बीडीओ कार्यालय के सामने झाड़ियां, पार्क में कूड़े का ढेर, हैंडपंपों के पास जलभराव से सफाई व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
अंबेडकरनगर। कटेहरी विकास खंड परिसर में फैली गंदगी और अव्यवस्थाएं स्वच्छ भारत मिशन के दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं। जिस विभाग के जिम्मे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है, उसी कार्यालय परिसर की हालत बदहाल नजर आ रही है। चारों ओर फैली गंदगी, जगह-जगह जलभराव और उपेक्षित पार्क प्रशासनिक लापरवाही की कहानी बयां कर रहे हैं।

खंड विकास अधिकारी कार्यालय के सामने स्थित पार्क में झाड़ियां उग आई हैं। नियमित साफ-सफाई के अभाव में यहां सुबह-शाम टहलने आने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं पार्क में खेलने वाले बच्चों के लिए भी यह स्थिति स्वास्थ्य की दृष्टि से चिंता का विषय बन गई है। झाड़ियों और जलभराव के कारण मच्छरों तथा अन्य जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा भी बना रहता है।

स्थिति को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि सफाई कर्मचारी परिसर से निकला कूड़ा-कचरा पार्क के ही एक कोने में डाल देते हैं। कूड़े का नियमित निस्तारण न होने से वहां दुर्गंध फैलती है, मच्छरों और आवारा पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है तथा संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ जाती है। जिस पार्क को लोगों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित होना चाहिए, वही धीरे-धीरे कूड़ा डंपिंग स्थल का रूप लेता जा रहा है।

पूरे ब्लॉक परिसर में लगे दो सरकारी हैंडपंप भी बदहाल स्थिति में हैं। दोनों हैंडपंपों के आसपास गंदगी और जलभराव होने से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होना मुश्किल हो गया है। ऐसे में कर्मचारियों, फरियादियों और आम नागरिकों को भी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ब्लॉक मुख्यालय, जहां से पूरे क्षेत्र की विकास योजनाओं और स्वच्छता व्यवस्था की निगरानी की जाती है, वहीं ऐसी स्थिति बनी रहेगी तो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है। लोगों का आरोप है कि ब्लॉक में पर्याप्त सफाई कर्मचारी होने के बावजूद उनकी प्रभावी निगरानी नहीं हो रही है, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि कटेहरी ब्लॉक परिसर की साफ-सफाई, जलनिकासी, पार्क के रखरखाव और कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था तत्काल दुरुस्त कराई जाए, ताकि सरकारी कार्यालय परिसर स्वच्छता का उदाहरण बन सके, न कि लापरवाही का प्रतीक।
