आगरा में रेलवे ट्रैक पर लकड़ी का टुकड़ा रखने के आरोपी सुरक्षा गार्ड प्रशांत चौधरी की जमानत अर्जी एडीजे-1 शिव कुमार की अदालत ने खारिज कर दी।
आगरा। रेलवे ट्रैक पर लकड़ी का टुकड़ा रखकर ट्रेन की सुरक्षित आवाजाही को खतरे में डालने के मामले में आरोपी सुरक्षा गार्ड को अदालत से राहत नहीं मिली है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे-1) शिव कुमार ने आरोपी प्रशांत चौधरी की जमानत अर्जी खारिज कर दी। अदालत ने मामले की गंभीरता और विवेचना के दौरान सामने आए साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।
आरोपी प्रशांत चौधरी हाथरस जिले के सादाबाद थाना क्षेत्र के बरामई गांव का निवासी बताया गया है। उसके खिलाफ जीआरपी आगरा फोर्ट थाने में रेलवे ट्रैक पर लकड़ी का टुकड़ा रखने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
अजमेर-आगरा फोर्ट इंटरसिटी के लोको पायलट को दिखा था लकड़ी का टुकड़ा
जीआरपी आगरा फोर्ट थाने में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, घटना 16 सितंबर की रात की है। अजमेर-आगरा फोर्ट इंटरसिटी ट्रेन आगरा की ओर आ रही थी। इसी दौरान आगरा किला और ईदगाह रेलवे स्टेशन के बीच लोको पायलट और सहायक लोको पायलट को रेलवे ट्रैक पर लकड़ी का एक टुकड़ा रखा हुआ दिखाई दिया।
ट्रेन के संचालन और यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लोको पायलट तथा सहायक लोको पायलट ने लकड़ी के टुकड़े को ट्रैक से हटाया। इसके बाद ट्रेन को सुरक्षित आगे रवाना किया गया। घटना की जानकारी संबंधित पुलिस को दी गई, जिसके बाद मामले की जांच शुरू हुई।
वीडियो के आधार पर हुई आरोपी की पहचान
पुलिस ने घटना से जुड़े वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की पहचान की। जांच के दौरान सुरक्षा गार्ड प्रशांत चौधरी का नाम सामने आया, जिसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया।
पुलिस ने आरोपी को 19 अक्टूबर को अदालत में पेश किया था। वहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। इसके बाद आरोपी की ओर से अदालत में जमानत के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया।
अदालत ने गंभीरता को देखते हुए जमानत देने से किया इनकार
आरोपी की ओर से दाखिल जमानत प्रार्थना पत्र पर एडीजे-1 शिव कुमार की अदालत में सुनवाई हुई। अदालत ने मामले की गंभीरता और विवेचना में अब तक उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार किया। इसके बाद आरोपी को जमानत देने से इनकार करते हुए उसका प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया।
अदालत के इस फैसले के बाद आरोपी को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। रेलवे ट्रैक पर लकड़ी रखने की घटना को रेल परिचालन और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला माना जा रहा है।
