Indian Railways News: वंदे भारत और अमृत भारत स्टेशन योजना के बीच CAG रिपोर्ट में 458 रेलवे स्टेशनों पर बुनियादी सुविधाओं की कमी मिली। जानिए सफाई, पानी और ट्रेनों की समयबद्धता का हाल।
- अमृत भारत स्टेशन योजना से बदल रही रेलवे स्टेशनों की तस्वीर
- वंदे भारत की बढ़ती लोकप्रियता, यात्रियों की संख्या में 34 प्रतिशत उछाल
- CAG की रिपोर्ट में खुली बुनियादी सुविधाओं की पोल, 512 में से 458 स्टेशनों पर मिलीं कमियां
- ट्रेनों के शौचालय और सफाई व्यवस्था से भी यात्री परेशान
- ट्रेनों की समयबद्धता में सुधार, लेकिन देरी की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं
- नई दिल्ली रेलवे स्टेशन भगदड़ के बाद भीड़ प्रबंधन पर बढ़ा जोर
- यात्री सुविधाओं पर हजारों करोड़ का बजट, खर्च के बाद भी सुधार की जरूरत
- रेलवे के आधुनिकीकरण की असली परीक्षा आम यात्री का अनुभव
Indian Railways News: भारतीय रेलवे में इन दिनों आधुनिकीकरण की रफ्तार तेज है। कहीं वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनें दौड़ रही हैं तो कहीं रेलवे स्टेशनों को एयरपोर्ट की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत देशभर के स्टेशनों का कायाकल्प किया जा रहा है। रेलवे के बुनियादी ढांचे पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। लेकिन इन तमाम बदलावों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या आम यात्रियों का सफर भी पहले से बेहतर हुआ है?
दरअसल, रेलवे की चमकती इमारतों और आधुनिक ट्रेनों के बीच आम यात्रियों की रोजमर्रा की परेशानियां अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। स्टेशनों पर साफ शौचालय, पीने का स्वच्छ पानी, बैठने की पर्याप्त व्यवस्था, ट्रेनों में सफाई और समय पर गाड़ियों का संचालन यात्रियों की सबसे बड़ी जरूरतें हैं। नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की ऑडिट रिपोर्ट में भी रेलवे की बुनियादी यात्री सुविधाओं और रखरखाव से जुड़ी कई कमियां सामने आई हैं।
ऐसे में रेलवे के आधुनिकीकरण की असली सफलता का आकलन केवल नई ट्रेनों और खूबसूरत स्टेशनों से नहीं, बल्कि आम यात्री को मिलने वाली सुविधाओं से भी करना जरूरी है।
अमृत भारत स्टेशन योजना से बदल रही रेलवे स्टेशनों की तस्वीर
भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण में अमृत भारत स्टेशन योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। रेल मंत्रालय के मुताबिक, दिसंबर 2025 तक इस योजना के तहत देशभर के 1337 रेलवे स्टेशनों को पुनर्विकास के लिए चिह्नित किया गया था। इनमें से 155 स्टेशनों पर काम पूरा हो चुका था।
योजना के तहत स्टेशन भवनों का नवीनीकरण, आधुनिक वेटिंग हॉल, बेहतर शौचालय, बैठने की व्यवस्था, पीने के पानी की सुविधा और यात्रियों के लिए बेहतर सूचना प्रणाली विकसित की जा रही है।
इसके अलावा यात्रियों की सुविधा के लिए फुट ओवरब्रिज, लिफ्ट और एस्केलेटर जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। दिव्यांग यात्रियों के लिए सुगम आवागमन, स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए वन स्टेशन वन प्रोडक्ट स्टॉल और रेलवे स्टेशनों को शहर के दूसरे सार्वजनिक परिवहन साधनों से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है।
हालांकि, रेलवे स्टेशनों पर ट्रेनों और यात्रियों की लगातार आवाजाही के बीच निर्माण कार्य पूरा करना आसान नहीं है। इस दौरान मौजूदा सुविधाओं को चालू रखना और उनकी नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित करना भी बड़ी चुनौती है।
वंदे भारत की बढ़ती लोकप्रियता, यात्रियों की संख्या में 34 प्रतिशत उछाल
भारतीय रेलवे की आधुनिक छवि में वंदे भारत एक्सप्रेस सबसे प्रमुख चेहरा बनकर सामने आई है। तेज रफ्तार, आधुनिक कोच, आरामदायक सीटें और बेहतर यात्री सुविधाओं के कारण इस ट्रेन को यात्रियों का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है।
रेल मंत्रालय के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024-25 में वंदे भारत एक्सप्रेस से करीब 2.97 करोड़ यात्रियों ने सफर किया था। वहीं, वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर लगभग 3.98 करोड़ हो गई। इस तरह यात्रियों की संख्या में करीब 34 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
