आगरा। यमुना किनारे रविवार की शाम चिंता और चेतावनी के स्वर के साथ बीती। यमुना आरती स्थल पर रिवर कनेक्ट कैंपेन की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई, जिसमें नदी के बिगड़ते हालात, आगामी ग्रीष्मकालीन जल संकट और पर्यावरणीय चुनौतियों पर गंभीर मंथन किया गया।
बैठक में सर्वसम्मति से उत्तर प्रदेश सरकार से आगरा में लंबे समय से लंबित यमुना बैराज निर्माण कार्य को शीघ्र शुरू करने की मांग उठाई गई। सदस्यों ने कहा कि बैराज निर्माण में देरी अब नदी के अस्तित्व पर सीधा खतरा बन चुकी है। हर गर्मी में सूखती यमुना एक भयावह संकेत है।
कैंपेन के संयोजक बृज खंडेलवाल ने ग्रीष्मकाल में विशेष सफाई अभियान चलाने पर जोर देते हुए कहा कि समय रहते यमुना की तलहटी और प्रवाह क्षेत्र की सफाई नहीं हुई तो हालात और विकट हो जाएंगे। उन्होंने प्रशासन से पोइया घाट से ताजमहल तक नदी की तलहटी को खुरचकर साफ कराने की मांग की, ताकि वर्षा जल का अधिकतम संचयन हो सके और भूजल स्तर में सुधार आए।
बैठक में यह भी मांग की गई कि यमुना में गिरने वाले नालों को तत्काल टैप या डायवर्ट किया जाए, जिससे प्रदूषित जल सीधे नदी में न पहुंचे। साथ ही, नदी क्षेत्र में हो रहे अनधिकृत निर्माणों को हटाने की भी आवश्यकता जताई गई, ताकि प्राकृतिक प्रवाह बाधित न हो।
हाल ही में हुई मथुरा बोट त्रासदी पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। साथ ही गोकुल बैराज की नियमित सफाई और तलीझाड़ कार्य सुनिश्चित करने की मांग की गई, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
एत्मादपुर तहसील में प्रस्तावित 10 नई टाउनशिप्स को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई। सदस्यों ने चेतावनी दी कि यदि इन परियोजनाओं को यमुना के डूब क्षेत्र से बाहर स्थापित नहीं किया गया, तो यह भविष्य में बड़े पर्यावरणीय संकट का कारण बनेंगी।
बैठक में बृज खंडेलवाल, डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य, चतुर्भुज तिवारी, पद्मिनी अय्यर, गोस्वामी नंदन श्रोतरीय, मुकेश चौधरी, दीपक राजपूत, पंडित जुगल किशोर, राहुल, निधि, ज्योति, विशाल, दिनेश, जगन प्रसाद तेहरिया और अभिनव लाला सहित कई सदस्यों ने प्रस्तावों का समर्थन किया।
अंत में एक स्वर में कहा गया—
“यमुना सिर्फ एक नदी नहीं, हमारी जीवन रेखा है। यदि अब भी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी।”
