नेताजी तो कमाल हैं! जनता के बीच अब मधुरता लेकर दोनों नावों पर पैर रखकर चल रहे हैं, भाजपा में जड़ें कमजोर दिखीं तो बसपा में भी गोट फिट; पार्टी फंड में लाखों देने की चर्चाएं
निजी खर्च से गांवों की सड़कों पर विकास का दिखावा किया तो फूलमालाओं से हुआ स्वागत, स्थानीय ग्रामीणों से ज्यादा बाहरी लोगों की भीड़ जुटाकर दिखाया वर्चस्व
अग्र भारत संवाददाता आगरा । वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही फतेहपुर सीकरी विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक बिसात बिछनी शुरू हो गई है। चुनाव से पहले ही संभावित दावेदार अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने और पार्टी नेतृत्व के सामने जनाधार का प्रदर्शन करने में जुट गए हैं। इसी बीच भाजपा के एक बड़े नेता के करीबी माने जाने वाले नेता जी की राजनीतिक गतिविधियां चर्चा का विषय बनी हुई हैं। भाजपा में अपनी राजनीतिक जड़ें कमजोर होती देख उनके बसपा में भी नए सियासी समीकरण तलाशने की चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। यहां तक कि बसपा के पार्टी फंड में लाखों रुपये दिए जाने की बातें भी राजनीतिक गलियारों में तैर रही हैं।
नेता जी की सक्रियता का अंदाज भी निराला है। विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों में निजी खर्च से गिट्टी और मोरम डलवाकर उन्होंने खूब वाहवाही बटोरी। इसके बाद फूलमालाओं से स्वागत और समारोह के जरिए अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन भी किया गया। चर्चा है कि इन आयोजनों में स्थानीय ग्रामीणों से कहीं अधिक संख्या में दूरदराज के गांवों और विधानसभा क्षेत्र से बाहर के लोगों को बुलाकर भीड़ जुटाई गई, ताकि पार्टी नेतृत्व के सामने बड़ा जनाधार दिखाया जा सके।एक गांव की वर्षों पुरानी जलभराव की समस्या भी नेता जी की राजनीतिक सक्रियता का हिस्सा बनी। भाजपा के एक बड़े नेता की ओर से समस्या के समाधान के लिए लाखों रुपये खर्च करने का भरोसा दिया गया था। इस पहल में करीबी नेता जी ने अपनी भूमिका और प्रभाव का हवाला देकर श्रेय लेने की कोशिश हुई, लेकिन ग्रामीणों को आज भी जलभराव से राहत नहीं मिली है।वहीं, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की सड़क पर बिना अनुमति गिट्टी-मिट्टी और मोरम डलवाने का मामला भी चर्चा में रहा। बताया जाता है कि इसके बाद नेता जी फूलमालाओं के साथ फीता काटने पहुंचे थे। इस आयोजन में भी भीड़ जुटाकर अपनी लोकप्रियता और वर्चस्व का संदेश देने की कोशिश हुई। फेसबुक, यूट्यूब समेत अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कार्यक्रम की तस्वीरें और वीडियो साझा कर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को भी टैग किया गया। इसके जरिए पार्टी में अपनी राजनीतिक सक्रियता और पकड़ प्रदर्शित करने का प्रयास किया गया। हालांकि, स्थानीय लोगों को सड़क से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा।दिलचस्प पहलू यह है कि भाजपा के एक बड़े नेता जो पार्टी के शीर्ष से जुड़े हैं उनके साथ नेता जी के फोटो जगह-जगह बिजली के खंभों और सार्वजनिक स्थानों पर लगे पोस्टरों में दिखाई देते हैं। कमल के फूल के साथ भाजपा से अपनी नजदीकी प्रदर्शित करने वाले नेता जी के बसपा में भी संभावनाएं तलाशने की चर्चाओं ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर नेता जी किस पार्टी के सहारे 2027 की चुनावी वैतरणी पार करने की तैयारी में हैं?फिलहाल जनता के बीच मधुरता बढ़ाने, आयोजनों में भीड़ जुटाने और दोनों ओर सियासी गोटियां फिट करने की कवायद चर्चा में है। फतेहपुर सीकरी की जनता भी चुनाव से पहले होने वाले ऐसे विकास कार्यों, शक्ति प्रदर्शन और बदलते राजनीतिक समीकरणों को बारीकी से देख रही है। अब नेता जी की सियासी चाल कितनी सफल होती है, इसका फैसला आने वाला चुनाव ही करेगा।
यह भी हैं अहम चुनावी समीकरण:फतेहपुर सीकरी विधानसभा क्षेत्र में अनुसूचित जाति के मतदाताओं की संख्या भी चुनावी समीकरण में अहम भूमिका निभाती है। अनुमान के मुताबिक, क्षेत्र में अनुसूचित जाति के करीब 60 से 70 हजार मतदाता हैं। इनमें बड़ी संख्या बहुजन समाज पार्टी के परंपरागत समर्थक माने जाने वाले मतदाताओं की बताई जाती है। यही वजह है कि बसपा के वोट बैंक को साधने की कोशिशों को भी 2027 के चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, भाजपा में अपनी स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ बसपा में संभावनाएं तलाशना नेता जी की इसी चुनावी रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
