UPTET 2026 News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रश्न संख्या 36 और 37 को मूल्यांकन से बाहर करने का आदेश दिया। आयोग को अंक सुधारकर नया स्कोरकार्ड जारी करना होगा। शिक्षामित्रों की विशेष TET पर भी सुनवाई 2 नवंबर को।
- UPTET 2026 के कौन से दो प्रश्न होंगे मूल्यांकन से बाहर?
- आयोग को अंक सुधारकर नया स्कोरकार्ड जारी करने का आदेश
- कोर्ट में आयोग ने क्या दलील दी?
- प्रश्न संख्या 38 को भी आयोग ने पहले किया था मूल्यांकन से बाहर
- शिक्षामित्रों को विशेष TET में शामिल करने की मांग पर भी हाईकोर्ट सख्त
- 221 शिक्षामित्रों ने क्यों दाखिल की विशेष अपील?
- हाईकोर्ट ने आयोग से क्या जवाब मांगा?
- UPTET अभ्यर्थियों के लिए क्या है इस फैसले का मतलब?
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) 2026 को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अभ्यर्थियों के हित में महत्वपूर्ण आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने परीक्षा के मास्टर सेट में शामिल प्रश्न संख्या 36 और 37 को मूल्यांकन से बाहर करने का निर्देश दिया है। अदालत ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को प्रभावित अभ्यर्थियों के अंक दोबारा निर्धारित कर संशोधित परिणाम और नया स्कोरकार्ड जारी करने का आदेश दिया है।
न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने कानपुर नगर निवासी विजय सोनकर और तीन अन्य अभ्यर्थियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब किसी प्रश्न के दो विकल्पों को सही माना गया है, तो केवल उन अभ्यर्थियों को अंक देना उचित नहीं है जिन्होंने आयोग द्वारा स्वीकार किए गए विकल्पों में से किसी एक को चुना था। ऐसे प्रश्नों को मूल्यांकन से हटाकर सभी प्रभावित अभ्यर्थियों को समान लाभ दिया जाना चाहिए।
UPTET 2026 के कौन से दो प्रश्न होंगे मूल्यांकन से बाहर?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपीटीईटी 2026 के मास्टर सेट के प्रश्न संख्या 36 और 37 को मूल्यांकन प्रक्रिया से बाहर करने का आदेश दिया है।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, आयोग ने अंतिम उत्तर कुंजी में दोनों प्रश्नों के दो-दो विकल्पों को सही माना था। इसके बावजूद आयोग ने केवल उन्हीं अभ्यर्थियों को अंक दिए जिन्होंने स्वीकार किए गए विकल्पों में से किसी एक को चुना था।
विवादित प्रश्नों का विवरण इस प्रकार है:
- प्रश्न संख्या 36: अंतिम उत्तर कुंजी में विकल्प B और D को सही माना गया था।
- प्रश्न संख्या 37: अंतिम उत्तर कुंजी में विकल्प A और D को सही माना गया था।
अभ्यर्थियों का कहना था कि जब एक ही प्रश्न के दो उत्तर सही माने गए हैं, तो उस प्रश्न को मूल्यांकन से बाहर किया जाना चाहिए। इससे सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर मिलेगा और किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा।
आयोग को अंक सुधारकर नया स्कोरकार्ड जारी करने का आदेश
हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को निर्देश दिया है कि प्रश्न संख्या 36 और 37 को मूल्यांकन से हटाकर याचियों के प्राप्तांकों की दोबारा गणना की जाए।
इसके साथ ही आयोग को परिणाम और स्कोरकार्ड में आवश्यक संशोधन करने का आदेश दिया गया है।
इस फैसले का लाभ उन अभ्यर्थियों को मिल सकता है जिनके मूल्यांकन पर इन दोनों विवादित प्रश्नों का प्रभाव पड़ा है। हालांकि, आदेश के वास्तविक क्रियान्वयन और संशोधित स्कोरकार्ड जारी करने की प्रक्रिया आयोग की ओर से पूरी की जाएगी।
कोर्ट में आयोग ने क्या दलील दी?
