जैथरा,एटा। नवनियुक्त भाजपा जिला अध्यक्ष प्रमोद गुप्ता के अभिनंदन को लेकर नगर पंचायत जैथरा में जो तस्वीर पहले से खींची गई थी, वह कार्यक्रम के दिन नजर नहीं आई। पूरे नगर में लगे बड़े – बड़े होर्डिंग्स और प्रचार से यह संदेश दिया गया कि समारोह यादगार होगा, लेकिन आयोजन के समय वास्तविकता कुछ और ही सामने आई। सीमित संख्या में लोग पहुंच सके, जिससे कार्यक्रम की चमक फीकी पड़ गई।
कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए नगर पंचायत अध्यक्ष की ओर से दिन भर संपर्क साधा गया। लोगों को फोन कर बुलाया गया, आग्रह किए गए, लेकिन नगरवासियों की उपस्थिति उम्मीद के अनुरूप नहीं रही। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा रही कि नगर पंचायत अध्यक्ष की कार्यशैली को लेकर लोगों में पहले से ही नाराजगी है, जिसका असर इस आयोजन में भी दिखा। बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम स्थल से दूरी बनाए रहे।
होर्डिंग्स और बैनरों से सजा नगर बड़े आयोजन का आभास करा रहा था, लेकिन कहानी कुछ और ही नजर आईं। आयोजन स्थल पर मौजूद लोग भी आपस में इसी बात की चर्चा करते दिखे कि तैयारियों और लोगों की उपस्थिति के बीच गहरा अंतर साफ नजर आया।
नगर पंचायत अध्यक्ष और उनके भाइयों की ओर से दिनभर लोगों से संपर्क साधा गया। एक-एक व्यक्ति को कई-कई बार कॉल की गईं, तब जाकर बमुश्किल हॉल की कुर्सियां भर सकीं। इस कार्यक्रम को लेकर नगर में दिनभर चर्चा रही। नगर में वैश्य समाज की अधिक संख्या होने के बावजूद भी कार्यक्रम में इस समाज के लोगों की कम उपस्थिति ने लोगों के जेहन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यह स्थिति तब है, जब नगर पंचायत अध्यक्ष की सीट वैश्य समाज के खाते में है। नगर में यह भी चर्चा चल रही है कि आगुन्तक अतिथियों के साथ भी लोग आए थे। ग्रामीण अंचल से भी लोगों की उपस्थिति थी, ऐसे में नगर के कार्यक्रम में नगर के लोगों की कम उपस्थिति कहीं न कहीं भाजपा संगठन के लिए चिंता का विषय है। लोग इसे नगर पंचायत अध्यक्ष के गिरते जनाधार के रूप में देख रहे हैं। इस कार्यक्रम के मुख्य आयोजक नगर पंचायत अध्यक्ष ही थे, जो स्वयं वैश्य समाज से ताल्लुक रखते हैं। आगामी 2027 में विधानसभा चुनाव है औऱ इस तरह का गिरता जनाधार भाजपा के लिए कमजोर कड़ी साबित हो सकता है। नगर में इस कार्यक्रम की भव्यता की जगह, फ़्लॉप शो के अधिक चर्चे हो रहे हैं। कार्यक्रम में 1000 से 1500 तक लोगों के आने का अनुमान था, किंतु यह आंकड़ा करीब 150 लोगों तक ही सिमट गया।
यह अभिनंदन समारोह अपेक्षाओं के अनुरूप प्रभाव नहीं छोड़ सका। आयोजन ने यह संकेत जरूर दे दिया कि केवल प्रचार के दम पर जनविश्वास पैदा नहीं किया जा सकता। जैथरा में हुआ यह कार्यक्रम अब राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का विषय बना हुआ है।
