झांसी: इस्लाम धर्म के अंतिम पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब का जन्मदिन झांसी शहर में बड़े ही उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया गया। मदीना मस्जिद, मरकज-ए-अहले सुन्नत वल जमात, सीरत-ए-मुस्तफा कमेटी के आह्वान पर जुलूस-ए-मोहम्मदी का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। यह भव्य जुलूस पिछले 60 वर्षों से लगातार निकाला जा रहा है।
जुलूस का स्वरूप और माहौल
हाफिज और उलमाओं की देखरेख में निकाले गए इस जुलूस में छोटे-छोटे मासूम बच्चों ने विशेष रूप से शोभा बढ़ाई। जुलूस के दौरान, नौजवान ‘नारे तकबीर अल्लाह हू अकबर’ और ‘नारे रिसालत या रसूल अल्लाह’ जैसे नारे लगाते हुए चल रहे थे। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन पार्टी के बुंदेलखंड अध्यक्ष ने जुलूस में शामिल सभी लोगों का स्वागत किया।
गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल

यह जुलूस कपूर टेकरी मदीना मस्जिद से शुरू होकर कुरैश नगर चौराहा, ओरछा गेट, चनिया पुरा, तलैया मोहल्ला, बड़ा बाजार, मानिक चौक और सिंधी तिराहे से होते हुए गुलाम गौस खान चौराहे पर एक जलसे के रूप में समाप्त हुआ। जुलूस का जगह-जगह स्वागत किया गया। इस मौके पर, विभिन्न धर्मों के लोगों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जो शहर की गंगा-जमुनी तहजीब की एक खूबसूरत मिसाल पेश करता है।
सामाजिक कार्यों और प्रमुख लोगों की भागीदारी
ऑल इंडिया जमीअतुल कुरैश के राष्ट्रीय महासचिव कलाम कुरैशी के नेतृत्व में जगह-जगह लंगर बांटा गया और अस्पतालों में फलों का वितरण किया गया। कुरैश कॉन्फ्रेंस सामाजिक संस्था ने भी बैनर लगाकर जुलूस का गर्मजोशी से स्वागत किया।
इस दौरान, मुफ्ती अमान सिद्दीकी मंजरी, पेश इमाम हाफिज कारी फुरकान रजा, सूफी नौसे मौलाना मोसिन, मौलाना नवीर रजा मरकजी, मौलाना याकूब बरेलवी समेत कई उलमाओं और हाफिज ने मोहम्मद साहब के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने खूबसूरत नात-ए-पाक पढ़कर सुनाईं और सलातो सलाम के साथ जलसे का समापन किया।
जुलूस में चौधरी रहीस कुरैशी, एडवोकेट सद्दाम अली, शरीफ रज़ा, मुकीम कुरैशी, शकील कुरैशी, इमरान कुरैशी, सूफी रहीस खान और नबीबख्श कुरैशी सहित सैकड़ों की संख्या में लोग शामिल थे।
