अग्र भारत संवाददाता: शैलेश गौतम
अछनेरा (आगरा)। थाना अछनेरा क्षेत्र के ग्राम सॉधन निवासी एक गरीब हेयर ड्रेसर दुकानदार ने अछनेरा पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस उपायुक्त पश्चिम अतुल शर्मा , आगरा से शिकायत की है। पीड़ित नादू उर्फ रूप सिंह पुत्र दौलतराम का आरोप है कि उसे अवैध शराब बेचने के झूठे मुकदमे में फँसाकर पुलिस ने अपनी “गुडवर्क” दिखाने का प्रयास किया है।
पीड़ित के अनुसार, दिनांक 01 जनवरी 2026 को सुबह करीब 9:30 बजे वह सीएचसी सॉधन इलाज के लिए जा रहा था। रास्ते में ठेके के पास आग जलती देख वह कुछ देर तापने लगा। इसी दौरान एक चार पहिया वाहन में सवार तीन लोग वहां पहुंचे, जिनमें हल्का इंचार्ज एसएसआई जितेंद्र यादव भी शामिल थे। आरोप है कि बिना किसी कारण पूछताछ किए पुलिसकर्मियों ने उसके साथ मारपीट की और जबरन गाड़ी में बैठाकर थाने ले गए।पीड़ित का कहना है कि करीब ढाई बजे उसे थाने से निकालकर बीच की प्याऊ स्थित बाग के समीप ले जाया गया, जहां जबरन उसके हाथ में एक प्लास्टिक का कट्टा पकड़वाया गया और उसका वीडियो बनाया गया। इसके बाद उसे पुनः थाने लाकर छोड़ दिया गया। अगले दिन उसे जानकारी हुई कि उसके खिलाफ अवैध शराब बिक्री का मुकदमा आबकारी अधिनियम की धारा 60(1) के तहत दर्ज कर दिया गया है।पीड़ित ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि घटना स्थल और समय को लेकर पुलिस के दावे स्वयं संदेह के घेरे में हैं। जहां पुलिस बरामदगी का समय सुबह 11 बजे बता रही है, वहीं वीडियो का समय करीब 2:30 बजे का बताया जा रहा है। इसके अलावा, जिस स्थान से बरामदगी दर्शाई गई है और जहां वीडियो बनाया गया, दोनों स्थान अलग-अलग हैं।पीड़ित का दावा है कि जब उसे सुबह उठाया गया, उस समय उसके पास कोई भी आपत्तिजनक सामान नहीं था, जिसे मौके पर लगे सीसीटीवी कैमरों से स्पष्ट देखा जा सकता है। वहीं थाने में लगे सीसीटीवी फुटेज से यह भी सामने आ सकता है कि उसे पहले खाली हाथ थाने लाया गया और बाद में वीडियो बनाने के लिए दोबारा बाहर ले जाया गया।पीड़ित नादू उर्फ रूप सिंह ने बताया कि वह एक साधारण हेयर सैलून चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करता है और दिनभर उसी काम में व्यस्त रहता है। ऐसे में अवैध शराब बेचने का आरोप पूरी तरह निराधार है। घटना के समय गांव के कई लोग मौके पर मौजूद थे, जिन्हें उसने प्रत्यक्षदर्शी गवाह बताया है।पीड़ित ने पुलिस उपायुक्त पश्चिम से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने तथा दोषी पुलिसकर्मियों, विशेषकर एसएसआई जितेंद्र यादव एवं उनके सहयोगियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है। यह मामला पुलिस की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
