइयों में नए पदाधिकारियों की नियुक्ति कर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना है, वहीं दूसरी ओर नेताओं से जुड़े विवादों और मुकदमों के कारण बनी राजनीतिक परिस्थितियों से भी निपटना है।
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एमएलसी चुनावों में प्रदर्शन के बावजूद विधानसभा स्तर पर अपेक्षित सफलता नहीं मिलने और लंबे समय से बड़े आंदोलन का अभाव पार्टी के लिए चिंता का विषय है। अब सबकी निगाहें प्रदेश नेतृत्व के फैसले पर टिकी हैं। संगठन की नई टीम कब गठित होगी और पार्टी जिले में अपनी राजनीतिक गतिविधियों को किस तरह आगे बढ़ाएगी, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
