आगरा उपभोक्ता आयोग ने इंडियन बैंक को पीपीएफ खाते से कम ट्रांसफर किए गए 4,79,903.92 रुपये छह प्रतिशत ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया।
आगरा। बैंक में खाता बंद कराकर दूसरे खाते में रकम स्थानांतरित कराना एक ग्राहक को महंगा पड़ गया। बैंक ने खाते में जमा पूरी धनराशि दूसरे खाते में ट्रांसफर नहीं की और 4.79 लाख रुपये रोक लिए। मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम ने इंडियन बैंक को बड़ा झटका दिया है। आयोग के अध्यक्ष सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव कुमार ने बैंक को 4,79,903.92 रुपये छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने के आदेश दिए हैं।
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पीपीएफ खाता बंद करने पर सामने आई रकम की गड़बड़ी
चर्च रोड निवासी संजीव सुराना संस (एचयूएफ) ने इंडियन बैंक की छिली ईंट और दिल्ली गेट शाखा के खिलाफ जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम में वाद दायर किया था।
शिकायत के अनुसार, उन्होंने वर्ष 2000 में इंडियन बैंक की छिली ईंट शाखा में पीपीएफ (एचयूएफ) खाता खुलवाया था। इसमें वह नियमित रूप से धनराशि जमा करते रहे। बैंक की ओर से जमा रकम पर नियमानुसार ब्याज भी दिया जाता रहा।
16 अप्रैल 2022 को बैंक के सुझाव पर उन्होंने अपना पीपीएफ खाता बंद करा दिया। इसके बाद दिल्ली गेट शाखा में नया बचत खाता खुलवाया, ताकि पीपीएफ खाते में जमा रकम को उसमें स्थानांतरित कराया जा सके।
खाते में 14.25 लाख रुपये, ट्रांसफर हुए सिर्फ 9.45 लाख
शिकायतकर्ता के मुताबिक, पीपीएफ खाता बंद करते समय उसमें कुल 14,25,244.92 रुपये जमा थे। बैंक ने इस पूरी रकम को नए बचत खाते में स्थानांतरित करने के बजाय केवल 9,45,341 रुपये ही ट्रांसफर किए।
इस तरह कुल जमा धनराशि में से 4,79,903.92 रुपये कम स्थानांतरित किए गए। शिकायतकर्ता ने बैंक से शेष रकम के बारे में जानकारी मांगी, लेकिन रकम वापस नहीं मिलने पर उन्होंने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
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उपभोक्ता आयोग ने बैंक को दिया रकम लौटाने का आदेश
मामले की सुनवाई के बाद जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम के अध्यक्ष सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव कुमार ने बैंक को 4,79,903.92 रुपये छह प्रतिशत ब्याज सहित लौटाने के आदेश दिए।
आयोग के इस आदेश से बैंकिंग सेवाओं में ग्राहकों के अधिकारों और बैंक की जवाबदेही का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। शिकायतकर्ता को अब बैंक से रोकी गई रकम ब्याज सहित वापस मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