जनवरी 2026 में शुरू हुई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन ने भी शुरुआती तीन महीनों में लगभग 1.21 लाख यात्रियों को सफर कराया। इस दौरान सीटों की बुकिंग 100 प्रतिशत से अधिक रहने की जानकारी दी गई।
रेलवे की ओर से वंदे भारत और अमृत भारत जैसी आधुनिक ट्रेनों के माध्यम से यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने की कोशिश की जा रही है। लेकिन रेलवे के जानकारों का मानना है कि प्रीमियम ट्रेनों की लोकप्रियता को पूरे रेलवे नेटवर्क की प्रगति का एकमात्र पैमाना नहीं माना जा सकता।
देश में बड़ी संख्या में यात्री आज भी स्लीपर और जनरल कोच में सफर करते हैं। इनके लिए ट्रेन में पर्याप्त पानी, साफ शौचालय, बैठने की जगह और सुरक्षित यात्रा जैसी बुनियादी सुविधाएं सबसे ज्यादा मायने रखती हैं।
CAG की रिपोर्ट में खुली बुनियादी सुविधाओं की पोल, 512 में से 458 स्टेशनों पर मिलीं कमियां
रेलवे की बुनियादी सुविधाओं को लेकर नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण कमियां सामने आई हैं।
संसद में पेश ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, नॉन-सबअर्बन श्रेणी के 512 रेलवे स्टेशनों की जांच की गई थी। इनमें से 458 स्टेशनों पर बुनियादी यात्री सुविधाओं में कमियां पाई गईं।
इन कमियों में मुख्य रूप से शौचालयों की खराब स्थिति, यूरिनल की समस्याएं और पीने के पानी की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होना शामिल था।
रिपोर्ट में सबसे गंभीर बात पानी की गुणवत्ता को लेकर सामने आई। जांच के दौरान आठ स्थानों पर वाटर कूलर से लिए गए पानी के नमूनों में ई-कोलाई बैक्टीरिया पाया गया।
ई-कोलाई बैक्टीरिया की मौजूदगी पानी के दूषित होने का संकेत हो सकती है। ऐसे में रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को उपलब्ध कराए जाने वाले पेयजल की गुणवत्ता और नियमित जांच को लेकर सवाल उठते हैं।
यह स्थिति बताती है कि स्टेशन का आधुनिकीकरण केवल भवन और यात्री सुविधाओं के निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि पानी की गुणवत्ता और स्वच्छता की नियमित निगरानी भी जरूरी है।
ट्रेनों के शौचालय और सफाई व्यवस्था से भी यात्री परेशान
रेलवे में साफ-सफाई की समस्या केवल स्टेशनों तक सीमित नहीं है। लंबी दूरी की ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों को भी कई बार गंदे शौचालय, पानी की कमी और खराब हाउसकीपिंग व्यवस्था का सामना करना पड़ता है।
CAG के एक सर्वे में वर्ष 2018-19 से 2022-23 के बीच लंबी दूरी की 96 ट्रेनों में सफर करने वाले 2,426 यात्रियों की प्रतिक्रियाएं शामिल की गई थीं।
सर्वे में सामने आई प्रमुख बातें इस प्रकार थीं:
- 40 प्रतिशत से अधिक यात्री ट्रेनों के शौचालयों की सफाई से असंतुष्ट थे।
- आधे से ज्यादा यात्रियों ने ऑनबोर्ड हाउसकीपिंग सेवाओं पर नाराजगी जताई।
- करीब 15 प्रतिशत यात्रियों ने शौचालयों या वॉशबेसिन में पानी नहीं होने की शिकायत की।
- वर्ष 2022-23 में रेल मदद पोर्टल पर ट्रेनों में पानी की कमी से संबंधित एक लाख से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, बायो-टॉयलेट की शुरुआत से ट्रेनों में स्वच्छता सुधारने की दिशा में काम हुआ है। हालांकि, इन शौचालयों का सही रखरखाव और यात्रियों में इनके इस्तेमाल को लेकर जागरूकता बढ़ाना अब भी चुनौती बना हुआ है।
रेलवे की ओर से यह भी बताया गया है कि करीब 89 प्रतिशत शिकायतों का निर्धारित समय में निपटारा किया जाता है। लेकिन यात्रियों का मानना है कि शिकायतों के समाधान के साथ-साथ ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे उन्हें बार-बार शिकायत दर्ज कराने की जरूरत ही न पड़े।
ट्रेनों की समयबद्धता में सुधार, लेकिन देरी की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं
भारतीय रेलवे के सामने ट्रेनों को समय पर चलाना भी एक बड़ी चुनौती है। यात्रियों के लिए ट्रेन का समय पर पहुंचना उतना ही जरूरी है, जितना कि ट्रेन में सफाई और दूसरी सुविधाएं मिलना।
रेल मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023-24 में ट्रेनों की समयबद्धता 73.62 प्रतिशत थी। वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 77.12 प्रतिशत हो गई। फरवरी 2026 तक यह आंकड़ा 77.24 प्रतिशत दर्ज किया गया।
