झाँसी, सुल्तान आब्दी: ईदगाह के पीछे स्थित हज़रत सैय्यद निजामुल हक क़लंदर बाबा का 86वां उर्स मुबारक इस वर्ष भी बड़ी श्रद्धा और धूमधाम के साथ मनाया गया। बाबा के हजारों अकीदतमंदों ने इस पाक मौके पर बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी आस्था का इज़हार किया। उर्स के दौरान विशाल लंगर का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों लोगों को बैठाकर तबर्रुक (पवित्र भोजन) खिलाया गया और तकसीम किया गया।
दरगाह के खादिम पीरे तरीक़ात हज़रत कादिर ख़ान ओवैसी ने बताया कि हर साल की तरह इस साल भी उर्स मुबारक को बड़े ही शान-ओ-शौकत के साथ मनाया गया। उर्स की रस्मों की शुरुआत सुबह दरगाह पर कुरान खानी और गुसल की रस्म अदायगी के साथ हुई। इसके बाद महफिले शमा का आयोजन किया गया, जिसमें सूफियाना अंदाज में कव्वालियों की शानदार प्रस्तुति हुई।
कव्वालों ने हज़रत सैय्यद निजामुल हक क़लंदर बाबा की शान में एक से बढ़कर एक कलाम (सूफी कविताएं) पेश किए, जिसे सुनकर बाबा के मुरीद (अनुयायी) झूम उठे। कव्वालियों की मधुर धुनों और भक्तिमय माहौल ने सभी को भावविभोर कर दिया।
देर शाम को कुल शरीफ और फातिहा खानी की रस्म अदा की गई, जिसमें देश में अमन, शांति और भाईचारे के लिए विशेष दुआएं की गईं। सभी ने मिलकर मुल्क की तरक्की और आपसी सद्भाव के लिए प्रार्थना की।
इस उर्स मुबारक के सफल आयोजन में खादिम क़ादिर ख़ान ओवैसी, सुबहान ख़ान ओवैसी, अज़हर ख़ान ओवैसी, साहिल मंसूरी, आमिर खान, सोहिब खान ओवैसी, जैद ख़ान ओवैसी, नदीम रज़ा मदारी आदि प्रमुख रूप से शामिल रहे, जिन्होंने अपनी सक्रिय भागीदारी से उर्स को यादगार बनाया।
हज़रत सैय्यद निजामुल हक क़लंदर बाबा का उर्स मुबारक हर साल झाँसी में सांप्रदायिक सौहार्द और एकता का प्रतीक बनता है, जिसमें सभी धर्मों के लोग मिलकर बाबा के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। इस वर्ष भी यह उर्स शांति और भाईचारे का संदेश देता हुआ संपन्न हुआ।
