जानिए सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो (Gitanjali J Angmo) के बारे में। पंजाबी परिवार में जन्मी गीतांजलि की शिक्षा, डेनमार्क में उनका कॉर्पोरेट करियर, HIAL की सह-संस्थापक के रूप में उनका योगदान और वर्तमान आंदोलन में उनकी भूमिका पर एक विस्तृत रिपोर्ट।
नई दिल्ली। जंतर-मंतर से दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद, लद्दाख के प्रसिद्ध एक्टिविस्ट और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं। NEET पेपर लीक मामले और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ उनकी भूख हड़ताल पिछले तीन हफ्तों से जारी है। इस बीच, आंदोलन को कमजोर होने से बचाने के लिए इसकी कमान अब उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो (Gitanjali J Angmo) ने संभाल ली है।
गीतांजलि ने साफ कहा है कि अगर सोनम वांगचुक अस्पताल से डिस्चार्ज होकर सोमवार को होने वाले संसद मार्च में शामिल नहीं हो पाते हैं, तो वह खुद इस आंदोलन का नेतृत्व करेंगी और संसद तक मार्च का प्रतिनिधित्व करेंगी।
कौन हैं गीतांजलि जे. आंग्मो? (Who is Gitanjali J Angmo)
गीतांजलि जे. आंग्मो केवल सोनम वांगचुक की जीवनसंगिनी ही नहीं हैं, बल्कि वे खुद एक जानी-मानी सोशल एंटरप्रेन्योर (सामाजिक उद्यमी) और शिक्षाविद हैं। वह लद्दाख के विकास और वहां की शिक्षा व्यवस्था को बदलने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
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HIAL की सह-संस्थापक और CEO: गीतांजलि को हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स, लद्दाख (HIAL) की सह-संस्थापक के रूप में जाना जाता है, जिसे उन्होंने 2017 में सोनम वांगचुक के साथ मिलकर शुरू किया था। वर्तमान में वह इस संस्थान की संस्थापक सीईओ और डीन हैं।
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सस्टेनेबल इनोवेशन: HIAL पहाड़ी और ठंडे इलाकों के व्यावहारिक विकास के लिए काम करता है। गीतांजलि के नेतृत्व में इस संस्थान ने पूरी तरह से सोलर-हीटेड (सौर-ऊर्जा से गर्म होने वाली) इमारतें और एक ग्रीन कैंपस तैयार किया है। साल 2021 में इस संस्थान ने भारतीय सेना के जवानों के लिए विशेष सोलर-हीटेड टेंट भी विकसित किए थे, जिसने खूब सुर्खियां बटोरी थीं।
ओडिशा में जन्म और डेनमार्क का सफर
गीतांजलि का जन्म ओडिशा के बालासोर में एक पंजाबी परिवार (पंजाबी-जैन पृष्ठभूमि) में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के बाद फकीर मोहन यूनिवर्सिटी से फिजिक्स (भौतिकी) में ग्रेजुएशन पूरा किया। इसके बाद उन्होंने भुवनेश्वर के प्रतिष्ठित जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (XIMB) से मार्केटिंग और फाइनेंस में MBA की डिग्री हासिल की।
मैनेजमेंट की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कॉर्पोरेट जगत में कदम रखा। उन्होंने कॉर्पोरेट सेक्टर में लगभग 15 साल बिताए, जिसका एक बड़ा हिस्सा उन्होंने डेनमार्क में काम करते हुए गुजारा। हालांकि, विदेश में एक शानदार और आरामदायक करियर होने के बावजूद, वह भारत वापस लौट आईं ताकि समाज के लिए कुछ बड़ा और सार्थक कर सकें। भारत लौटने के बाद उन्होंने ‘पुशन’ और ‘हेलियोस बुक्स’ जैसे अपने कई बिजनेस और स्टार्टअप्स भी शुरू किए।
बहुमुखी प्रतिभा की धनी: ब्लैक बेल्ट से लेकर बैले डांसर तक
गीतांजलि जे. आंग्मो की प्रोफाइल बेहद प्रभावशाली और बहुमुखी (Multitalented) है:
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मार्शल आर्ट्स और डांस: वह कराटे में ब्लैक बेल्ट धारक हैं और साल 2009 में अमेरिका में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप भी जीत चुकी हैं। इसके साथ ही वह एक प्रशिक्षित ओडिसी और रशियन बैले डांसर भी हैं।
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अकादमिक और राष्ट्रीय सम्मान: वह ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से चेवनिंग फेलो (Chevening Scholar) रह चुकी हैं। शिक्षा और सामुदायिक विकास में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए भारत सरकार के नीति आयोग द्वारा उन्हें ‘वीमेन ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया’ (Women Transforming India Award) से भी नवाजा जा चुका है।
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आध्यात्मिक जुड़ाव: अपने लिंक्डइन बायो में वह खुद को एक “आध्यात्मिक साधक” (Spiritual Seeker) और श्री अरविंदो के दर्शन, वेदों तथा उपनिषदों की शिक्षिका/छात्रा बताती हैं।
संकट के समय बनीं वांगचुक की सबसे बड़ी ढाल
यह पहली बार नहीं है जब गीतांजलि सार्वजनिक रूप से अपने पति के आंदोलन को संभाल रही हैं। पिछले साल जब लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची (6th Schedule) में शामिल करने की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों के दौरान सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था, तब भी गीतांजलि उनकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी थीं।
उन्होंने वांगचुक की लंबी हिरासत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी और राष्ट्रपति को भी पत्र लिखा था। करीब 170 दिनों की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद जब वांगचुक रिहा हुए, तो गीतांजलि ने सोशल मीडिया पर अपने हर हफ्ते जोधपुर जेल जाने और सिर्फ 60 मिनट की मुलाकात के लिए किए गए लंबे संघर्ष के दर्द को बयां किया था।
कैसी हुई थी मुलाकात?
सोनम वांगचुक की गीतांजलि से यह दूसरी शादी है (उनकी पहली पत्नी अमेरिकी नागरिक रेबेका नॉर्मन थीं)। गीतांजलि और सोनम की मुलाकात एक एजुकेशन कॉन्फ्रेंस में हुई थी, जहां दोनों के विचार और शिक्षा को लेकर दृष्टिकोण पूरी तरह मिल गए और उन्होंने जीवन भर के लिए एक-दूसरे का हाथ थाम लिया।
वर्तमान में, सफदरजंग अस्पताल प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाते हुए गीतांजलि पूरी मुस्तैदी के साथ मोर्चे पर डटी हुई हैं। पति की अनुपस्थिति में भी वह युवाओं और प्रदर्शनकारियों का हौसला बढ़ा रही हैं।
सोनम वांगचुक की अस्पताल में स्थिति और उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो के बयानों को विस्तार से समझने के लिए आप यह वीडियो देख सकते हैं: सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि का बयान जो इस पूरे घटनाक्रम और उनके संघर्ष की गहराइयों को बखूबी दर्शाता है।
