संसद के मानसून सत्र में फतेहपुर सीकरी सांसद राजकुमार चाहर ने प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण का मुद्दा उठाया। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने 491 करोड़ रुपये की ‘ज्ञान भारतम्’ योजना के तहत AI तकनीक और डिजिटलीकरण का पूरा रोडमैप पेश किया।
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन देश की प्राचीन बौद्धिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को लेकर एक बड़ा कदम देखने को मिला। फतेहपुर सीकरी से सांसद और भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार चाहर ने भारत की प्राचीन ज्ञान-संपदा और ऐतिहासिक पांडुलिपियों के संरक्षण का मुद्दा संसद में जोरदार ढंग से उठाया।
सांसद चाहर ने संस्कृति मंत्रालय से महत्वाकांक्षी ‘ज्ञान भारतम्’ योजना के उद्देश्यों, जनजातीय ज्ञान-परंपराओं के संरक्षण, पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण और इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के इस्तेमाल को लेकर सरकार की कार्ययोजना पर विस्तृत जानकारी मांगी।
“भारतीय सभ्यता का अमूल्य खजाना हैं पांडुलिपियां”
संसद में सवाल उठाते हुए सांसद राजकुमार चाहर ने कहा:
“भारत हजारों वर्षों से ज्ञान, दर्शन, विज्ञान, साहित्य और आध्यात्मिक परंपराओं का वैश्विक केंद्र रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों में आज भी लाखों प्राचीन पांडुलिपियां मौजूद हैं, जिनमें हमारी सभ्यता का अमूल्य खजाना छिपा है। इन अमूल्य धरोहरों का आधुनिक तकनीकों के माध्यम से संरक्षण करना और इन्हें आम लोगों व शोधकर्ताओं तक पहुंचाना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।”
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने दी विस्तृत जानकारी: 491.66 करोड़ का रोडमैप
सांसद के सवाल का लिखित और विस्तृत जवाब देते हुए केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि ‘ज्ञान भारतम्’ भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की एक बेहद महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय पहल है। इस दूरगामी योजना की घोषणा केंद्रीय बजट 2025-26 में 1 फरवरी 2025 को की गई थी।
केंद्रीय मंत्री ने संसद को अवगत कराया कि इस योजना के लिए वर्ष 2025 से 2031 तक कुल 491.66 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की गई है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य देशभर में बिखरी हुई प्राचीन पांडुलिपियों का सर्वेक्षण, प्रलेखन (documentation), संरक्षण, डिजिटलीकरण और व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार करना है।
‘ज्ञान भारतम्’ योजना के तहत किए जा रहे प्रमुख कार्य
संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, इस योजना का दायरा बेहद व्यापक है। इसके तहत निम्नलिखित महत्वपूर्ण रणनीतियों पर काम किया जा रहा है:
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सर्वेक्षण और पंजीकरण: देशभर में मौजूद प्राचीन पांडुलिपियों की खोज और उनका आधिकारिक पंजीकरण करना।
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राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी (NDR): एक केंद्रीय डिजिटल डेटाबेस का निर्माण, जहां सभी दस्तावेजों को सुरक्षित रखा जा सके।
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भाषा और लिपि संरक्षण: प्राचीन भारतीय भाषाओं और दुर्लभ लिपियों के अध्ययन व शोध को बढ़ावा देना।
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पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण: जनजातीय (Tribal) और लोक परंपराओं से जुड़े मौखिक व लिखित ज्ञान को सहेजना।
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क्षमता निर्माण: तकनीकी साझेदारी के माध्यम से इस क्षेत्र में नए विशेषज्ञों को तैयार करना।
डिजिटल क्रांति: 8 लाख से अधिक पांडुलिपियां सुरक्षित, 3.53 लाख पोर्टल पर लाइव
सरकार ने संसद में आंकड़ों के साथ अपनी सफलता साझा करते हुए बताया कि अब तक देशभर में 8 लाख से अधिक पांडुलिपियों का सफलतापूर्वक डिजिटलीकरण किया जा चुका है।
सबसे खास बात यह है कि इनमें से 3,53,947 पांडुलिपियों को ‘ज्ञान भारतम्’ पोर्टल पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध करा दिया गया है। इस कदम से अब दुनिया के किसी भी कोने में बैठा विद्यार्थी, इतिहासकार या शोधकर्ता भारत के आयुर्वेद, गणित, खगोल विज्ञान, दर्शन, साहित्य और लोक परंपराओं से जुड़े प्राचीन ग्रंथों को एक क्लिक पर पढ़ और समझ सकेगा।
AI, OCR और HTR तकनीक से सुरक्षित होगी भारत की विरासत
प्राचीन ग्रंथों को सहेजने और उन्हें समझने में सबसे बड़ी बाधा उनकी भाषा और जर्जर हो चुकी स्थिति होती है। इस समस्या का समाधान सरकार ने आधुनिक तकनीक में ढूंढा है। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि सरकार इस कार्य के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का सहारा ले रही है:
भारतीय सभ्यता और वैश्विक मंच पर पहचान की दिशा में बड़ा कदम
सांस्कृतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ‘ज्ञान भारतम्’ केवल एक तकनीकी परियोजना नहीं है, बल्कि यह भारत की हजारों वर्षों पुरानी बौद्धिक संपदा को नई पीढ़ी (Next-Gen) को सौंपने का एक महा-अभियान है।
संसद में सांसद राजकुमार चाहर द्वारा उठाए गए इस संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दे की सराहना की जा रही है। तकनीक और इतिहास के इस अनूठे संगम से न सिर्फ भारत की ज्ञान-परंपरा सुरक्षित होगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ और सांस्कृतिक पहचान को एक नया आयाम मिलेगा।
- “भारतीय सभ्यता का अमूल्य खजाना हैं पांडुलिपियां”
- केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने दी विस्तृत जानकारी: 491.66 करोड़ का रोडमैप
- ‘ज्ञान भारतम्’ योजना के तहत किए जा रहे प्रमुख कार्य
- डिजिटल क्रांति: 8 लाख से अधिक पांडुलिपियां सुरक्षित, 3.53 लाख पोर्टल पर लाइव
- AI, OCR और HTR तकनीक से सुरक्षित होगी भारत की विरासत
- भारतीय सभ्यता और वैश्विक मंच पर पहचान की दिशा में बड़ा कदम
