उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह ने 28 अक्टूबर 2026 को रिकॉर्ड डिजिटलीकरण पर आधारित डॉक्यूमेंट्री रिलीज की। रेलवे में 4 करोड़ से अधिक रिकॉर्ड डिजिटल किए गए, 200 मीट्रिक टन कागज हटाया गया और 25 हजार वर्गफीट कार्यालयी स्थान खाली कराया गया।
- उत्तर मध्य रेलवे की बड़ी उपलब्धि: 4 करोड़ से अधिक रिकॉर्ड डिजिटल, 25 हजार वर्गफीट जगह हुई खाली
- महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह ने रिलीज की डिजिटलीकरण पर आधारित डॉक्यूमेंट्री
- 4 करोड़ से अधिक रिकॉर्ड डिजिटल, स्टोरेज क्षमता 58 टेराबाइट के पार
- स्वच्छता अभियान में हटाया गया 200 मीट्रिक टन कागज
- 25 हजार वर्गफीट कार्यालयी स्थान हुआ खाली
- पेपरलेस कार्यसंस्कृति को बढ़ावा देने पर जोर
- पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल
- निष्कर्ष: डिजिटल रेलवे की दिशा में उत्तर मध्य रेलवे के प्रयास
उत्तर मध्य रेलवे की बड़ी उपलब्धि: 4 करोड़ से अधिक रिकॉर्ड डिजिटल, 25 हजार वर्गफीट जगह हुई खाली
प्रयागराज। उत्तर मध्य रेलवे में कार्यालयी कार्यप्रणाली को अधिक सरल, व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए रिकॉर्ड डिजिटलीकरण की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह ने रिकॉर्ड डिजिटलीकरण कार्यक्रम की उपलब्धियों और इसके महत्व को प्रदर्शित करने वाली डॉक्यूमेंट्री रिलीज की। इस अवसर पर उत्तर मध्य रेलवे के विभिन्न मंडलों के मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) सहित वरिष्ठ रेल अधिकारी उपस्थित रहे।
रेलवे की इस पहल के तहत अब तक 4 करोड़ से अधिक रिकॉर्ड डिजिटल किए जा चुके हैं। इसके साथ ही स्वच्छता अभियान के अंतर्गत 200 मीट्रिक टन कागज हटाया गया है। पुराने रिकॉर्ड के निस्तारण से लगभग 25,000 वर्गफीट कार्यालयी स्थान खाली कराया गया, जबकि डिजिटल अभिलेखों को सुरक्षित रखने के लिए 58 टेराबाइट से अधिक स्टोरेज क्षमता विकसित की गई है।
उत्तर मध्य रेलवे की यह पहल कार्यालयी कामकाज में तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने, कागजी दस्तावेजों पर निर्भरता कम करने और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह ने रिलीज की डिजिटलीकरण पर आधारित डॉक्यूमेंट्री
डिजिटलीकरण कार्यक्रम की उपलब्धियों को सामने लाने के उद्देश्य से तैयार डॉक्यूमेंट्री में रेलवे की डिजिटल कार्यसंस्कृति, अभिलेखों के सुरक्षित संरक्षण और कागजी रिकॉर्ड के स्थान पर डिजिटल माध्यमों के बढ़ते इस्तेमाल को प्रदर्शित किया गया।
डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से बताया गया कि किस प्रकार रिकॉर्ड डिजिटलीकरण से कार्यालयों में दस्तावेजों को व्यवस्थित रखना और जरूरत के समय उन्हें खोजना आसान हो सकता है। इससे कर्मचारियों को पुराने अभिलेखों तक पहुंचने में लगने वाले समय की बचत होती है और कार्यालयी प्रक्रियाओं को अधिक सुव्यवस्थित बनाने में मदद मिलती है।
इस अवसर पर महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह ने डिजिटलीकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से इस प्रक्रिया को निरंतर आगे बढ़ाने तथा शेष अभिलेखों को भी चरणबद्ध तरीके से डिजिटल करने पर जोर दिया।
4 करोड़ से अधिक रिकॉर्ड डिजिटल, स्टोरेज क्षमता 58 टेराबाइट के पार
उत्तर मध्य रेलवे में रिकॉर्ड डिजिटलीकरण अभियान के तहत बड़ी संख्या में दस्तावेजों को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित किया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अब तक 4 करोड़ से अधिक रिकॉर्ड डिजिटल किए जा चुके हैं।
इस काम में डिजिटल स्टोरेज की महत्वपूर्ण भूमिका है। रेलवे ने डिजिटल अभिलेखों के संरक्षण के लिए 58 टेराबाइट से अधिक स्टोरेज क्षमता विकसित की है। इससे बड़ी मात्रा में दस्तावेजों को व्यवस्थित रूप से सुरक्षित रखने की सुविधा मिलती है।
डिजिटल रिकॉर्ड का उपयोग होने से पुराने दस्तावेजों को भौतिक फाइलों में खोजने की जरूरत कम हो सकती है। साथ ही, रिकॉर्ड तक पहुंच, उनके रखरखाव और कार्यालयी कामकाज में समय की बचत होने की संभावना बढ़ती है।
