Agra News: ट्रांस यमुना कॉलोनी फेस-2 में आवास विकास परिषद के स्वीकृत नक्शे से अलग निर्माण का आरोप। शिकायतों के बावजूद बिल्डिंग का काम जारी, अधिकारियों की भूमिका पर सवाल।
- शिकायतों के बाद भी निर्माण जारी, अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल
- अधिशासी अभियंता ने भी माना नक्शे के विपरीत हो रहा निर्माण
- ट्रांस यमुना क्षेत्र में एक दर्जन से अधिक भवनों पर उठ रहे सवाल
- मेरठ में सुप्रीम कोर्ट के आदेश से चल रही कार्रवाई का भी नहीं दिख रहा असर?
- क्षेत्रीय लोगों में नाराजगी, अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग
- ‘अग्र भारत’ करेगा एक-एक भवन की पड़ताल
- आवास आयुक्त और मुख्यमंत्री तक पहुंचेगा मामला
- छोटे निर्माण पर कार्रवाई, बड़े भवनों पर चुप्पी क्यों?
Agra News Today: आगरा में आवास विकास परिषद के निर्माण खंड-एक के अधीन ट्रांस यमुना कॉलोनी फेस-2 में कथित अवैध निर्माण का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। रॉयल चौराहे से अंदर आवासीय भूखंड पर बनाई जा रही कमर्शियल बिल्डिंग को लेकर स्थानीय लोगों ने आवास विकास परिषद के अधिकारियों से कई बार शिकायत की है। आरोप है कि शिकायतों और आपत्तियों के बावजूद निर्माण कार्य लगातार जारी है। इससे परिषद के अधिशासी अभियंता निर्माण खंड-एक और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस नक्शे के आधार पर भवन निर्माण की अनुमति दी गई थी, मौके पर उसके विपरीत निर्माण कराया जा रहा है। आवासीय भूखंड पर व्यावसायिक इमारत तैयार किए जाने की शिकायत के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी है। सवाल यह है कि जब निर्माण स्वीकृत नक्शे के अनुरूप नहीं हो रहा है तो जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करने में देरी क्यों कर रहे हैं?
शिकायतों के बाद भी निर्माण जारी, अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल
मामला ट्रांस यमुना कॉलोनी फेस-2 में रॉयल चौराहे से अंदर बन रही एक कमर्शियल बिल्डिंग से जुड़ा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस भवन का निर्माण आवास विकास परिषद में जमा नक्शे के अनुरूप नहीं किया जा रहा है। आरोप है कि आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित जमीन पर व्यावसायिक गतिविधियों के उद्देश्य से भवन तैयार किया जा रहा है।
इस संबंध में अधिशासी अभियंता निर्माण खंड-एक और अधीक्षण अभियंता से कई बार दूरभाष पर शिकायत किए जाने का दावा किया गया है। इसके बावजूद मौके पर निर्माण कार्य जारी रहने की बात सामने आ रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते निर्माण की जांच कर कार्रवाई की जाती तो भवन के इस स्तर तक पहुंचने की नौबत नहीं आती। अब निर्माण लगभग पूरा होने की ओर बढ़ रहा है, जिससे कार्रवाई को लेकर सवाल और गंभीर हो गए हैं।
अधिशासी अभियंता ने भी माना नक्शे के विपरीत हो रहा निर्माण
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शिकायतकर्ताओं के अनुसार अधिशासी अभियंता निर्माण खंड-एक ने स्वयं बातचीत में भवन का निर्माण स्वीकृत नक्शे के विपरीत होने की बात स्वीकार की है।
हालांकि, इस कथित स्वीकारोक्ति के बावजूद मौके पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, निर्माणकर्ता को एक-दो नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन इसके बाद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी।
ऐसे में सवाल उठता है कि यदि निर्माण वास्तव में स्वीकृत नक्शे के विपरीत है तो केवल नोटिस जारी करने तक कार्रवाई सीमित क्यों है? क्या भवन की मौके पर जांच कर निर्माण रोकने और नियमानुसार आगे की कार्रवाई करने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की नहीं है?
इस संबंध में परिषद के अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष और नोटिस की वर्तमान स्थिति सामने आना भी जरूरी है।
ट्रांस यमुना क्षेत्र में एक दर्जन से अधिक भवनों पर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों और क्षेत्रीय सूत्रों का दावा है कि आवास विकास परिषद के निर्माण खंड-एक के अंतर्गत ट्रांस यमुना क्षेत्र में करीब एक दर्जन से अधिक ऐसे भवनों का निर्माण हो रहा है, जिनमें स्वीकृत नक्शे से अलग निर्माण किए जाने की शिकायतें हैं।
यदि इन शिकायतों में तथ्य पाए जाते हैं तो यह केवल एक भवन का मामला नहीं रहेगा, बल्कि क्षेत्र में भवन निर्माण की निगरानी और नक्शों के अनुपालन की पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े होंगे।
नियमानुसार किसी भी भवन का निर्माण स्वीकृत मानचित्र और संबंधित भवन निर्माण नियमों के अनुरूप होना चाहिए। यदि निर्माण में बदलाव किया जाता है तो उसके लिए नियमानुसार अनुमति लेना आवश्यक होता है।
ऐसे में परिषद के अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है कि शिकायत मिलने पर मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति की जांच करें और नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर उचित कार्रवाई करें।
मेरठ में सुप्रीम कोर्ट के आदेश से चल रही कार्रवाई का भी नहीं दिख रहा असर?
