भारत की पहली स्वदेशी B28 बुलेट ट्रेन का स्क्वीज टेस्ट अंतिम चरण में है। जानें 249 किमी की रफ्तार, 557 यात्रियों की क्षमता, 20 सुविधाएं, 12 स्टेशन और 2027 की संभावित शुरुआत।
नई दिल्ली। भारत की पहली स्वदेशी हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन का इंतजार अब धीरे-धीरे खत्म होने की ओर बढ़ रहा है। देश में निर्मित हो रही B28 यानी भारत मेड बुलेट ट्रेन ने सुरक्षा जांच का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा करने की दिशा में प्रगति की है। बेंगलुरु स्थित BEML की निर्माण इकाई में ट्रेन के पहले कोच का ‘व्हीकल बॉडी शेल असेसमेंट’ यानी स्क्वीज टेस्ट अंतिम चरण में है।
रेलवे के मुताबिक, इस ट्रेन का ट्रायल मई-जून 2027 में मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के सूरत-वापी सेक्शन पर शुरू करने की तैयारी है। इस हिस्से पर अगस्त 2027 से व्यावसायिक सेवा शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, पूरे 508 किलोमीटर लंबे मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को दिसंबर 2030 तक पूरा करने की योजना है।
क्या है B28 बुलेट ट्रेन का स्क्वीज टेस्ट?
स्क्वीज टेस्ट ट्रेन की सुरक्षा से जुड़ी एक महत्वपूर्ण जांच है। इसमें ट्रेन के बाहरी ढांचे यानी कार बॉडी पर नियंत्रित दबाव और बल लगाया जाता है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि दुर्घटना या टक्कर जैसी स्थिति में ट्रेन का ढांचा कितना मजबूत रहता है और क्या वह अत्यधिक दबाव पड़ने पर अपनी संरचनात्मक मजबूती बनाए रख सकता है।
रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बेंगलुरु में BEML की निर्माण इकाई का दौरा कर इस परीक्षण का जायजा लिया। स्क्वीज टेस्ट पूरा होने के बाद ट्रेन में प्रोपल्शन सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगाए जाएंगे। इसके बाद ट्रेन को अलग-अलग मौसम की परिस्थितियों में भी जांचा जाएगा। इसमें 50 डिग्री सेल्सियस तक गर्मी, अत्यधिक ठंड, धूल और भारी बारिश जैसी स्थितियां शामिल हैं।
BEML बना रहा है देश की पहली दो स्वदेशी बुलेट ट्रेनें
भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन B28 का निर्माण सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी BEML कर रही है। कंपनी को देश की पहली दो स्वदेशी हाई-स्पीड ट्रेनसेट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। प्रत्येक ट्रेन में आठ कोच होंगे।
रेलवे के अनुसार, ट्रेन की डिजाइन स्पीड 280 किलोमीटर प्रति घंटा और परिचालन गति 249 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है। आठ कोच वाली एक ट्रेन में करीब 557 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी।
बुलेट ट्रेन में मिलेंगी ये 20 आधुनिक सुविधाएं
भारत की B28 बुलेट ट्रेन को यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा और आराम को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। इसमें आधुनिक तकनीक के साथ कई खास सुविधाएं दी जाएंगी।
1. 249 किमी प्रति घंटे की परिचालन गति: ट्रेन को 280 किमी प्रति घंटे की डिजाइन और परीक्षण क्षमता के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। इसकी निर्धारित परिचालन गति 249 किमी प्रति घंटा होगी।
2. आठ कोच का ट्रेनसेट: प्रत्येक ट्रेन में आठ कोच होंगे। इनमें चार मोटर कार और चार ट्रेलर कार शामिल हैं।
3. 557 यात्रियों की क्षमता: आठ कोच वाली ट्रेन में करीब 557 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था होगी।
4. स्टैंडर्ड और एग्जीक्यूटिव क्लास: ट्रेन में सात स्टैंडर्ड-क्लास कोच और एक एग्जीक्यूटिव-क्लास कोच होगा। स्टैंडर्ड क्लास में 3×2 और एग्जीक्यूटिव क्लास में 2×2 सीटिंग व्यवस्था होगी।
5. रीजेनरेटिव ब्रेकिंग तकनीक: ब्रेक लगाने के दौरान उत्पन्न ऊर्जा को वापस हासिल कर इस्तेमाल करने की व्यवस्था होगी। इससे ऊर्जा की खपत कम करने में मदद मिलेगी।
6. दिव्यांग यात्रियों के लिए विशेष व्यवस्था: कम गतिशीलता वाले यात्रियों के लिए विशेष स्थान और सुविधाएं दी जाएंगी। दृष्टिबाधित यात्रियों की सहायता के लिए ब्रेल लिपि वाले साइनेज भी होंगे।
