शिवम गर्ग –
घिरोर (संवाददाता)। कस्बा क्षेत्र के मोहल्ला फर्रास में एक 21 वर्षीय युवती की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। प्रथम दृष्टया मामला फांसी लगाकर आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, हालांकि घटना के कारणों का स्पष्ट खुलासा नहीं हो सका है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मौके का निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई की, लेकिन परिजनों द्वारा पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिए जाने के कारण कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर स्थिति अस्पष्ट बनी हुई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मोहल्ला फर्रास निवासी क्रांति (21 वर्ष) पुत्री चंद्रसेन मंगलवार देर शाम एक कार्यक्रम से पूड़ी बेलने का कार्य कर घर लौटी थी। उस समय परिवार के अन्य सदस्य करहल रोड स्थित दूसरे आवास पर थे। बताया जाता है कि देर रात किसी समय उसने फांसी लगा ली।
बुधवार सुबह लगभग 6 बजे जब उसकी छोटी बहन नीलू (15 वर्ष) घर पहुंची और दरवाजा खोला, तो अंदर का दृश्य देखकर उसके होश उड़ गए। छत के कुंडे पर दुपट्टा लटका हुआ था, जबकि क्रांति जमीन पर अचेत अवस्था में पड़ी थी। बहन की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर एकत्र हो गए। स्थानीय लोगों द्वारा जांच करने पर युवती की मृत्यु की पुष्टि हो गई।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर जानकारी जुटाई। पुलिस ने शव का पंचनामा भरने की प्रक्रिया पूरी की, किंतु परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से साफ इनकार कर दिया। पुलिस द्वारा समझाने के बावजूद परिजन अपने निर्णय पर अड़े रहे, जिससे मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि नहीं हो सकी।
परिवारजनों के अनुसार, मृतका स्वभाव से मिलनसार थी और घरेलू जिम्मेदारियों में सक्रिय रूप से सहयोग करती थी। वह विभिन्न कार्यक्रमों में पूड़ी बेलने का कार्य कर परिवार की आर्थिक मदद करती थी। परिवार में कुल सात भाई-बहन हैं, जिनमें तीन बहनों का विवाह हो चुका है। एक भाई बाहर रहता है, जबकि रंजीत कुमार सहित अन्य भाई-बहन अलग-अलग स्थानों पर निवास करते हैं। मृतका की मां बिशना देवी करहल रोड स्थित दूसरे आवास पर रहती हैं।
घटना के बाद पूरे मोहल्ले में शोक और स्तब्धता का माहौल है। लोगों के बीच यह चर्चा बनी हुई है कि आखिर किन परिस्थितियों ने एक मिलनसार युवती को इतना बड़ा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
पुलिस का कहना है कि मामले में प्रारंभिक जांच की जा रही है और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि पोस्टमार्टम न होने के कारण कई महत्वपूर्ण सवाल अब भी अनुत्तरित हैं।
