आगरा। दयालबाग के संस्थापक एवं राधास्वामी मत के पाँचवें संत सतगुरु परम गुरु हजूर साहबजी महाराज (सर आनंद स्वरूप) की 145वीं जन्म-जयंती गुरुवार को दयालबाग सहित देश-विदेश की सभी सत्संग ब्रांचों में श्रद्धा, भक्ति एवं उल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर विशेष सत्संग, सांस्कृतिक कार्यक्रमों तथा सामूहिक सहभागिता के माध्यम से श्रद्धालुओं ने अपने पूज्य गुरु को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

प्रातःकाल कृषि कार्य के दौरान आयोजित विशेष कार्यक्रमों में परम पूज्य हजूर सत्संगी साहब एवं परम आदरणीय रानी साहिबा जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। उनके सान्निध्य में आध्यात्मिक वातावरण और भी अधिक प्रेरणादायी बन गया।

कार्यक्रम की शुरुआत अंबाला स्थित परम गुरु हजूर साहबजी महाराज के पावन जन्म-स्थान से संबद्ध सत्संग ब्रांच के संत सुपरह्यूमन योजना के बच्चों की आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुई। इन प्रस्तुतियों का दयालबाग में सजीव प्रसारण किया गया, जहाँ उपस्थित श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक उनका अवलोकन किया।

इसके उपरांत दयालबाग, जो वर्तमान में राधास्वामी सत्संग का मुख्यालय है, के संत सुपरह्यूमन योजना के बच्चों ने भी दो विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। गीत, संगीत और प्रेरणादायी प्रस्तुतियों के माध्यम से बच्चों ने परम गुरु हजूर साहबजी महाराज के आदर्शों, सेवा-भाव, अनुशासन और मानव कल्याण के संदेश को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त किया।
इन सभी कार्यक्रमों का ई-कैस्केड प्रणाली के माध्यम से देश-विदेश की विभिन्न सत्संग ब्रांचों में सजीव प्रसारण किया गया। आधुनिक तकनीक के उपयोग से विश्वभर में बसे श्रद्धालु इस पावन आयोजन से जुड़े और उन्होंने अपने-अपने स्थानों पर श्रद्धापूर्वक जन्म-जयंती समारोह में सहभागिता निभाई। इस अवसर पर विभिन्न सत्संग केंद्रों पर विशेष प्रार्थना, भजन, सेवा गतिविधियाँ तथा सामूहिक सत्संग भी आयोजित किए गए।

परम गुरु हजूर साहबजी महाराज का जीवन आध्यात्मिकता, सेवा, शिक्षा और आत्मनिर्भरता का अनुपम उदाहरण माना जाता है। उन्होंने 20 जनवरी 1915 को बसंत पंचमी के पावन अवसर पर शहतूत का पौधा रोपित कर दयालबाग की स्थापना की। समय के साथ उनके दूरदर्शी नेतृत्व में दयालबाग एक सुव्यवस्थित, स्वावलंबी और आदर्श सत्संग कॉलोनी के रूप में विकसित हुआ, जिसकी पहचान आध्यात्मिक मूल्यों के साथ-साथ सामाजिक एवं शैक्षिक विकास के केंद्र के रूप में भी स्थापित हुई।
परम गुरु हजूर साहबजी महाराज ने शिक्षा, तकनीकी एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण, कृषि, उद्योग, स्वास्थ्य सेवाओं, महिला शिक्षा और संगठित सामुदायिक जीवन को विशेष महत्व दिया। उनके मार्गदर्शन में अनेक शैक्षिक संस्थानों, तकनीकी शिक्षण व्यवस्थाओं, मॉडल इंडस्ट्रीज, आधुनिक कृषि प्रणाली, गौशाला एवं डेयरी, सरन आश्रम अस्पताल तथा बालिका शिक्षा से संबंधित संस्थानों की स्थापना एवं विस्तार हुआ। इन प्रयासों ने दयालबाग को आत्मनिर्भरता और समग्र विकास के एक सफल मॉडल के रूप में स्थापित किया।
आज भी परम गुरु हजूर साहबजी महाराज द्वारा स्थापित संस्थान और विभिन्न व्यवस्थाएँ उनके आदर्शों एवं सिद्धांतों के अनुरूप निरंतर प्रगति कर रही हैं। शिक्षा, सेवा, अनुसंधान, सामाजिक उत्थान और आध्यात्मिक मूल्यों के संरक्षण की दिशा में इन संस्थानों का योगदान निरंतर बढ़ रहा है। जन्म-जयंती के अवसर पर श्रद्धालुओं ने उनके आदर्शों पर चलने, सेवा, सदाचार और मानव कल्याण के संकल्प को दोहराया।
145वीं जन्म-जयंती का यह पावन उत्सव न केवल श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक बना, बल्कि नई पीढ़ी को परम गुरु हजूर साहबजी महाराज के आदर्शों, सेवा-भाव और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान से परिचित कराने का भी प्रेरणादायी अवसर सिद्ध हुआ।