7. इमरजेंसी टॉक-बैक यूनिट: यात्री केबिन और कोच के बीच वेस्टिब्यूल में आपातकालीन संपर्क की सुविधा होगी। इससे यात्री जरूरत पड़ने पर ट्रेन के कर्मचारियों से बात कर सकेंगे।
8. बड़ी खिड़कियां: सीटों के पास बड़ी खिड़कियां दी जाएंगी, ताकि यात्री सफर के दौरान बाहर के नजारों का आनंद ले सकें।
9. वाई-फाई आधारित इन्फोटेनमेंट: ट्रेन में पैसेंजर इन्फोटेनमेंट सिस्टम होगा। यात्री इसमें पहले से उपलब्ध मनोरंजन और जानकारी से जुड़े कंटेंट का उपयोग कर सकेंगे।
10. कोच के बीच सील्ड गैंगवे: सभी कोच सिंगल-पीस सील्ड गैंगवे से जुड़े होंगे। इससे यात्री एक कोच से दूसरे कोच में आसानी से जा सकेंगे।
11. रिट्रैक्टेबल स्टेप्स: दरवाजों पर अंदर-बाहर होने वाली सीढ़ियां दी जाएंगी, जो ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच के अंतर को कम करने में मदद करेंगी।
12. दोनों सिरों पर ड्राइवर कैब: ट्रेन के आगे और पीछे दोनों तरफ ड्राइवर कैब होंगी। इनमें आधुनिक ऑन-बोर्ड कंट्रोल सिस्टम लगाया जाएगा।
13. ऑटोमैटिक अनाउंसमेंट सिस्टम: यात्रियों को स्टेशन, यात्रा और जरूरी सूचनाएं देने के लिए पब्लिक एड्रेस और ऑटोमैटिक अनाउंसमेंट सिस्टम होगा।
14. LED लाइटिंग: ट्रेन के अंदर आधुनिक LED लाइटें लगाई जाएंगी, जिससे बेहतर रोशनी मिलेगी।
15. LCD सूचना स्क्रीन: कोच के अंदर लगी स्क्रीन पर अंग्रेजी, हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में यात्रियों को जरूरी जानकारी दी जाएगी।
16. आधुनिक HVAC सिस्टम: ट्रेन में हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर-कंडीशनिंग की सुविधा होगी। हर कोच में दो HVAC यूनिट लगाई जाएंगी, जो तापमान और नमी को नियंत्रित करेंगी।
17. साउंड इंसुलेशन: ट्रेन की बॉडी और फर्श में आवाज कम करने वाली तकनीक का इस्तेमाल होगा। विशेष कोटिंग, स्कर्ट और बोगी कवर भी शोर कम करने में मदद करेंगे।
18. सामान रखने की सुविधा: यात्रियों के लिए ऊपर ओवरहेड रैक और बड़े बैग व सूटकेस रखने के लिए अलग लगेज स्टैंड दिए जाएंगे।
19. मोबाइल और लैपटॉप चार्जिंग: यात्रियों को मोबाइल फोन और लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए पावर आउटलेट मिलेंगे।
20. आधुनिक बायो-डाइजेस्टर टॉयलेट: ट्रेन में आधुनिक शौचालय होंगे, जिन्हें स्वच्छता और कचरे के बेहतर प्रबंधन को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन का रूट और 12 स्टेशन
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की कुल लंबाई करीब 508 किलोमीटर है। यह कॉरिडोर महाराष्ट्र, गुजरात और दादरा एवं नगर हवेली के क्षेत्र से होकर गुजरेगा। इसके प्रमुख स्टेशन इस प्रकार हैं:
- मुंबई
- ठाणे
- विरार
- बोइसर
- वापी
- बिलिमोरा
- सूरत
- भरूच
- वडोदरा
- आनंद
- अहमदाबाद
- साबरमती
मुंबई से अहमदाबाद का सफर होगा बेहद तेज
बुलेट ट्रेन शुरू होने के बाद मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा का समय काफी कम हो सकता है। प्रस्तावित तेज सेवाओं में यह दूरी करीब 1 घंटा 58 मिनट में तय करने की योजना बताई गई है। हालांकि, वास्तविक यात्रा समय ट्रेन के स्टॉपेज और परिचालन व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
फिलहाल इस रूट पर सामान्य रेल यात्रा में कई घंटे लगते हैं। हाई-स्पीड रेल सेवा शुरू होने से दोनों शहरों के बीच कारोबार, पर्यटन और यात्रियों की आवाजाही को नई गति मिलने की उम्मीद है।
कब शुरू होगी भारत की पहली बुलेट ट्रेन?
रेलवे की योजना के मुताबिक, B28 ट्रेन का ट्रायल मई-जून 2027 में सूरत-वापी सेक्शन पर शुरू करने की तैयारी है। इस करीब 100 किलोमीटर लंबे हिस्से पर अगस्त 2027 से व्यावसायिक परिचालन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
पूरे गुजरात सेक्शन को दिसंबर 2027 तक पूरा करने की उम्मीद है। वहीं, 508 किलोमीटर लंबे मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को दिसंबर 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
इस तरह भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन केवल तेज रफ्तार का नया अनुभव नहीं होगी, बल्कि देश में हाई-स्पीड रेल तकनीक और स्वदेशी निर्माण क्षमता की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। हालांकि, यात्रियों को सेवा शुरू होने के लिए परीक्षण और जरूरी सुरक्षा मंजूरियों का इंतजार करना होगा।
