आगरा के दयालबाग स्पिरिचुअल मेडिसिन के इंटीग्रेटेड हार्मोनल थेरेपी शोध को काठमांडू में आयोजित इंटरनेशनल आयुष कॉन्क्लेव 4.0 में नेपाल ट्रॉफी और अंतरराष्ट्रीय आयुष सम्मान मिला। जानिए शोध की खास…
आगरा। दयालबाग स्पिरिचुअल मेडिसिन के अंतर्गत विकसित “इंटीग्रेटेड हार्मोनल थेरेपी: ए टू-ईयर क्लिनिकल केस सीरीज” पर किए गए मौलिक शोध को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। काठमांडू (नेपाल) में 12 से 14 जून 2026 तक आयोजित इंटरनेशनल आयुष कॉन्क्लेव 4.0 में इस शोध को नेपाल ट्रॉफी तथा आयुष लीजेंडरी एंड एक्सीलेंस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन CIVIC द्वारा लेजेंड्स वर्ल्ड रिकॉर्ड्स और नेपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न देशों के आयुष विशेषज्ञों, चिकित्सकों और शोधकर्ताओं ने भाग लिया।
प्रो. पी.एस. सत्संगी की प्रेरणा से हुआ शोध
यह शोध परम पूज्य प्रो. पी.एस. सत्संगी साहब, चेयरमैन, एडवाइजरी कमेटी ऑन एजुकेशन (ACE), दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट (डीम्ड यूनिवर्सिटी) की प्रेरणा से किया गया।
शोध दल में सरन आश्रम अस्पताल, दयालबाग की मानद शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अंजू भटनागर, मेडिकल ऑफिसर इंचार्ज डॉ. एस.के. सत्संगी, दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट की डॉ. आरती स्वरूप (पीएचडी स्कॉलर, धर्मविज्ञान) तथा डॉ. दयाल प्यारी श्रीवास्तव, प्रोफेसर (भौतिकी एवं कंप्यूटर विज्ञान विभाग) शामिल रहीं।
इस शोध पत्र का अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुतीकरण डॉ. आरती स्वरूप ने किया।
150 से अधिक गंभीर रोगियों पर किया गया अध्ययन
अध्ययन के अनुसार जुलाई 2022 से दिसंबर 2024 के बीच 150 से अधिक गंभीर रोगियों को Dayalbagh Experiential Medical Expert (DEMEX) तथा निर्धारित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के तहत इंटीग्रेटेड हार्मोनल थेरेपी दी गई।
यह उपचार पूरी तरह नेबुलाइजेशन आधारित, नॉन-इनवेसिव और नॉन-स्टेरॉयडल पद्धति पर आधारित था, जिसमें स्टेरॉयड के उपयोग से बचने का प्रयास किया गया।
शोध के अनुसार उपचार शुरू होने के एक सप्ताह के भीतर 86 प्रतिशत रोगियों में लक्षणों से उल्लेखनीय राहत दर्ज की गई।
इलेक्ट्रोफोटोनिक इमेजिंग तकनीक से भी हुआ मूल्यांकन
शोध में 50 से अधिक रोगियों की क्लिनिकल प्रगति का मूल्यांकन इलेक्ट्रोफोटोनिक इमेजिंग (Electrophotonic Imaging) तकनीक के माध्यम से किया गया।
क्वांटम बायोफिजिक्स आधारित इस तकनीक और विशेष सॉफ्टवेयर की मदद से मानव जैव-ऊर्जा क्षेत्र में होने वाले परिवर्तनों का अध्ययन किया गया।
शोध के निष्कर्षों के अनुसार 90 प्रतिशत से अधिक रोगियों में सिम्पैथेटिक और पैरासिम्पैथेटिक तंत्र के संतुलन में सकारात्मक सुधार पाया गया।
छह महीने की निगरानी में 96 प्रतिशत रोगियों में सुधार
शोध दल ने तीन से छह महीने तक रोगियों की निगरानी की। इस दौरान 96 प्रतिशत रोगियों में लक्षणात्मक सुधार अथवा रिकवरी दर्ज की गई।
इसके बाद मरीजों को चरणबद्ध तरीके से होम्योपैथिक हार्मोनल मेंटेनेंस डोज दी गई। अध्ययन अवधि में किसी भी प्रकार के उल्लेखनीय दुष्प्रभाव सामने नहीं आए।
शोध के अनुसार कई रोगियों में दर्द निवारक, मधुमेह और उच्च रक्तचाप की दवाओं की आवश्यकता भी कम हो गई। वहीं जिन रोगों में पूर्ण रिकवरी संभव नहीं थी, उनमें इस पद्धति ने रोगियों की जीवन गुणवत्ता और रोग से मुकाबला करने की क्षमता बढ़ाने में मदद की।
शोधकर्ताओं की उपलब्धियां भी रहीं उल्लेखनीय
शोध दल की प्रमुख सदस्य डॉ. दयाल प्यारी श्रीवास्तव एप्लाइड इलेक्ट्रॉनिक्स में विशिष्ट योग्यता के साथ एमएससी कर चुकी हैं। उन्हें एमफिल स्तर पर डायरेक्टर्स मेडल प्राप्त हो चुका है। उनके एक शोध-पत्र ने 400 से अधिक का ऑल्टमेट्रिक स्कोर हासिल किया है, जिसे भारतीय शोधकर्ताओं के लिए उल्लेखनीय उपलब्धि माना जाता है।
वहीं डॉ. अंजू भटनागर को उनके उत्कृष्ट शैक्षणिक और चिकित्सकीय योगदान के लिए प्रेसिडेंट्स मेडल, एस.एस. सप्रा गोल्ड मेडल, वी.सी. दत्त गोल्ड मेडल, के.सी. वागा गोल्ड मेडल सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। उन्हें दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट एलुमनाई द्वारा लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है।
डॉ. आरती स्वरूप धर्मविज्ञान में एमफिल के लिए डायरेक्टर्स मेडल प्राप्त कर चुकी हैं। वहीं सह-लेखक डॉ. एस.के. सत्संगी सरन आश्रम अस्पताल के चीफ मेडिकल ऑफिसर हैं और पूर्व में एस.एन. मेडिकल कॉलेज के नेत्र विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष भी रह चुके हैं।
आयुष चिकित्सा के क्षेत्र में नई उपलब्धि

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिले इस सम्मान को दयालबाग स्पिरिचुअल मेडिसिन और भारतीय आयुष चिकित्सा पद्धति के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। शोध दल का मानना है कि इंटीग्रेटेड हार्मोनल थेरेपी पर आगे भी व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन किए जाएंगे, जिससे गंभीर रोगों के उपचार में नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त हो सके।