इन आंकड़ों से समयबद्धता में सुधार के संकेत मिलते हैं, लेकिन अभी भी सभी ट्रेनों का निर्धारित समय पर संचालन सुनिश्चित करना रेलवे के लिए चुनौती बना हुआ है।
ट्रेनों की देरी का असर विशेष रूप से उन यात्रियों पर पड़ता है, जिन्हें आगे दूसरी ट्रेन पकड़नी होती है या नौकरी, परीक्षा और अन्य जरूरी कामों के लिए समय पर पहुंचना होता है।
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन भगदड़ के बाद भीड़ प्रबंधन पर बढ़ा जोर
रेलवे के लिए यात्रियों की सुरक्षा भी आधुनिकीकरण का अहम हिस्सा है। फरवरी 2025 में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुई भगदड़ में 18 लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद रेलवे स्टेशनों पर भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठे थे।
इसके बाद रेलवे ने प्रमुख स्टेशनों पर यात्रियों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त इंतजाम करने की दिशा में कदम उठाए।
मार्च 2026 में रेलवे ने 76 चुनिंदा स्टेशनों पर स्थायी वेटिंग और होल्डिंग एरिया विकसित करने की योजना बनाई। इसके तहत चौड़े फुट ओवरब्रिज, ऑटोमैटिक निगरानी व्यवस्था और प्रवेश नियंत्रण जैसे उपायों पर ध्यान दिया जा रहा है।
इसके अलावा त्योहारों और छुट्टियों के दौरान बड़े शहरों के मुख्य रेलवे स्टेशनों पर भीड़ का दबाव कम करने के लिए सैटेलाइट स्टेशनों को विकसित किया जा रहा है। यात्रियों की मांग के अनुसार अधिक क्षमता वाली ट्रेनों का संचालन भी इसी रणनीति का हिस्सा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, रेलवे स्टेशनों पर भीड़ प्रबंधन के लिए केवल अतिरिक्त ट्रेनें चलाना पर्याप्त नहीं है। प्रवेश और निकास मार्गों की व्यवस्था, प्लेटफॉर्म पर यात्रियों की आवाजाही और आपातकालीन निकासी की सुविधा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
यात्री सुविधाओं पर हजारों करोड़ का बजट, खर्च के बाद भी सुधार की जरूरत
रेलवे के आधुनिकीकरण के लिए सरकार की ओर से यात्री सुविधाओं पर बड़ा बजट आवंटित किया जा रहा है।
वर्ष 2025-26 के लिए यात्री सुविधाओं के मद में 12,118 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2025 तक इसमें से 7,253 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके थे।
इस बजट का उद्देश्य रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में यात्रियों के लिए सुविधाओं का विस्तार करना और मौजूदा व्यवस्थाओं को बेहतर बनाना है।
हालांकि, केवल बजट आवंटित करना या निर्माण कार्य पूरा करना पर्याप्त नहीं है। जरूरी यह भी है कि तैयार की गई सुविधाएं लंबे समय तक बेहतर स्थिति में बनी रहें।
उदाहरण के तौर पर, स्टेशन पर लिफ्ट लगाना महत्वपूर्ण है, लेकिन उसका लगातार चालू रहना भी जरूरी है। इसी तरह शौचालयों का निर्माण करने के साथ उनकी नियमित सफाई, वाटर कूलर लगाने के साथ पानी की गुणवत्ता की जांच और वेटिंग हॉल बनाने के साथ वहां पर्याप्त बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
रेलवे के आधुनिकीकरण की असली परीक्षा आम यात्री का अनुभव
भारतीय रेलवे में हो रहे बदलाव देश के परिवहन बुनियादी ढांचे के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। आधुनिक ट्रेनें, पुनर्विकसित स्टेशन और बेहतर रेल नेटवर्क यात्रियों के लिए नए अवसर पैदा कर रहे हैं।
लेकिन रेलवे की वास्तविक सफलता का आकलन उस आम यात्री के अनुभव से होना चाहिए, जो रोजाना जनरल या स्लीपर कोच में सफर करता है और जिसे स्टेशन पर साफ शौचालय, पीने का सुरक्षित पानी और समय पर ट्रेन मिलने की उम्मीद रहती है।
आधुनिकीकरण का मतलब केवल स्टेशन की खूबसूरत इमारत, चमकदार फर्श और आधुनिक ट्रेनें नहीं होना चाहिए। इसका असली अर्थ है कि हर वर्ग के यात्री को सुरक्षित, स्वच्छ और सुविधाजनक सफर मिले।
आखिरकार रेलवे की तरक्की का सबसे बड़ा पैमाना यही होगा कि यात्री स्टेशन पर पहुंचने से लेकर अपनी मंजिल तक कितनी आसानी, सुरक्षा और सुविधा के साथ सफर कर पाता है।
नई ट्रेनें और आधुनिक स्टेशन रेलवे की बदलती तस्वीर जरूर दिखाते हैं, लेकिन आम यात्री का भरोसा तभी मजबूत होगा, जब उसे हर सफर में साफ-सफाई, सुरक्षित पानी, बेहतर रखरखाव और समयबद्ध सेवा मिलेगी।