सुनवाई के दौरान आयोग की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ताओं ने प्रश्नों के सही विकल्प नहीं चुने थे। आयोग ने यह भी दलील दी कि अभ्यर्थियों ने प्रोविजनल उत्तर कुंजी जारी होने के बाद निर्धारित समय में अपनी आपत्तियां दर्ज नहीं कराई थीं।
वहीं, याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि जब आयोग ने स्वयं अंतिम उत्तर कुंजी में एक प्रश्न के दो विकल्पों को सही स्वीकार किया है, तो केवल किसी एक विकल्प को चुनने वाले अभ्यर्थियों को ही अंक देना उचित नहीं है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अभ्यर्थियों के तर्क को स्वीकार करते हुए प्रश्न संख्या 36 और 37 को मूल्यांकन से बाहर करने का निर्देश दिया।
प्रश्न संख्या 38 को भी आयोग ने पहले किया था मूल्यांकन से बाहर
अदालत ने अपने आदेश में इस बात पर भी ध्यान दिया कि आयोग ने इसी परीक्षा के प्रश्न संख्या 38 को पहले ही मूल्यांकन से बाहर कर दिया था।
ऐसे में प्रश्न संख्या 36 और 37 के मामले में अलग-अलग मानदंड अपनाने का कोई तार्किक आधार नहीं बनता। अदालत के अनुसार, जब किसी प्रश्न के दो विकल्प सही पाए गए हैं, तो सभी अभ्यर्थियों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करने के लिए ऐसे प्रश्नों को मूल्यांकन से हटाना उचित है।
शिक्षामित्रों को विशेष TET में शामिल करने की मांग पर भी हाईकोर्ट सख्त
UPTET 2026 के दो प्रश्नों को लेकर दिए गए आदेश के अलावा इलाहाबाद हाईकोर्ट में शिक्षामित्रों से जुड़ा एक अन्य महत्वपूर्ण मामला भी सुनवाई के लिए आया।
विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (Special TET) में शिक्षामित्रों को शामिल करने की मांग वाली विशेष अपील पर हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग से आगामी सामान्य शिक्षक पात्रता परीक्षाओं का प्रस्तावित कार्यक्रम मांगा है।
न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने वसीम अहमद सहित 221 शिक्षामित्रों की ओर से दाखिल विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए आयोग को हलफनामे के माध्यम से परीक्षा कार्यक्रम प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
इस मामले में अगली सुनवाई 2 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है।
221 शिक्षामित्रों ने क्यों दाखिल की विशेष अपील?
याचिकाकर्ताओं ने 2 सितंबर 2026 को जारी शासनादेश और 3 सितंबर को प्रकाशित विज्ञापन को चुनौती दी है। उनका कहना है कि वे निर्धारित शैक्षणिक और प्रशिक्षण संबंधी योग्यताएं पूरी करते हैं, इसके बावजूद उन्हें विशेष टीईटी में शामिल होने का अवसर नहीं दिया जा रहा है।
शिक्षामित्रों की ओर से अदालत में दलील दी गई कि संविदा पर कार्यरत विशेष शिक्षकों को परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया जा रहा है, जबकि शिक्षामित्रों को इससे बाहर रखा गया है।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, यह अंतर संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 में दिए गए समानता और सार्वजनिक रोजगार में समान अवसर के अधिकार के विपरीत है।
उन्होंने अदालत से मांग की है कि उन्हें भी विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी जाए।
हाईकोर्ट ने आयोग से क्या जवाब मांगा?
इस मामले में हाईकोर्ट ने फिलहाल शिक्षामित्रों को विशेष टीईटी में शामिल करने की अंतिम अनुमति नहीं दी है। अदालत ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग से आगामी सामान्य टीईटी परीक्षाओं का प्रस्तावित कार्यक्रम हलफनामे पर मांगा है।
आयोग का जवाब और आगामी सुनवाई इस मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे।
2 नवंबर 2026 को होने वाली सुनवाई पर शिक्षामित्रों और शिक्षक भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों की नजर रहेगी।
UPTET अभ्यर्थियों के लिए क्या है इस फैसले का मतलब?
इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह आदेश यूपीटीईटी 2026 के मूल्यांकन को लेकर महत्वपूर्ण है। प्रश्न संख्या 36 और 37 को हटाने के बाद प्रभावित अभ्यर्थियों के अंकों में बदलाव हो सकता है।
संशोधित मूल्यांकन के बाद स्कोरकार्ड में भी परिवर्तन संभव है। ऐसे में अभ्यर्थियों को उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की आधिकारिक सूचना पर नजर रखनी चाहिए।
वहीं, विशेष टीईटी में शिक्षामित्रों को शामिल करने का मामला अभी अदालत में विचाराधीन है। इस संबंध में अंतिम निर्णय अगली सुनवाई और आयोग की ओर से दाखिल किए जाने वाले हलफनामे के बाद ही स्पष्ट होगा।