स्थानीय स्तर पर इस मामले को लेकर यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि दूसरे शहरों में अवैध निर्माण के खिलाफ चल रही सख्त कार्रवाई के बावजूद आगरा में शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है।
लोगों का कहना है कि अवैध निर्माण के मामलों में समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया गया तो बाद में कार्रवाई करना और मुश्किल हो जाता है। निर्माण पूरा होने के बाद भवन को लेकर विवाद और अधिक जटिल हो सकता है।
हालांकि, मेरठ में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत चल रही कार्रवाई और आगरा के इस मामले के बीच किसी सीधे संबंध का दावा करने से पहले संबंधित आदेश और कार्रवाई का विवरण स्पष्ट होना जरूरी है।
क्षेत्रीय लोगों में नाराजगी, अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग
ट्रांस यमुना कॉलोनी के कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि छोटे निर्माण कार्यों पर तो परिषद के अधिकारी कार्रवाई करते दिखाई देते हैं, लेकिन बड़े भवनों के मामलों में शिकायतों के बावजूद निर्माण जारी रहने की बात समझ से परे है।
लोगों को आशंका है कि यदि भवन का निर्माण स्वीकृत नक्शे और सुरक्षा मानकों के विपरीत हुआ है तो भविष्य में आसपास के निवासियों और भवन के उपयोगकर्ताओं के लिए परेशानी पैदा हो सकती है।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि भवन की तकनीकी जांच कराई जाए। स्वीकृत नक्शे और मौके पर हुए निर्माण का मिलान किया जाए और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
‘अग्र भारत’ करेगा एक-एक भवन की पड़ताल
ट्रांस यमुना क्षेत्र में कथित अवैध निर्माण को लेकर ‘अग्र भारत’ ने मामले को प्रमुखता से उठाने का निर्णय लिया है। समाचार पत्र की ओर से निर्माण खंड-एक के अधीन बन रहे ऐसे भवनों की क्रमवार पड़ताल की जाएगी, जिनके निर्माण को लेकर स्वीकृत नक्शे से अलग काम होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
इस पड़ताल में यह जानने का प्रयास किया जाएगा कि परिषद के रिकॉर्ड में कौन सा नक्शा स्वीकृत है, मौके पर किस प्रकार का निर्माण हो रहा है और दोनों के बीच क्या अंतर है। साथ ही संबंधित अधिकारियों की भूमिका और शिकायतों पर की गई कार्रवाई की जानकारी भी जुटाई जाएगी।
आवास आयुक्त और मुख्यमंत्री तक पहुंचेगा मामला
ट्रांस यमुना कॉलोनी फेस-2 में कथित अवैध निर्माण का मामला अब उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने की तैयारी है। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, इस संबंध में आवास विकास परिषद के आवास आयुक्त, लखनऊ और मुख्यमंत्री कार्यालय में शिकायत भेजी जाएगी।
शिकायत के माध्यम से भवन के स्वीकृत नक्शे, मौके पर हो रहे निर्माण और परिषद के अधिकारियों को दी गई पूर्व शिकायतों की जांच कराने की मांग की जाएगी।
इसके साथ ही निर्माण खंड-एक के अधीन अन्य भवनों के निर्माण से संबंधित शिकायतें भी उच्च स्तर पर भेजने की तैयारी की जा रही है।
छोटे निर्माण पर कार्रवाई, बड़े भवनों पर चुप्पी क्यों?
क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि आवास विकास परिषद के अधिकारी छोटे निर्माण कार्यों पर तो कार्रवाई करते हैं, लेकिन बड़े भवनों में कथित नक्शा उल्लंघन की शिकायतों पर अपेक्षित कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
लोगों का कहना है कि इस भवन की शिकायत सुपरवाइजर से लेकर अधिशासी अभियंता स्तर तक की गई, लेकिन इसके बावजूद निर्माण कार्य बंद नहीं हुआ।
अब क्षेत्रीय लोगों की मांग है कि परिषद के वरिष्ठ अधिकारी स्वयं मौके पर पहुंचकर जांच करें और स्पष्ट करें कि स्वीकृत नक्शे से अलग निर्माण की शिकायतों पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है।
बड़ा सवाल: क्या आवास विकास परिषद के अधिकारी इस कथित अवैध निर्माण पर नियमानुसार प्रभावी कार्रवाई करेंगे या मामला नोटिस जारी करने तक ही सीमित रहेगा? फिलहाल ट्रांस यमुना के इस भवन को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है और सभी की निगाहें परिषद के अगले कदम पर टिकी हैं।