डिजिटलीकरण की सफलता के लिए डिजिटल अभिलेखों की सुरक्षा, नियमित बैकअप और अधिकृत अधिकारियों को नियंत्रित पहुंच उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
स्वच्छता अभियान में हटाया गया 200 मीट्रिक टन कागज
उत्तर मध्य रेलवे में डिजिटलीकरण के साथ स्वच्छता अभियान के तहत पुराने कागजी रिकॉर्ड को हटाने और अनुपयोगी अभिलेखों के निस्तारण पर भी काम किया गया है। इस दौरान 200 मीट्रिक टन कागज हटाया गया।
पुराने रिकॉर्ड के निस्तारण से कार्यालयों में दस्तावेजों के भंडारण के लिए इस्तेमाल होने वाली जगह कम हुई है। इससे कार्यालयों को व्यवस्थित बनाने और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, पुराने अभिलेखों का निस्तारण निर्धारित नियमों और रिकॉर्ड संरक्षण की समय-सीमा के अनुसार किया जाना जरूरी है, ताकि भविष्य में आवश्यक दस्तावेजों की उपलब्धता प्रभावित न हो।
25 हजार वर्गफीट कार्यालयी स्थान हुआ खाली
डिजिटलीकरण और पुराने रिकॉर्ड के निस्तारण का एक प्रमुख लाभ कार्यालयी स्थान की उपलब्धता के रूप में सामने आया है। उत्तर मध्य रेलवे में पुराने रिकॉर्ड के निस्तारण से लगभग 25,000 वर्गफीट कार्यालयी जगह खाली कराई गई है।
कागजी फाइलों और पुराने दस्तावेजों के लिए बड़ी जगह की जरूरत होती है। डिजिटल रिकॉर्ड की व्यवस्था मजबूत होने पर भौतिक भंडारण पर निर्भरता कम की जा सकती है। खाली हुए स्थान का बेहतर कार्यालयी उपयोग करने की संभावनाएं भी बढ़ती हैं।
इस पहल से रेलवे के कार्यालयों में अधिक व्यवस्थित कार्य वातावरण विकसित करने और उपलब्ध स्थान का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है।
पेपरलेस कार्यसंस्कृति को बढ़ावा देने पर जोर
महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह ने कार्यालयी कामकाज में डिजिटल माध्यमों के अधिकाधिक उपयोग और पेपरलेस कार्यसंस्कृति को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
पेपरलेस कार्यप्रणाली का उद्देश्य केवल कागज की खपत कम करना नहीं है, बल्कि दस्तावेजों के प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित बनाना भी है। डिजिटल माध्यमों से रिकॉर्ड का रखरखाव आसान हो सकता है और विभिन्न कार्यालयी प्रक्रियाओं में समय की बचत की जा सकती है।
रेलवे जैसे बड़े संगठन में बड़ी मात्रा में दस्तावेजों का प्रबंधन करना महत्वपूर्ण कार्य है। ऐसे में रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने, सूचना तक पहुंच बेहतर बनाने और संसाधनों के प्रभावी उपयोग में सहायक हो सकता है।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल
उत्तर मध्य रेलवे की रिकॉर्ड डिजिटलीकरण पहल प्रशासनिक सुधार के साथ पर्यावरण अनुकूल कार्यप्रणाली को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है। कागज पर निर्भरता कम करने से भविष्य में कागज की खपत घटाने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
इसके साथ ही कार्यालयों में पुराने रिकॉर्ड के व्यवस्थित निस्तारण और उपलब्ध जगह के बेहतर इस्तेमाल से संसाधनों का अधिक प्रभावी प्रबंधन संभव हो सकता है।
रेलवे प्रशासन की ओर से डिजिटलीकरण को आगे बढ़ाने पर दिया जा रहा जोर इस बात को रेखांकित करता है कि आधुनिक तकनीक का उपयोग कार्यालयी प्रक्रियाओं को सरल बनाने और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार कार्यसंस्कृति विकसित करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
निष्कर्ष: डिजिटल रेलवे की दिशा में उत्तर मध्य रेलवे के प्रयास
उत्तर मध्य रेलवे में 4 करोड़ से अधिक रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण, 200 मीट्रिक टन कागज हटाना, 25,000 वर्गफीट कार्यालयी स्थान खाली कराना और 58 टेराबाइट से अधिक स्टोरेज क्षमता विकसित करना इस अभियान की प्रमुख उपलब्धियां हैं।
महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह ने अधिकारियों और कर्मचारियों को डिजिटलीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने तथा शेष अभिलेखों को चरणबद्ध तरीके से डिजिटल करने के निर्देश दिए।
रेलवे की यह पहल कार्यालयी कार्यप्रणाली को आधुनिक बनाने, दस्तावेजों के प्रबंधन को बेहतर करने और पेपरलेस कार्यसंस्कृति को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।
