धुमरी के एसडी पब्लिक इंटर कॉलेज के भवन पर तथ्यों को छिपाकर दो अलग अलग बोर्डों से ली गई हैं मान्यताएं, अपर सचिव ने तलब किया जवाब
एटा। जनपद के कस्बा धुमरी स्थित एसडी पब्लिक इंटर कॉलेज के एक ही भवन पर दो अलग-अलग शिक्षा बोर्डों से मान्यता लिए जाने के मामले में अब माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश ने सख्त रुख अपना लिया है। परिषद के मेरठ क्षेत्रीय कार्यालय के अपर सचिव ने जिला विद्यालय निरीक्षक एटा से पूरे प्रकरण में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट तलब की है। जिससे महकमे में खलबली मच गई है।
धुमरी स्थित एसडी पब्लिक इंटर कॉलेज के प्रबंधन पर तथ्यों को छिपाकर एक ही भवन पर दो अलग-अलग शिक्षा बोर्डों से मान्यता प्राप्त करने का आरोप है। नियमों के अनुसार, एक ही भवन और आधारभूत संसाधनों का उपयोग कर अलग-अलग बोर्डों की मान्यता लेना गंभीर अनियमितता की श्रेणी में माना जाता है। इस मामले की पहले स्थानीय स्तर पर शिकायत की गई, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों कोई ठोस कार्रवाई न कर नोटिस-नोटिस का खेल चलाते रहे। जिसके बाद इस मामले की शिकायत माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश के अधिकारियों से की गई। शिकायत पर गंभीरता दिखाते हुए मेरठ कार्यालय के अपर सचिव ने डीआईओएस एटा को पत्र जारी कर पूरे मामले की जांच, अब तक की गई कार्रवाई तथा विस्तृत आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। परिषद ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि अनियमितता की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। अपर सचिव ने कृत कार्यवाही की आख्या बोर्ड को भेजने के साथ-साथ शिकायतकर्ता को भी भेजी जाए।
सूत्रों के अनुसार, विभाग इस बात की भी पड़ताल कर रहा है कि मान्यता प्राप्त करने के दौरान प्रस्तुत किए गए अभिलेखों में कहीं तथ्य छिपाए गए या भ्रामक जानकारी तो नहीं दी गई। यदि ऐसा पाया जाता है तो संबंधित मान्यता निरस्त किए जाने के साथ-साथ जिम्मेदार व्यक्तियों पर भी कठोर कार्रवाई हो सकती है।
उधर, यूपी बोर्ड के इस कदम के बाद जिले के अन्य विद्यालयों की मान्यताओं और अभिलेखों की भी जांच की संभावना बढ़ गई है।
जब इस सम्बन्ध में जिला विद्यालय निरीक्षक डा. इंद्रजीत प्रजापति से दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की और न ही व्हाट्सएप पर प्रेषित संदेश पर कोई पक्ष प्रेषित किया।
डीईआईओएस की कार्यशैली सवालों के घेरे में!
एटा: एक ही भवन पर दोहरी मान्यता के मामले में जिला विद्यालय निरीक्षक की भूमिका शुरू से ही सवालों के घेरे में रही है। दिसंबर में हुई शिकायत पर पहले कोई कार्रवाई नहीं की, जब मामला बढ़ा, तो कॉलेज प्रबंधक को नोटिस भेजकर कर जवाब मांग लिया। फिर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। जब मामले ने पुनः तूल पकड़ा, तो मान्यता प्रत्याहरण का नोटिस भेजकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। अब तक डीईआईओएस ने उक्त प्रकरण में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की है। एक भवन पर दोहरी मान्यता को लेकर अब तक न कोई जांच कमेटी गठित हुई, और न ही कॉलेज की मान्यता निरस्त हुई है। सूत्रों का कहना है, इस पूरे मामले में डीईआईओएस की भूमिका संदिग्ध है।
