नई दिल्ली: मौजूदा वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य में भारत का दबदबा तेजी से बढ़ रहा है। एक तरफ जहाँ भारत और रूस की पारंपरिक दोस्ती मजबूत हो रही है, वहीं अब यूक्रेन भी भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा है जब भारत अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ और व्यापारिक दबाव का मजबूती से सामना कर रहा है।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ ही, अब यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोदिमीर जेलेंस्की के भी भारत दौरे का संकेत मिला है, जो वैश्विक मंच पर भारत की तटस्थ और संतुलित विदेश नीति की बड़ी जीत है।
जेलेंस्की को पीएम मोदी ने दिया न्योता
शनिवार को भारत और यूक्रेन के रिश्तों में गर्माहट साफ दिखी। दिल्ली की प्रतिष्ठित कुतुब मीनार को यूक्रेन के स्वतंत्रता दिवस की पूर्वसंध्या पर यूक्रेनी झंडे के रंगों से रोशन किया गया। भारत में यूक्रेन के राजदूत ऑलेक्जेंडर पोलिशचुक ने इस दौरान एक बड़ा संकेत दिया।
राजदूत ने पुष्टि की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोदिमीर जेलेंस्की को भारत आने का न्योता दिया है। दोनों पक्ष फिलहाल जेलेंस्की के भारत दौरे की तारीख तय करने पर काम कर रहे हैं। राजदूत ने जोर देकर कहा कि राष्ट्रपति जेलेंस्की का भारत आना दोनों देशों के रिश्तों के लिए बड़ी उपलब्धि होगी, और भविष्य की रणनीतिक साझेदारी की दिशा में काम तेजी से आगे बढ़ रहा है।
साल के अंत में पुतिन भी करेंगे भारत दौरा
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे को लेकर भी चर्चा तेज है। कुछ हफ्तों पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने पुतिन के इस साल के अंत में भारत आने की पुष्टि की थी। रूसी न्यूज एजेंसी इंटरफैक्स ने भी अपनी रिपोर्ट में पुतिन का भारत दौरा 2025 के अंत में होने की जानकारी दी है।
पुतिन का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार और टैरिफ को लेकर तनाव गहरा गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने को लेकर नाराजगी जताते हुए भारत पर टैरिफ 50% तक बढ़ा दिया है। भारत ने ट्रंप की इस कार्रवाई को ‘तर्कहीन’ और अनुचित बताया है।
‘पीछे नहीं हटेगा भारत’: अमेरिका को जयशंकर का दो टूक जवाब
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस व्यापारिक दबाव पर भारत का रुख स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने शनिवार को साफ कहा कि भारत-अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौते पर बातचीत में भारत अपनी शर्तों से पीछे नहीं हटेगा।
जयशंकर ने दो टूक कहा कि सरकार किसानों और छोटे उत्पादकों के हितों की रक्षा के लिए किसी भी कीमत पर खड़ी रहेगी और किसी भी तरह का समझौता उनके नुकसान पर नहीं होगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में भारत-अमेरिका संबंधों के सामने तीन बड़ी चुनौतियां हैं:
- व्यापार और टैरिफ का मुद्दा।
- रूस से कच्चे तेल की खरीद।
- पाकिस्तान से जुड़े मामलों पर वाशिंगटन का दखल।
जयशंकर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति की शैली को बिल्कुल अलग बताया। उन्होंने कहा, ‘दुनिया ने ऐसा कोई अमेरिकी राष्ट्रपति पहले नहीं देखा, जो इतनी खुलकर और सार्वजनिक रूप से विदेश नीति चलाता हो।’ भारत का संतुलित राजनयिक कदम यह साफ करता है कि देश अब किसी एक खेमे के दबाव में नहीं आने वाला है।
