आगरा। विकास खंड बरौली अहीर की ग्राम पंचायत सचिव अर्पणा यादव के विरुद्ध वित्तीय अनियमितताओं और ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर भुगतान संबंधी गड़बड़ियों के आरोप जांच में प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होने से सवाल खड़े होने लगे हैं। शिकायतकर्ता ने प्रशासनिक कार्रवाई में हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए पूरे मामले को गंभीर बताया है।
भाजपा श्यामो मंडल अध्यक्ष विजय सिंह लोधी द्वारा शासन स्तर पर की गई शिकायत के बाद जिला प्रशासन ने मामले की जांच कराई थी। जांच में ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर भुगतान संबंधी अनियमितताओं तथा वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप सही पाए गए थे। जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला पंचायत राज अधिकारी ने सचिव के विरुद्ध विभागीय एवं विधिक कार्रवाई की संस्तुति भी कर दी थी। हालांकि जांच पूरी होने और कार्रवाई की संस्तुति भेजे जाने के बाद भी संबंधित सचिव अभी तक अपने पद पर बनी हुई हैं। शिकायतकर्ता विजय सिंह लोधी का कहना है कि जब जांच में आरोप सही पाए जा चुके हैं और सक्षम अधिकारी कार्रवाई की संस्तुति भी कर चुके हैं, तब तक सचिव को पद से न हटाया जाना कई सवाल खड़े करता है। उनका आरोप है कि कार्रवाई में हो रही देरी से शासन की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति पर भी सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, प्रकरण सामने आने के बाद पंचायत विभाग में चर्चाओं का दौर जारी है, लेकिन धरातल पर अब तक कोई दंडात्मक कार्रवाई दिखाई नहीं दी है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि जांच रिपोर्ट के बाद भी कार्रवाई की फाइल किस स्तर पर अटकी हुई है। अब निगाहें जिला प्रशासन और पंचायत विभाग के उच्चाधिकारियों पर टिकी हैं। देखना होगा कि जांच में दोषी पाए गए अधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई कब तक अमल में लाई जाती है या मामला केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाता है।
जांच में दोषी, फिर भी कार्रवाई नहीं, ग्राम पंचायत सचिव अर्पणा यादव के रसूख पर उठे सवाल
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