मुख्य चिकित्सा अधिकारी की कार्यवाही पर लगा प्रश्न चिन्ह
तथाकथित डॉक्टर दानिश मरीजों से इलाज के नाम पर ऐंठ रहा है मोटी रकम
एटा: कस्बा जैथरा के भारतीय स्टेट बैंक के निकट एम्स नाम से संचालित अपंजीकृत अस्पताल हमेशा से विवादों में रहा है। इस अस्पताल में कई गंभीर बीमारियों के सफल इलाज का दावा किया जाता है। अस्पताल में लगा बोर्ड कई रोगों के विशेषज्ञ डॉक्टर के नाम और उनकी विशिष्टता को दर्शाता है। जबकि हकीकत इससे बिल्कुल उलट है बिना डिग्री डिप्लोमा के अपशिष्ट डॉक्टर यहां मरीजों का इलाज करते हैं। कई बार गर्भपात जैसी जटिल प्रक्रिया इन्ही झोलाछाप चिकित्सकों के द्वारा कराई जाती है। पिछले वर्ष तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधिकारी उमेश चंद्र त्रिपाठी ने इसी अस्पताल को सीज कर दिया था। अस्पताल संचालक ने किसी युक्ति से सील खुलवाकर दोबारा से देहात क्षेत्र से आने वाले सीधे-साधे लोगों के जीवन से खिलवाड़ फिर से आरंभ कर दिया।
20 मार्च शुक्रवार को शिकायत के आधार पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने फिर छापा मारा। इस दौरान टीम को कई खामियां मिली किंतु उन कमियों को नजर अंदाज करते हुए केवल ऑपरेशन थिएटर को सील कर खानापूर्ति की गई। अस्पताल संचालक/ तथाकथित डॉक्टर दानिश से स्पष्टीकरण मांगा गया। स्वास्थ्य विभाग के लचर रवैया ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि यहां कितना भी कानून का उल्लंघन करो यहां नाजायज को भी जायज ठहराया जा सकता है।
कैसे फर्जी डॉक्टर बनकर इलाज करने वाले डॉक्टर दानिश बच निकलता है
स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय लोगों की आंखों में धूल झोंकने वाला तथाकथित डॉक्टर दानिश हर बार कानूनी शिकंजे से बच निकलता है। चिकित्सा विभाग पर उसकी पकड़ बहुत मजबूत बताई जाती है। सूत्र बताते हैं कि अस्पताल में होने वाली मोटी कमाई का एक हिस्सा मुख्य चिकित्सा अधिकारी के ऑफिस में पहुंचा दिया जाता है। शायद इसी वजह से हर बार वह कानूनी शिकंजे से बच निकलता है और कुछ समय बाद अपना कारोबार दोबारा शुरू कर देता है।
नियमानुसार बिना पंजीयन अस्पताल चलाना पूरी तरह अवैध है। पकड़े जाने पर जुर्माना और संचालक के विरुद्ध एफ आई आर दर्द कराए जाने का प्रावधान है।
