लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) में उत्तर प्रदेश का पहला बोन एवं टिश्यू बैंक शुरू हो गया है। यह सुविधा सड़क दुर्घटना, कैंसर, गंभीर संक्रमण और जटिल हड्डी रोगों के मरीजों के इलाज में मील का पत्थर साबित होगी।
लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए उत्तर प्रदेश का पहला बोन एवं टिश्यू बैंक शुरू कर दिया है। इस अत्याधुनिक सुविधा के शुरू होने से सड़क दुर्घटनाओं, कैंसर, गंभीर संक्रमण, जन्मजात हड्डी संबंधी विकारों और जटिल ऑर्थोपेडिक बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को समय पर और बेहतर इलाज उपलब्ध हो सकेगा।
अब मरीजों को हड्डी और अन्य आवश्यक टिश्यू की उपलब्धता के लिए दूसरे राज्यों या महंगे निजी अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ेगा। यह सुविधा प्रदेश में हड्डी प्रत्यारोपण और जटिल सर्जरी के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लेकर आएगी।
कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने किया शुभारंभ
हड्डी रोग विभाग में आयोजित कार्यक्रम के दौरान केजीएमयू की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने बोन एवं टिश्यू बैंक का विधिवत उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि यह सुविधा प्रदेश के मरीजों के लिए आधुनिक चिकित्सा सेवाओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और इससे इलाज की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा।
एक करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुई सुविधा
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, इस अत्याधुनिक बोन एवं टिश्यू बैंक को स्थापित करने में लगभग एक करोड़ रुपये की लागत आई है। बैंक में आधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उपकरण लगाए गए हैं, जिससे हड्डियों और अन्य ऊतकों (टिश्यू) को सुरक्षित और लंबे समय तक संरक्षित रखा जा सकेगा।
कैसे काम करेगा बोन एवं टिश्यू बैंक?
प्रो. सोनिया नित्यानंद ने बताया कि इस बैंक में दानदाताओं से प्राप्त हड्डियों और अन्य आवश्यक टिश्यू को वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत सुरक्षित रखा जाएगा। विशेष तकनीकों की मदद से इन ऊतकों को संरक्षित किया जाएगा ताकि आवश्यकता पड़ने पर इन्हें विभिन्न प्रकार की सर्जरी और प्रत्यारोपण में इस्तेमाल किया जा सके।
इस प्रक्रिया से मरीजों को समय पर उपयुक्त बोन ग्राफ्ट उपलब्ध होगा और इलाज में अनावश्यक देरी नहीं होगी।
किन मरीजों को मिलेगा सबसे अधिक लाभ?
बोन एवं टिश्यू बैंक शुरू होने से विशेष रूप से निम्न मरीजों को फायदा मिलेगा—
- सड़क दुर्घटना में हड्डी क्षतिग्रस्त होने वाले मरीज
- बोन कैंसर और अन्य कैंसर रोगी
- गंभीर संक्रमण से प्रभावित मरीज
- जन्मजात हड्डी संबंधी विकार वाले बच्चे
- जटिल ऑर्थोपेडिक सर्जरी कराने वाले मरीज
- बड़े बोन डिफेक्ट या फ्रैक्चर वाले रोगी
मरीजों की रिकवरी होगी बेहतर
विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर बोन ग्राफ्ट उपलब्ध होने से मरीजों की रिकवरी पहले की तुलना में अधिक तेज और प्रभावी होगी। कई मामलों में बार-बार सर्जरी की आवश्यकता कम हो सकती है, जिससे इलाज का समय और खर्च दोनों घटेंगे।
इसके अलावा, हड्डी प्रत्यारोपण की सफलता दर बढ़ने और मरीजों की जीवन गुणवत्ता में सुधार की भी उम्मीद है।
प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी नई दिशा
केजीएमयू में स्थापित यह बोन एवं टिश्यू बैंक उत्तर प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इससे न केवल राजधानी लखनऊ बल्कि पूरे प्रदेश के मरीजों को आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मिलेगा। भविष्य में यह केंद्र मेडिकल शिक्षा, शोध और उन्नत ऑर्थोपेडिक उपचार के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
